जंग की आहट के बीच ईरान के विदेश मंत्री ने एस जयशंकर को लगाया कॉल, जानें दोनों के बीच क्या हुई बात

    Iran Call India: पश्चिम एशिया एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है. इजरायल-ईरान तनाव, अमेरिकी सैन्य हलचल और लगातार आ रही युद्ध की आशंकाओं के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अहम सक्रियता दिखाई है.

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    Image Source: ANI/ File

    Iran Call India: पश्चिम एशिया एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है. इजरायल-ईरान तनाव, अमेरिकी सैन्य हलचल और लगातार आ रही युद्ध की आशंकाओं के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अहम सक्रियता दिखाई है. इसी क्रम में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से अचानक फोन पर बात की. यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब पूरे क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी चूक से हालात बेकाबू हो सकते हैं.

    डॉ. एस जयशंकर ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फोन कॉल की पुष्टि की. दोनों नेताओं के बीच ईरान और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से बदल रही सुरक्षा स्थिति पर गंभीर चर्चा हुई. माना जा रहा है कि तेहरान मौजूदा संकट में भारत की भूमिका को लेकर खासा आशान्वित है. दिलचस्प बात यह है कि एक दिन पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी जयशंकर से बातचीत कर चुके हैं, जिससे भारत की कूटनीतिक अहमियत और बढ़ गई है.

    युद्ध के संकेत और बढ़ती आशंकाएं

    मिडिल ईस्ट में हालात केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल के प्रधानमंत्री का विशेष विमान उड़ान भर चुका है, जिसे अक्सर बड़े सैन्य फैसलों से जोड़ा जाता है. वहीं कतर में मौजूद अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डे से कर्मियों को हटाने की खबरों ने तनाव को और गहरा कर दिया है. ऐसे माहौल में ईरान का भारत से संपर्क करना यह संकेत देता है कि तेहरान इस संकट को सिर्फ सैन्य नजरिए से नहीं, बल्कि कूटनीतिक रास्तों से भी संभालना चाहता है.

    भारत की संतुलित स्थिति

    भारत के ईरान और इजरायल, दोनों देशों से ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्ते रहे हैं. यही वजह है कि नई दिल्ली की किसी भी सलाह या पहल को क्षेत्र में गंभीरता से लिया जाता है. भारत लंबे समय से संवाद, शांति और कूटनीति का पक्षधर रहा है. ऐसे में जयशंकर की भूमिका संभावित टकराव को टालने और तनाव कम करने में अहम मानी जा रही है.

    ईरान-अमेरिका टकराव अपने चरम पर

    ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के कथित 50 हाई-वैल्यू सैन्य ठिकानों की सूची सौंपी गई है. इसमें रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और बासिज से जुड़े अहम ठिकाने शामिल बताए जा रहे हैं. ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा और फांसी जारी रही, तो अमेरिका बेहद सख्त कदम उठाएगा.

    सैन्य हलचल और जवाबी चेतावनियां

    रणनीतिक स्तर पर भी असाधारण गतिविधियां दिख रही हैं. कतर स्थित अल-उदेद एयरबेस से अमेरिकी कर्मियों को हटाने के निर्देश और इजरायल के विशेष विमान की उड़ान को संभावित सैन्य कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है. उधर ईरान ने भी साफ कर दिया है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा.

    क्या भारत बनेगा संकट का समाधान?

    इन तमाम घटनाक्रमों के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता यह संकेत देती है कि नई दिल्ली इस संकट को बेहद गंभीरता से देख रही है. अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या भारत अपने संतुलित रिश्तों और संवाद की नीति के जरिए पश्चिम एशिया को एक और बड़े युद्ध से बचाने में कोई निर्णायक भूमिका निभा पाएगा या नहीं.

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