Top Cities Bank Saving: भारत के बड़े शहरों में बैंकिंग और वित्तीय बचत की प्रवृत्तियां लगातार बढ़ रही हैं, और यह बात भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा रिपोर्ट से साफ जाहिर होती है. 2025 के पहले छह महीनों में, शहरी क्षेत्रों के लोगों ने बैंकों में जमाराशि में जबरदस्त बढ़ोतरी की है. इस दौरान, मुंबई और दिल्ली ने एक बार फिर अपनी प्रमुखता साबित की है, जबकि कई अन्य शहरों ने भी वित्तीय मामलों में अपनी स्थिति मजबूत की है.
रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई ने 9.44 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बैंकों में सबसे अधिक पूंजी जमा की है, जो भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में उसकी अहमियत को और बढ़ाता है. इसके बाद दिल्ली 8.99 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है. दिल्लीवासियों ने इस अवधि में कुल 48,624 करोड़ रुपये बैंकों में जमा किए. ये आंकड़े दिल्ली के वित्तीय समृद्धि की दिशा में एक और मजबूत कदम को दर्शाते हैं.
गुरुग्राम और नोएडा का वित्तीय उत्थान
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के अन्य प्रमुख शहरों ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया है. गुरुग्राम और नोएडा ने बैंकों में क्रमशः 22,809 करोड़ रुपये और 11,008 करोड़ रुपये जमा किए हैं. यह दर्शाता है कि यह क्षेत्र अब केवल रियल एस्टेट और कॉर्पोरेट हब ही नहीं, बल्कि एक मजबूत वित्तीय हब भी बन चुका है.
बेंगलुरु और पुणे: आईटी हब से बैंकिंग हब तक
देश के अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो बेंगलुरु, जो पहले एक आईटी और स्टार्टअप हब के रूप में जाना जाता था, अब बैंकिंग में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. बेंगलुरु ने 5.67 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ टॉप शहरों में अपनी जगह बनाई है. पुणे भी 2.55 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ इस सूची में शामिल है, और यह शहर अपनी वित्तीय स्थिति को बेहतर करने में लगातार प्रयासरत है.
हैदराबाद और कोलकाता: बढ़ती वित्तीय जागरूकता
हैदराबाद और कोलकाता के लोग भी बैंकों में जमा करने के मामले में पीछे नहीं हैं. हैदराबाद की हिस्सेदारी 2.04 प्रतिशत रही, जबकि कोलकाता ने 2.03 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ इस सूची में जगह बनाई है. दोनों ही शहरों में आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों के विकास के कारण वित्तीय बचत की प्रवृत्तियां तेज हो रही हैं.
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छोटे और मझोले शहरों का वित्तीय विकास
दिलचस्प बात यह है कि इस रिपोर्ट में छोटे और मझोले शहरों का योगदान भी स्पष्ट रूप से देखा गया. अहमदाबाद, ठाणे, लखनऊ जैसे शहर भी बैंकों में पूंजी जमा करने के मामले में महत्वपूर्ण स्थान पर हैं. अहमदाबाद की हिस्सेदारी 1.65 प्रतिशत रही, जबकि ठाणे और लखनऊ की हिस्सेदारी क्रमशः 1.45 प्रतिशत और 1.25 प्रतिशत रही. जयपुर और खुर्दा जैसे शहरों में भी बैंकिंग और बचत की संस्कृति तेजी से पांव पसार रही है.
शहरीकरण, बढ़ती आय और वित्तीय जागरूकता
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि के पीछे शहरीकरण, आईटी और सेवा क्षेत्र का विस्तार, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि, रियल एस्टेट का विकास, और बढ़ती आय प्रमुख कारण हैं. इसके अलावा, लोगों के बीच वित्तीय जागरूकता और बचत की प्रवृत्तियां भी इस बदलाव का हिस्सा हैं. छोटे शहरों में बैंकों में जमा होने वाली पूंजी के आंकड़े बताते हैं कि अब लोग केवल खर्च करने के बजाय बचत करने पर भी ध्यान दे रहे हैं.
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