Uttarakhand Green Cess: नये साल की शुरुआत के साथ ही उत्तराखंड यात्रा करने वालों के लिए एक नया नियम लागू होने जा रहा है, जो उनकी यात्रा को महंगा कर सकता है. अगर आप 2026 में देवभूमि जाने का प्लान बना रहे हैं, तो तैयार हो जाइए, क्योंकि उत्तराखंड सरकार पर्यटकों से ‘ग्रीन सेस’ के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने जा रही है. सरकार का दावा है कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया गया है.
2026 से वाहनों पर लगेगा 'ग्रीन सेस'
उत्तराखंड सरकार ने 1 जनवरी 2026 से पर्यटकों से ग्रीन सेस वसूलने का फैसला लिया है, जो हर प्रकार के वाहन पर लागू होगा. चाहे आप बस, कार, वैन, या ट्रक लेकर उत्तराखंड जा रहे हों, आपको इस अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा. हालांकि, यह शुल्क वाहनों के प्रकार के हिसाब से अलग-अलग होगा. इस सेस की वसूली का उद्देश्य राज्य के पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ सड़क और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार करना है.
सेस वसूली के तरीके में बदलाव
अब तक उत्तराखंड में पर्यटकों से सेस की वसूली मुख्य रूप से उनके वाहनों की एंट्री के समय की जाती थी, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो पाई. ऐसे में सरकार ने ग्रीन सेस की वसूली को डिजिटल बनाने का निर्णय लिया है. अब, जैसे टोल टैक्स के लिए फास्टटैग काम करता है, उसी तरह ग्रीन सेस भी आपके फास्टटैग से काट लिया जाएगा. इस प्रणाली के लागू होने से ग्रीन सेस वसूलने में पारदर्शिता और आसानी होगी.
किस वाहन से कितना होगा वसूला?
अब सवाल ये उठता है कि ग्रीन सेस की दरें क्या होंगी और किस वाहन से कितना शुल्क लिया जाएगा. उत्तराखंड सरकार ने इसके लिए अलग-अलग श्रेणियां तय की हैं. छोटे वाहनों जैसे कार और वैन से 80 रुपये से लेकर 140 रुपये तक का सेस लिया जाएगा, जबकि भारी वाहनों से 450 रुपये से लेकर 700 रुपये तक का शुल्क वसूला जाएगा.
इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति बार-बार उत्तराखंड आता-जाता है, तो वह 1 से 3 महीने का पास बनवा सकता है, जिसमें ग्रीन सेस की दरें कुछ कम हो जाएंगी. यह निर्णय उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगा, जो नियमित रूप से उत्तराखंड यात्रा करते हैं.
इन वाहनों को मिलेगी छूट
गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने कुछ वाहनों को ग्रीन सेस से मुक्त रखा है. जिनमें बाइक, स्कूटर, ट्रैक्टर, एंबुलेंस, शव वाहन, फायर टेंडर, और सेना के वाहन शामिल हैं. इसके अलावा, इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों से भी ग्रीन सेस वसूला नहीं जाएगा, ताकि पर्यावरण के अनुकूल वाहनों को प्रोत्साहित किया जा सके.
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