The JC Show: “NaMo: कूटनीति का स्वर्ण युग”

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की यात्राएं सिर्फ एक प्रोटोकॉल नहीं बल्कि एक पॉलिटिकल मैसेजिंग है. जहां प्रधानमंत्री सबसे पहले पहुंचे जॉर्डन, फिर इथियोपिया और फिर उसके बाद ओमान. यह कहीं ना कहीं तीनों ही देशों के रिश्तों के साथ होते मजबूत प्रगति की दिशा को तय करती हैं.

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    THE JC SHOW: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की यात्राएं सिर्फ एक प्रोटोकॉल नहीं बल्कि एक पॉलिटिकल मैसेजिंग है. जहां प्रधानमंत्री सबसे पहले पहुंचे जॉर्डन, फिर इथियोपिया और फिर उसके बाद ओमान. यह कहीं ना कहीं तीनों ही देशों के रिश्तों के साथ होते मजबूत प्रगति की दिशा को तय करती हैं. भारत का हर एक टेबल पर स्टेक दिखाती हैं. दिल, दोस्ती, डील, डिप्लोमेसी और डेवलपमेंट और उस डेवलपमेंट से इंपैक्ट कैसे भारत की ग्लोबल पोजीशनिंग को मजबूत करता है, यह साफ तौर पर नजर आता है. कुल मिलाकर अगर कहा जाए तो बदलते वर्ल्ड ऑर्डर के बीच में भारत की यह एक पॉलिटिकल प्रैक्टिकल प्रेजेंटेशन के तौर पर देखने को मिलता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन तीनों देशों की यात्राओं को करेंगे डिकोड द जेसी शो में पहले सवाल के साथ करती हूं शुरुआत.

    सवालः आज हमने जेसी शो की हेडलाइन रखी है नमो कूटनीति का स्वर्ण युग आखिर इसके मायने क्या है सचमुच भारत का जो नरेंद्र मोदी युग है देश की कूटनीति का स्वर्णिम काल गोल्डन पीरियड है? 

    जवाबः नरेंद्र मोदी रिडफाइंड इंडियन फॉरेन पॉलिसी अकॉर्डिंग टू द रिक्वायरमेंट्स ऑफ द कंट्री. सबसे बड़ी बात यह है कि उनकी विदेश नीति में इस स्वर्णिम काल में भारत प्रथम राष्ट्र हित सर्वप्रथम इंडिया फर्स्ट यह बेसिक एक तरह से जो गाइडिंग फैक्टर्स हैं इस समय वो रहे हैं. दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि नरेंद्र मोदी की विदेश नीति में प्रेशर या दबाव का कोई स्थान नहीं है. ट्रंप का केस आपके सामने है. आप देखते हैं फाइनली क्या

    हुआ. भारत किसी के सामने झुकेगा नहीं. किसी के आगे रुकेगा नहीं और भारत जो है अपने कन्विक्शन, अपने कॉन्फिडेंस और अपनी जो स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी है उसके साथ फैसले करेगा. दूसरे देशों के हितों को ध्यान में रख के कम और अपने देश के हित को ध्यान में रख के ज्यादा फैसले जो है वो भारत करेगा. इसके साथ ही आज नरेंद्र मोदी एक ग्लोबल लीडर बन चुके हैं. डिप्लोमेसी का हिस्सा. आप देखिए 29 राष्ट्र जो है उनका सम्मान कर रहे हैं. सारे संसार में नरेंद्र मोदी की धूम क्रेज है उनसे मिलने का लोगों में इससे अच्छा स्वर्णिम काल और क्या हो सकता है? तो एट द एंड ऑफ द डे वी कैन कंक्लूड 10 11 साल का यह जो एरा है नरेंद्र मोदी का यह डिप्लोमेसी के दिशा में डिप्लोमेसी के क्षेत्र में भारत का अब तक का स्वर्णिम काल कहा जा सकता है. 

    सवालः जो अभी हाल ही में प्रधानमंत्री ने तीन देशों की यात्रा की है जिसमें इथोपिया ओमान है जॉर्डन है. इसका बेसिक एजेंडा क्या रहा है इस यात्रा का?

    जवाबः  बेसिक एजेंडा है ट्रेड इन्वेस्टमेंट जिसे कहना चाहिए और बेसिकली अदरवाइज इसको देखें तो इनफैक्ट इट्स नरेंद्र मोदी आउट रीच टू द कंट्रीज इन वेस्ट एशिया एंड अफ्रीका और दूसरी जो सबसे बड़ी बात है ग्लोबल फुटप्रिंट भारत का जो है इन क्षेत्रों में जाना इसका दूसरा एजेंडा था. इसके साथ ही ऑल दी कंट्रीज आर मेंबर्स एंड क्रिटिकल पार्ट ऑफ ग्लोबल साउथ और नरेंद्र मोदी की जो लीडरशिप है ग्लोबल साउथ में इनसे मिलने से लीडरशिप मजबूत होती है. इसके साथ-साथ नरेंद्र मोदी का जो ग्लोबल आज जो उनका व्यक्तित्व जो पर्सनालिटी है एज अ ग्लोबल लीडर उसको और स्ट्रेंथन करना है. इंडिया की ब्रांडिंग को और मजबूत करना है. यह सब कारण और बेसिकली गाइडिंग फैक्टर हैं इस सारी यात्रा के. यह बेसिक एजेंडा थे जिनमें यह यात्रा पूरे तौर पर सफल सिद्ध हुई है. 

    सवालः प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरानमें भारत और जॉर्डन के बीच में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के अलावा और कौन-कौन से समझौते हुए? 
    जवाबः सबसे बड़ा समझौता ये है कि दोनों देशों के बीच जो बटरल ट्रेड है वो 5 वर्ष में दुगना हो जाएगा. डबल हो जाएगा. सबसे इंपॉर्टेंट बात यह है कुल मिलाके जो है बहुत अच्छी यात्रा यह रही है और यह देखा जाए तो वह जो स्टेटस है आज जॉर्डन की यहां की थर्ड लार्जेस्ट बिजनेस पार्टनर है इंडिया का वो स्टेटस आगे चलके और मजबूत होगी इस यात्रा के बाद ऐसा विश्वास किया जाता है. 

    सवालः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जॉर्डन की जो कंपनीज़ हैं उनको भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया है. इस मूव को आप कैसे देखते हैं? 

    जवाबः मूव बहुत अच्छा है. ब्रिलियंट मूव है. देखिए एनकरेजिंग मूव है. और नरेंद्र मोदी शायद देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो विदेश जाते हैं तो इतना फ्रीक्वेंटली और कंपलसरीली कहना चाहिए कि बिजनेस लीडर्स हैं वहां के जो बिजनेस कंपनीज़ हैं उनसे मिलते हैं. कंबाइंड मीटिंग करते हैं. भारत के उद्योगपति, भारत के बिजनेस के लोग, वहां के बिजनेस के लोग, वहां के उद्योगपति, वहां की सरकार, यहां के कॉमर्स मिनिस्टर, विदेश मंत्री. तो एक कॉम्पैक्ट इंपैक्ट जो है वहां जाता है और वहां के बिजनेसमैन कोभरोसा होता है कि भारत की पूरी सरकार यहां मौजूद है एंड वी हैव ए डिसाइसिव प्राइम मिनिस्टर जिसके फैसले ऑन द स्पॉट ऑन द टेबल होते हैं. तो निवेशक को क्या चाहिए? निवेशक को चाहिए पॉलिटिकल स्टेबिलिटी और नरेंद्र मोदी ने दी है भारत को. निवेशक को चाहिए ऑन द स्पॉट डिलीवरी सिंगल विंडो वो नरेंद्र मोदी के यहां है. निवेशक को चाहिए कंपेरेटिवली लेस करप्शन. तो नरेंद्र मोदी का जीरो टॉलरेंस है करप्शन पे. तो कुल मिला के है कि विदेशी निवेशक को आकर्षित करने के सारे पैरामीटर भारत में आज मौजूद हैं. नरेंद्र मोदी ने मौजूद कर रखे हैं. जिनसे विदेशी निवेशक आकर्षित होता है और इसीलिए आप देखते हैं हर रोज कोई ना कोई इंटरनेशनल डील इंटरनेशनल कंपनी इंटरनेशनल क्लाइंट जो है भारत में अपना उद्योग चालू करने की घोषणा करता है. 


    सवालः क्या यह सच है कि जॉर्डन मिडिल ईस्ट का इकलौता ऐसा देश है जहां पर तेल नहीं है? 

    जवाबः हां यह तो नहीं कह सकते बिल्कुल नहीं है. 1% है आप यू कहिए और तेल नहीं होने का एक बड़ा कारण वहां पर है कि तेल निकालना महंगा बहुत पड़ता है. टेक्निकल प्रॉब्लम्स है. इसलिए सरकार ज्यादा साहस नहीं करती और फिर वास्तव में तेल ज्यादा इसलिए नहीं है कि करोड़ों साल पहले जो है यह दूसरे जो तेल वाले राष्ट्र हैं इराक है कुवैत है इनमें तो वहां जो तेल निकलता था सऊदी है तो करोड़ों साल पहले जो है जमीन के नीचे जो समुद्र था समुद्र में पक्षी और इस तरह के जानवर मछली वछली यह सब मर जाते थे तो मिट्टी रेत उनके वहां जो बन गए हैं धरातल सा बन गया है वह पेट्रोल में कन्वर्ट हो और इस देश में और बहरीन हुआ आपका लीबिया हुआ इनमें जो है वह स्थिति नहीं है. इनमें ज्यादातर क्या रेगिस्तान है चट्टानी पहाड़ है वहां तेल के आसार नहीं है. लेकिन फिर भी जो मुख्य बात यह है कि वहां पे इस देश में तेल निकालना अपेक्षाकृत काफी कॉस्टली है. इसलिए सरकार भी प्रयास नहीं करती है और टूरिज्म और दूसरी इंडस्ट्रीज से जो फर्टिलाइज़र्स है इनसे अपना काम चलाती है. 

    सवालः  आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह जॉर्डन का कनेक्ट क्या है? 

    जवाबः जॉर्डन का कनेक्ट उनका बहुत पुराना है. अभी तो 7 साल बाद वह गए हैं वहां पे. वैसे 2018 में भी गए थे. ट्रांजिट था 3 4 घंटे का तो यात्रा उस तरह से नहीं माना जा सकता. और फुल फ्लैजिड जो पायटल विजिट है वो पहली बार हुई है 37 साल में. आप यह कहिए और 75 इयर्स पूरे हो गए हैं दोनों देशों के इस संबंध को इनकी आप परस्पर मान्यता को जो रिलेशनशिप को तो ऐसी आशा की जानी चाहिए कि इस यात्रा के बाद ये जो संबंध है जॉर्डन के साथ जो पब्लिक कनेक्ट है जो पर्सनल कनेक्ट है मैन टू मैन कनेक्ट है लीडर टू लीडर कनेक्ट है गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट कनेक्ट है मोदी और इस राष्ट्र के बीच में वो आने वाले समय में और आगे बढ़ेगा. एंड QUESTION व्हाट इज द ट्रेडिंग स्टेटस बिटवीन इंडिया एंड जॉर्डन इंडिया और जॉर्डन में देखो जॉर्डन भी क्या है कि इट इज द थर्ड लार्जेस्ट ट्रेडिंग पार्टनर. दूसरा क्या है कि जो एरियाज हैं जिनसे आप डेवलप करना चाहते हैं बिजनेस जो है तो सारे जो इकॉनमी के प्रमुख एरियाज

    हैं वो सारे के सारे वहां पे आपको दिखाई देते हैं. तो कुल मिला के स्टेटस अच्छा है एनकरेजिंग है और जो इसका ट्रेड सरप्लस है भारत का इसमें ट्रेड डेफिसिट नहीं है. तो अब जो एग्रीमेंट हुए हैं नए उससे ऐसी आशा की जानी चाहिए कि व्यापार जो है जो ट्रेडिंग स्टेटस है जॉर्डन के साथ जो है यह और आगे बढ़ेगा ऐसा माना जाना चाहिए और सबसे इंपॉर्टेंट बात इसमें जो है वो यह है कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि 5 साल में दुगना व्यापार करना है वहां पे. तो इससे नई एक रूपरेखा वहां बनेगी और आज जो ट्रेडिंग स्टेटस है वो एकदम से उसमें टर्निंग पॉइंट आएगा इस अगले 5 साल में. ऐसा मैं मानता हूं. 


    सवालः सुना है कि आतंकवाद को लेकर जॉर्डन और भारत के बीच इस बार एक ठोस सहमति बनी है. आप कुछ कहना चाहेंगे इस बारे में? 

    जवाबः निश्चित तौर पे दे हैव शेयर द कॉमन कंसर्न दे हैव शेयर द कॉमन आईडिया कॉमन व्यू ऑन एंटी टेररिज्म. टेरिज्म को खत्म करना है. और नरेंद्र मोदी ने खुद भी कहा है कि वी आर नेचुरल पार्टनर्स विद जॉर्डन इन रीजनल सेफ्टी, सिक्योरिटी, पीस एंड ऑल दिस जो है और जॉर्डन ने सहमति व्यक्त की इस बात के लिए कि जो भारत का वॉर है अगेंस्ट टेररिज्म जो है इसको हमारा समर्थन है. नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि मिडिल ईस्ट में हम शांति के लिए प्रयास जो चल रहे हैं उसमें हम उनके भागीदार हैं. तो दोनों ही राष्ट्र जो है आतंकवाद के खिलाफ कारवाई करने के लिए एकजुट हैं. पाकिस्तान के दबाव के बावजूद आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पे इस यात्रा में जॉर्डन नरेंद्र मोदी अर्थात भारत के साथ खड़ा हुआ दिखाई देता है. 

    सवालः क्या यह सच है कि जॉर्डन के प्रिंस ने खुद फाइटर जेट उड़ाकर सीरिया में आईएसआईएस के ठिकानों पर हमला कर उनको नष्ट कर दिया था. 

    जवाबः हां ये एक लोकथा है. देश में चली थी और जॉर्डन में खासकर चली थी. और कथा कुछ इस तरह की है शायद फरवरी की बात कहते हैं कि आईएसआईएस जो खूंखार आतंकी संगठन है उसने इनके पायलट को पकड़ लिया प्लेन गिर गया था और उससे पहले पूछताछ करी फिर उसको जिंदा जला दिया पिंजरे में डाल के उसका वीडियो जारी हुआ 27 मिनट का सारा राष्ट्र में विद्रोह की स्थिति बनी आग बबूला लोग लोगों ने कहा बदला लो बदला मांगता है देश तो जो राजा थे वो अमेरिका में में थे लौट के आए भाग के जो है आके उन्होंने कहा कि मैं ऐसी सजा दूंगा कि धरती पे लोग इसको याद रखेंगे इन वे जो है और फिर उन्होंने काउंटर हमला किया 56 57 आतंकी मारे गए वो हीरो बने उस

    समय जो है जॉर्डन के प्रिंस जो है मिलिट्री की वर्दी मिलिट्री ट्रेनिंग है उनकी मिलिट्री की एजुकेशन है पुरानी तो वर्दी लेके मैदान में आए तो लोगों को ऐसा लगा कि खुद ही जहाज लेके गए थे खुद ही शत्रु को मार के आए हैं जगह उनकी लीडरशिप थी एज ए लीडर जो है बाद में तो वास्तविक स्थिति यह है ये खुद प्लेन उड़ा के नहीं गए थे. लेकिन उस सारे मुंह का जो है उन्होंने सुपरवाइज किया था उस सारे मुंह को और सेनाओं का मनोबल बढ़ाया था और देश में संदेश दिया था कि शत्रु और हमला करेगा जो नरेंद्र मोदी कहते हैं कि गोली चलाएंगे तो हम गोला चलाएंगे. तो उस समय उनकी काफी छवि बनी इंटरनेशनल फ्रंट पे और अपने देश के अंदर. 

    सवालः  क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के बीच में फिलिस्तीन संकट को लेकर और गाजा पट्टी को लेकर भी कोई चर्चा हुई है? 

    जवाबः हां चर्चा भी मैंने सुना है. दोनों ने कंसर्न शो किया. का सबसे बड़ा कंसर्न तो यह है ह्यूमिटेरियन पार्ट जो है उसका वो बड़ा सीरियस है. सामग्री जाती है वहां पहुंचती नहीं टाइमली और सही स्थान पे नहीं पहुंचती है. तो इस चिंता व्यक्ति की गई कि जो टाइमली और जो सेफ डिलीवरी है एड मटेरियल की ये एनश्योर की जानी चाहिए. सबसे बड़ी चर्चा इसी बात को लेके भी और बाकी तो है कि जो शांति समझौता हुआ है जो फर्स्ट पार्ट है ट्रंप का उसका हम स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि वहां शांति रहेगी. दिस इज ऑल.

    सवालः इसी प्रकार भारत और इथियोपिया के बीच आपसी शांति और सुरक्षा को लेकर कुछ बड़े समझौते होने की चर्चा है. कुछ कहना चाहेंगे इस पर आप? 
    जवाबः इंडिया का सेकंड लार्जेस्ट बिजनेस पार्टनर है इथोपिया का सेकंड ट्रेडिंग पार्टनर है. लार्जेस्ट जो है समझौते काफी हुए हैं इस बार वहां पे. मैंने सुना आठ समझौते हुए हैं. तो बेसिकली तो ये हुआ है कि जो स्टेटस है बटरल रिलेशनशिप की इट हैज़ बीन एलिवेटेड रे टू ए स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप. सबसे बड़ा तो यह समझौता एक तरह से जो है गाइडिंग फैक्ट्री यह वहां पे बना. 

    दूसरा डिफेंस का हुआ समझौता कस्टम का हुआ. फिर जो है कस्टम डिफेंस के बाद में जो फाइनेंसियल जो लोंस है उनका रीस्ट्रक्चरिंग कैसे हो इस पे हुआ हेल्थ पे हुआ. यही राजस्थान का महात्मा गांधी हॉस्पिटल उसका भी वहां है कारोबार. तो उसका जो चाइल्ड और जो मदर यूनिट है उसको कैसे ठीक किया जाए इस पे चर्चा हुई. आईटी पे चर्चा हुई. टूरिज्म पे चर्चा हुई. तो आठ समझौते हुए और काफी अच्छी प्रोग्रेस वाली. 

    सवालः नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इथोपिया एक स्ट्रेटेजिक पार्टनर है. सामरिक साझेदारी वुड यू लाइक टू ऐड ऑन समथिंग टू दिस आइडियाज? 

    जवाबः अबब्सोलुटली करेक्ट है. उनका मनोबल बढ़ाने के लिए कहना होता है. और वैसे भी उनका कहना यह है कि भाई यह स्ट्रेटेजिक पार्टनर हैं. क्योंकि इनका जो लोकतंत्र के जो वैल्यू है, लोकतंत्र के मूल्य हैं और हमारा इतिहास है वो एक जैसे हैं. मेल खाते हैं, मैचिंग हैं. और फिर दूसरा उन्होंने कहा कि हमारी पार्टनरशिप जो है ना खरीदने और बेचने वाली पार्टनरशिप नहीं है. इट इज़ नॉट कनफाइन ओनली टू ट्रेडिंग पार्टनरशिप, बिज़नेस पार्टनरशिप. हमारी पार्टनरशिप जो है वो स्ट्रेटेजिक है और भाईचारे पर आधारित है. 

    अर्थात रक्षा के क्षेत्र में भी हम उनके एक दूसरे की मदद करेंगे और दूसरे जो स्ट्रेटेजिक हैं एरियाज जैसे कि पॉलिसी बनानी है आज ब्रिक्स पे क्या करना है दोनों देशों को ग्लोबल साउथ में क्या करना है दोनों देशों इस पे जो विचार करना है ये सारे मिलके आपस में जो है चर्चा करेंगे और इस तरह से उन्होंने कहा है कि यह जो हमारी पार्टनरशिप है यह नेचुरल है एंड लाइक टू वर्क एज नेचुरल एलआई वेलकम.


    सवालः इथियोपियन पार्लियामेंट में प्रधानमंत्री मोदी को जबरदस्त रिस्पांस मिला 8 मिनट तक लगातार तालियां ही बजती आप इस पूरे घटनाक्रम को कैसे देखते हैं? 

    जवाबः अद्भुत है. नरेंद्र मोदी को वरदान है सरस्वती का ईश्वर का. जहां जाते हैं दीवानगी होती है लोगों में दौड़ते हैं. पहले दीवानगी भारत में दिखाई देती थी. अब दीवानगी भारत की सीमाओं के बाहर दिखाई देती है. कहां इथोपिया देखिए 5 6000 किलोमीटर दूर. कहा नई दिल्ली नरेंद्र मोदी जाते हैं वहां. जॉइंट सेशन पार्लियामेंट को संबोधित करते हैं. तो 50 बार तालियां बजना 8 मिनट में. जी. आजकल सब काउंट होता है कंप्यूटर देखिए तो 8 मिनट में 50 बार तालियां बजना अद्भुत था वो बोल ही नहीं पाते बोलते उससे पहले ही तालियां बजना शुरू हो जाती थी कितना चार कितना क्रेज है लोगों में और फिर जिन लोगों ने देखा वो दृश्य टेलीविजन पे तो उनको ऐसा लगा कि ये दृश्य वैसा ही था जैसा 2014 में जब पार्लियामेंट चुनाव जीत के नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे 

    पहली बार संसद में आए थे जब नारा लगा था कि शेर आया ध्यान है आपको उसमें इतनी तालियां बजी थी तो कमाल है. देखिए भारत की तालियां उनकी तालियां एक जैसी हो रही है. वहां पे मतलब उत्साह है लोगों का जो है और फिर यह मैंने पढ़ा कहीं कि भाई ये 18वीं पार्लियामेंट थी जिसको नरेंद्र मोदी ने पिछले 11 साल में संबोधित किया. बहुत बड़ी बात है. द वेरी रेयर ऑनर जिसे कहते हैं. तो इट वाज़ अ सुपरहिट शो. 

    सवालः आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इथियोपिया को शेरों की धरती क्यों कहा? 

    जवाबः गुजरात में शेर होते हैं. तो इनका मन हुआ कि भाई गुजरात से लिंक भी रहा है व्यापार का पुराना हजारों साल पुराना जो है तो एक मन का भाव था और उनका मनोबल बनाने के लिए मैं गुजरात से आता हूं. गुजरात शेरों की धरती है. तो ये देश भी शेरों की धरती है. एक अच्छी बोनाफाइड इंटेंशन से और मनोबल बढ़ाने के लिए बात कही गई है. और शेर वहां तो है ही शेर वहां भी हैं. गुजरात में भी हैं. तो मतलब सिमिलरिटी है. तो इसकी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए. एक उत्साहवर्धन करने वाला एक अच्छा सा वाक्य कि आपका देश भी शेरों की धरती है. 

    सवालः  इथियोपिया में यह कॉफी मीट कल्चर क्या है एक्सजेक्टली कॉफी देखो उसका जन्म तो देखते उत्पत्ति अफ्रीका से हुई है? 

    जवाबः पिछले दिन सुना था ना आए दिन बताया था राहुल गांधी वहां चले गए हैं कॉफी के साउथ अफ्रीका में समझने के लिए कैसे बनती है कैसे उसको घोटते हैं कैसे क्या करते हैं शौक अपना-अपना जो है एनी हाउ तो उस देश में क्या है कॉफी किसी को ऑफर की जाती है तो ऐसे नहीं है कि लेट्स से कप ऑफ कॉफी वहां का बकायदा ट्रेडिशन है कॉफी उसी को ऑफर करती है सरकार जो मान सम्मान होता है उनकी स्टेटस होती है उनका इंटरेस्ट होता है विदेशी मेहमान होता है तो ये कॉफी जो एयरपोर्ट पे थे तो बकायदा ट्रेडिशनल कॉफी की सेरेमनी हुई ऐसे नहीं था कि वहां के प्राइम मिनिस्टर ने कहा चलो लेट्स से कॉफी नरेंद्र भाई ऐसा नहीं था वहां पहले से एक समारोह तय था एक सेरेमनी तय थी वहां दिया कॉफी उनको भेंट की गई है कॉफी पीने के लिए दी गई तो वो जो कॉफी है वहां वो ऐसा माना जाता है दोनों राष्ट्रों के बीच एक भाईचारा है बहुत आदर है सम्मान है एक दूसरे के प्रति जिसे कहते हैं तो ये उस तरह का भाव जो है ना ये वहां पे था तो कॉफी कल्चर है इस तरह से ट्रेडिशनल है और नरेंद्र मोदी गए तो बहुत अच्छे से उनके साथ जो है ये उन्होंने किया और आप इसको इसको यूं भी कह सकते हैं कि इट इज़ अ सिंबल ऑफ ए हिस्टोरिक फ्रेंडशिप एंड ए वार्म हॉस्पिटिटी बिटवीन द टू नेशंस. दिस कॉफी इज़ ए सिंबॉलिक जेस्चर. 

    सवालः साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि इंडिया इस नेक्स्ट ग्रोथ इंजन. इस पर आप कुछ ऐड ऑन करना चाहेंगे? 

    जवाबः यू आर एब्सोलुटली करेक्ट. आज इंडिया जो है, संसार की सबसे फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमी में से एक है. आप देख रहे हैं. पहले पता नहीं 10 नंबर पे थे. फिर पांच पे आए, फिर चार पे आए. अब तीन पे छलांग लगाने का नरेंद्र मोदी का टारगेट है. नरेंद्र मोदी का इरादा है. उनका जो रोड मैप है थर्ड इकॉनमी संसार की सबसे बड़ी तो है फास्टेस्ट इकॉनमी. फिर आप ग्रोथ रेट देखिए 8.2% हम सेकंड क्वार्टर की जो पहले छह क्वार्टर में कभी नहीं आई. और उस पर्टिकुलर डे पे मेरे ख्याल से वर्ल्ड की सबसे ज्यादा बड़ी ग्रोथ होगी. 8 2% है और फिर आप देखते हैं 140 करोड़ लोगों का देश है. पॉलिटिकल स्टेबिलिटी है. तो ग्रोथ बढ़ रही है और लोग हैरान है इतनी तेजी से भारत कैसे आगे बढ़ रहा है दैट वे कभी कोई सरकार खुद भी सोचती होगी कि 8.2 तो हमने नहीं सोचा था हमने 7 सोचा था पीयूष गोयल आल्सो मस्ट बी सरप्राइज्ड कि कैसे हुआ बट मस्ट हैव ए पेट फ्रॉम प्राइम मिनिस्टर फॉर दिस ग्रोथ अपार्ट फ्रॉम द फाइनेंस मिनिस्टर जो है तो अच्छा है गुड सो सिंस वी आर डिस्कसिंग इथोपिया एक बात ये कही जाती है कि जो दिल्ली दिल्ली में प्रदूषण इतना बढ़ रहा है. उसका एक कारण है इथोपिया में जो ज्वालामुखी विस्फोट हुआ उसको लेकर. तो सरकार इसका रोकथाम कैसे करेगी? ये दिल्ली में उम्मीद है इसको लेकर. इट्स एक्चुअली करेक्ट. मैंने पढ़ा कि 10,000 साल पुराना कोई ज्वालामुखी था फट गया. उसकी रेत, राख और धुआ जो है वो चलते-चलते भारत पे आ गया. जो है और प्रदूषण भारत में पहले से ज्यादा है. दिल्ली आ गया. सरकार चिंतित हुई तो सरकार और जो उपाय कर रही है. इसको भी ध्यान में रख रही है कि एडिशनल धुआ एडिशनल प्रदूषण जो है यह वहां से चल के भी यहां आ गया है दिल्ली में तो गवर्नमेंट इस टेकिंग ऑल केयर 

    सवालः मेरे दोस्तों का कहना है कि दिल्ली में भी एक मिनी उथियोपिया बन गया है. आपको मौका मिला वहां जाने का और क्या खास है वहां? 

    जवाबः मैंने पढ़ा है जाऊंगा एक दिन. हुमायूं सबदरगंज रोड के आसपास कहीं बताया है कि दिल्ली में वैसे क्या है छोटे-छोटे कैफे खुल गए हैं. जी तो यंग क्राउड जाता है वहां उनको बड़ा अच्छा लगता है. उनको फाइव स्टार अच्छा नहीं लगता. तो एक नई कल्चर है. तो उसी में एक नई कल्चर है कि ये खुल गया है वहां कॉफी शॉप इस तरह का है. तो वहां के जो डिशेस हैं उस देश की जो है वो बनती हैं. मैंने सुना कि डोसा की तरह की कोई खास डिश बनती है. अब जाएंगे देखेंगे कोई चिकन करी कहते हैं उसकी एक्सपर्टाइज है उस शॉप की. तो बड़ा क्राउड रहता है वहां. लोग जाते हैं. तो इज़ अ न्यू चार्मिंग डेस्टिनेशन व्हिच सिंबोलाइजेस द ग्रोइंग रिलेशनशिप एंड पॉपुलरिटी बिटवीन द पीपल ऑफ द टू नेशंस. 

    सवालः आखिर भारत और इथियोपिया संबंध में काली मिर्च तो सोना लोग का ये नारा क्या है? 

    जवाबः ये पुराना है नारा. उस पुराने जमाने के अंदर जो है तो इस देश में जो है सोना पैदा होता था जो है और काली मिर्च भारत में पैदा होती थी. काली मिर्च का बड़ा चाम था उस देश में. वहां के व्यापारी बकायदा समुद्री रास्ते से काली मिर्च खरीदने यहां पर आते थे. तो काली मिर्च क्या ब्लैक में बिकती थी? आप यू कहिए सोने की तरह बिकती थी. तो वहां सोना ज्यादा था उनके पास में. सोना मतलब बहुमूल्य चीजें सोना हीरा, जवाहरात कुछ भी जो है तो एक भाव है बात का कि काली मिर्च इतनी पॉपुलर थी कि वहां के लोग सोना देकर भी काली मिर्च लेके जाते थे. यह भारत के पुरानी संस्कृति का गौरव है. पुरानी जो ट्रेडिशंस है अपने बिजनेस की और जो व्यापार है दोनों देशों का 2000 साल पुराना उसके प्रतीक है. तो ये नारा और ये भाव वहीं से पैदा हुआ है. 

    सवालः ऐसा कहा जाता है कि हाथी दांत का जो व्यापार है उसने दोनों देशों के संबंधों की नींव रखी है. ये पूरा मामला क्या है? 

    जवाबः ये भी सेम वही है. अब हाथी दांत जो है ना उस कंट्री में हाथी दांत बहुत ही खूबसूरत और ऐसे माने जाते हैं कि बहुत ही बहुमूल्य थे. वैसे हाथी दांत कहते हैं संसार में कहीं थे नहीं. इंडिया में क्रेज था थोड़ा लोगों को रहता है हाथी दांत खरीदने का. तो वही मसाला और चाय और सोने वाली जो बात है तो हाथी दांत जो ये क्रेज था देखते हुए भारत सरकार ने देखा कि बहुत हाथी दांत का इंपोर्ट हो रहा है. तो उन्होंने 1986 में इसको टेंपरेरी क्लोज किया एक बार. फिर 1991 में फॉर्मली इसको इललीगल डिक्लेअर कर दिया कि वहां से नहीं आना. पर इनिशियली जो हजारों साल पहले जो रिश्ता चालू हुआ था हाथी दांत वहां से यहां लाते थे और यहां से फिर सामान जो है मसाले हैं और रेशम है और जो सामान जाता था यहां से वो जाता था. तो हाथी दांत इज़ सिंबॉलिक ऑफ द ट्रेडिशनल सेंचुरी ओल्ड बिजनेस पार्टनरशिप बिटवीन द टू कंट्रीज. 

    सवालः हर एक देश का अपना एक इतिहास होता है और इथियोपिया का इतिहास बड़ा दिलचस्प है. कहा जाता है कि यूरोप भी कभी इथियोपिया को अपना गुलाम नहीं बना पाया. इथियोपिया के पास आखिर ऐसी क्या ताकत रही? 

    जवाबः एक तो मनोबल, एक भाग्य, एक मैन पावर, मैन पावर इसलिए कि 13 करोड़ की आबादी है इथियोपिया की. तो 1930 में जो है कुछ समय के लिए इटली वालों ने कब्जा किया था वहां आकर के मुसोलनी वहां पे जो है और कुछ समय बाद जब सेकंड वर्ल्ड वॉर हुआ तो उसके बाद में फिर वो कब्जा हट गया. जो कब्जा करने वाले थे उनको उन्होंने भगा दिया वापस देश में आ गए तो एक परंपरा तो तब से चली आ रही है चांस ऐसा हुआ है कि वर्ल्ड वार हुए कई किस्से कहानियां हुए संसार के इतिहास में लेकिन इस पे कोई दूसरा देश कब्जा नहीं कर पाया गॉड गिफ्ट डेस्टिनी 

    सवालः नरेंद्र मोदी ने इथोपिया में एक पूरा दिन बिताया जहां पर खूंखार कबीलों के बीच में कहते हैं कि 60 शैतान पहरा देते हैं. ऐसा नहीं है कि थोड़ा अक्वर्ड लगे डर लगता हो प्रधानमंत्री जी को 

    जवाबः वो तो प्रॉब्लम प्रधानमंत्री को मालूम पड़ेगा ऐसा तो और ज्यादा करने जाएंगे उस चैलेंज को स्वीकार करने जाएंगे वो तो कहते हैं चुनौतियों में चुनौती देना मेरी चुनौती है मेरा काम है जो है अद्भुत उनका नैतिक साहस कन्विक्शन जो है वो एक कहावत है उस समय की लेकिन उसके अंश और क्या कहना चाहिए विरासत तो वहां है ना एक एक जैसे कंट्री लीगसी उन आत्माओं की वहां पे ऐसा कहते हैं जो है अब वो क्या है कि अलग-अलग तरह की जातियां अलग-अलग तरह की प्रजातियां हैं आपने देखा नहीं भील और अलग-अलग

    आदिवासी कबीले इस तरह कबीले हैं उनकी बड़ी डरावनी कहानियां वहां की जो है तो यह बात सही है लेकिन नरेंद्र मोदी को इससे कोई वो नहीं प्राइम मिनिस्टर हैं पूरी सिक्योरिटी सबके साथ गए थे लेकिन फिर भी एक प्रोग्राम बनता है ना अपना अफसर प्रोग्राम बनाते हैं कि साहब यहां जाना है वहां नहीं जाना तो अफसर यही कहते हैं साहब आवाम मत जाइए उसकी ये कहावत है तो नरेंद्र मोदी देखते होंगे उसकी तरफ एक पल के लिए फिर कहते होंगे बनाओ चैलेंज को स्वीकार करने की मनोवृति है ना उनकी जो है तो चले गए वो कोई डर नहीं है उनको संसार में कहीं भी जाने आने का. 

    सवालः इथियोपिया में प्रधानमंत्री मोदी और इथियोपिया के पीएम दोनों ही Tata मोटर्स की रेंज रोवर में बैठकर जाते हैं. एक भारतीय कार में बैठकर पीएम मोदी को कैसी अनुभूति हुई होगी? 

    जवाबः निश्चित तौर पे ही इज़ अ प्राउड इंडियन ही इज़ अ फर्स्ट प्राउड इंडियन. आप एक ऐसे कहते हैं राष्ट्रपति प्रथम नागरिक होता है. लेकिन जो भारतीयता का झंडा लेके नरेंद्र मोदी चलते हैं. तो उसमें उनके लिए एक अद्भुत क्षण होगा. और सबसे बड़ी बात है कि दृश्य को देखने वाला जो व्यक्ति है वो दुनिया में नहीं रहा. रतन टाटा अगर आज होते तो उनको और अच्छा लगता जो है तो गुड मोमेंट फॉर नरेंद्र मोदी ए मोमेंट ऑफ़ प्राउड फॉर द कंट्री. 

    सवालः  भारत और इथियोपिया के बीच इंपोर्ट एक्सपोर्ट का आखिर सिनेरियो क्या है एक्सक्टली? 

    जवाबः भारत इथोपिया का सिनेरियो इस तरह का है कि इथोपिया को हम निर्यात करते हैं लोहा स्टील मेडिसिन और हम उनसे जो है इंपोर्ट जो करते हैं वो दालें कीमती पत्थर सब्जियां बीज चमड़ा एंड ऑल दिस जो है जो ट्रेडिशनली चला आ रहा है ये तो अच्छा बिज़नेस है अच्छा व्यापार है और अगर आप इन टर्म्स ऑफ़ मनी देखेंगे तो ट्रेड QUESTIONSप्लस है भारत के पक्ष में है और ट्रेड डेफिसिट नहीं है यहां पे जो है अच्छा बिज़नेस है ग्रो कर रहा है बिज़नेस यात्रा हैज़ बीन मोर ऑल बूस्ट फॉर द बिनेसमैन आल्सो तो ये व्यापार आज जो है ये और बढ़ेगा लेकिन पीसफुल है बटरल रिलेशनशिप ग्रोइंग है एनकरेजिंग है.

     सवालः इथियोपिया में मोदी के सम्मान में गूंजा वंदे मातरम कितना भावनात्मक क्षण रहा होगा? 

    जवाबः वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हां केवल हम अनुमान ही लगा सकते हैं हाउ मच इमोशनल एंड थ्रिल्ड ही मस्ट हैव बीन आप सोचिए कि एक तो वहां तिरंगा लहरा रहा था मैंने देखा टीवी पे भारत माता की जय का नारा लग रहा है मोदी मोदी मोदी के नारे लग रहे हैं. मिनी इंडिया का दृश्य हो रहा है वहां पेऔर वहां वो वंदे मातरम घूम रहा है जिसको बुलाने में चलाने में लोगों को भारत में आपत्ति है कुछ लोगों को. हम आप देखिए ट्रेजडी हैं. तो जो नैरेटिव है वंदे मातरम का उसको ग्लोबल रिकॉग्निशन नरेंद्र मोदी ने दिलवाया इस बार. इसमें जो है तो वेरी इमोशनल मोमेंट एंड वेरी मोमेंट ऑफ़ प्राउड फॉर हिम फॉर एव्री इंडियन टू दैट एक्सेंट. 

    सवालः  जो नरेंद्र मोदी और ओमान के सुल्तान के बीच में जो हिस्टोरिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है, फ्री ट्रेड डील हुई है, उसको आप कैसे देखते हैं? 

    जवाबः इट्स अ मिरेकल बाय नरेंद्र मोदी. आप देखिए मोर देन 99% इंडियन एक्सपोर्ट ड्यूटी फ्री. कभी सुना संसार में ऐसा? कर दिया नरेंद्र मोदी ने. उन्होंने खुद ने कहा कि आज मैंने जिस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं वह ऐतिहासिक है और सदियों तक दोनों देशों के लोग इसे याद रखेंगे इसे भूलेंगे नहीं और उन्होंने कहा कि मेरी ये सिल्वर लाइन है जिसे कहते हैं इस समझौते की जिसका अल्टीमेट जो पर्पस है दोनों देशों के लोगों को जोड़ना और दोनों देशों के व्यापार जो है उसको और बढ़ाना और इसमें एक बात और है इट विल आल्सो इंप्रूव द कंपिटिटिवनेस फॉर इंडियन इंडस्ट्रियल एक्सपोर्ट्स बिटवीन द टू नेशंस. तो एक बहुत अच्छा है.यह दूसरे खाड़ी देश के साथ यह समझौता हुआ है. पहला यूएई के साथ हुआ था 2022 में और अब इसके साथ हुआ है. एक मोटे अनुमान के अनुसार 27,000 करोड़ का बेनिफिट जो है इंडियन एक्सपोर्टर्स को इससे हुआ है. तो मील का पत्थर है समझौता इसे कहना चाहिए. एक्सीलेंट. 

    सवालः इस फ्री ट्रेड ड्रिल के अलावा ओमान के साथ में और क्या-क्या समझौते हुए भारत के? 

    जवाबः बाकी समझौते भारतमान के बीच में जो हुए हैं हेल्थ को लेके हुआ है, एग्रीकल्चर को लेके हुआ है, आई को लेके हुआ है, इरीगेशन जो है वाटर रिसोर्सेज इसको लेके हुआ है. तो इस तरह के वैरायटी ऑफ़ एग्रीमेंट्स जो है नाउ हैव बीन डन. 


    सवालः क्या आप कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट यात्रा तेल व्यापार से आगे बढ़कर कुछ और थी. 

    जवाबः ऑफकोर्स व्यापार तो वहीं खत्म हो गया. तेल की बात वहीं खत्म हो गई. आपस में लेते रहेंगे, करते रहेंगे. इसका लार्जर पर्सपेक्टिव है जो मैंने आपसे कहा. लार्जेस्ट पर्सेस्पेक्टिव सबसे बड़ा इसका यह है कि हम अफ्रीका और वेस्ट एशिया के अंदर अपनी आउटरीच को बढ़ाएं. अपनी एक्सेस को बढ़ाएं. अपने मोरल इन्फ्लुएंस को बढ़ाएं. अपने जो इकोनमिक और बिजनेस अपॉर्चुनिटीज हैं उनको बढ़ाएं. हमारे जो ग्लोबल लीडरशिप है उसको मजबूत करें. एंड ऑल दीज़ पैराटर्स द विजिट हैज़ बीन सक्सेसफुल. तो इसको इसलिए कहा जाता है कि मस्कट की यात्रा है ना इट इज़ बिय्ड द परचेस एंड सेल ऑफ़ ऑयल. 

    जहां तक व्यापारिक रिश्तों का प्रश्न है तो रिश्ते हजारों साल पुराने हैं ओमान और भारत के बीच के और वस्तुतः देखा जाए तो ओमान को जो है खाड़ी का प्रवेश द्वार कहा जाता है एंट्री पॉइंट टू गल्फ कंट्रीज जो है उस समय से तो तब से क्या है कि एक स्ट्रेटेजिक लोकेशन है ओमान की और ये क्या है कि जो की रूट्स हैं वर्ल्ड के ट्रांसपोर्टेशन के उसमें इंडिया  को सहायता देता है इंडिया के इंडिया के बहुत काम आता है जिसे कहना चाहिए तो इनके रिश्ते हजारों साल बहुत पुराने हैं और सिंधु घाटी सभ्यता के समय से भारत और ओमान के रिश्ते वो चले आ रहे हैं. ये प्रवेश द्वार का काम करता था और समय के साथ-साथ ये रिश्ते जो है और मजबूत होते जा रहे हैं. 

    सवालः  ओमान के सुल्तान की जो लाइफस्टाइल है, उनके जो शाही अंदाज की रोचक कथाएं सुनने को मिलती है उसके बारे में कुछ कहना चाहेंगे? 

    जवाबः वो तो देखो हर राजा के साथ है. हर राजा के 10 20 महल होंगे. 10 20 रानियां होंगी. 100 50 गाड़ियां होंगी. 1000 2000 घोड़े होंगे. विदेशों में संपत्तियां होंगी, घर परिवार के लोग जाएंगे, आएंगे. तो अब इस राजा के बारे में यह है कि इसकी एक अरब डॉलर की हैसियत प्रॉपर्टी संपत्ति जिसको कहते हैं और 12 बड़े शाही महल है अपार्ट फ्रॉम अदर ऑल जो अपन गिनते हैं दैट वे और बहुत ही अद्भुत है सारा उसका दृश्य जो है विश्व की सेकंड सबसे बड़ी फेरी टाइप होता है उसमें जो है तो वो सबसे 58 फीट लंबी है और कुछ इस तरह का है जो तो वो सारा जो है वो बड़ा एक चर्चा का केंद्र है मैंने घोड़ों का आपसे कहा और फिर इनकी पर्सनालिटी एक मध्यस्थ की मानी जाती आती है.

    यह क्या खुद तठस्थ राष्ट्र है अमोंग द गल्फ कंट्रीज जो है तो झगड़ा हो ईरान अमेरिका का तो इनकी मध्यस्था है. उधर इजराइल हमास का झगड़ा हो तो इनकी मध्यस्था है. तो पॉपुलर पर्सन लॉट ऑफ़ मनी लाइक एनी अदर एपरर और शादीवादी का तो पढ़ा ही था मैंने कि वो रोमांटिक अंदाज में शादी हुई. वो लड़की थी पसंद आ गई किसी महफिल में. उसके साथ शादी हो गई उसकी. और कहते हैं संसार की सबसे सुंदर महिला है. बच्चे हो गए. परिवार सेटल हो गया. बच्चे इंग्लैंड में पढ़ते हैं, कुछ वहां पढ़ते हैं. तो ऑल वेल तो हर राजा की जो जो हैं लीगसी स्टोरीज जो हैं इस राजा के बारे में भी हैं. बट ओवरऑल नॉन कंट्रोवर्शियल ए गुड पर्सन नॉन कंट्रोवर्शियल.

    सवालः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बात और कही कि ओमान चौथे नंबर पर है पर मैं ताली नहीं बजाऊंगा. प्रधानमंत्री कहना क्या चाहते थे ये कहकर? 

    जवाबः प्रधानमंत्री मन की थोड़ी सी निराशा को उन्होंने व्यक्त किया. नॉट विद रेफरेंस टू ओमान गवर्नमेंट. वो क्या है कि आजकल एक चालू किया है क्विज प्रधानमंत्री ने विदेशों में भारत के बारे में जानने के लिए कि नो इंडिया भारत को जानिए. तो उन्होंने पूछा भ हां कितने लोग इसमें जुड़े हैं इस कैंपेन से जो है कितने ने पार्टिसिपेट किया है तो आयोजक ने कहा सब 10,000 लोगों ने किया है. तो उन्होंने कहा नहीं मैं इस पर ताली नहीं बजाऊंगा. आपको एक नंबर पे आओगे उस दिन ताली बजाऊंगा. उस दिन आपको शाबाशी दूंगा. नॉट नाउ. और फिर उन्होंने कहा भाई अपना पार्टिसिपेशन जो है ना ओमान से क्विज के अंदर इस ऐप के अंदर जो है ना बढ़ना चाहिए. सो दिस वास विद रेफरेंस टू दैट नॉट विद एनी गवर्नमेंट और एनी रॉयल फैमिली ऑफ ओमान. 

    सवालः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब ओमान में थे तो उनके कान में कुछ लगा हुआ था तो बड़ी उत्सुकता हुई कौतहल कि यह क्या था? 

    जवाबः आखिर वास्तव में वेरी शार्प नोटिस जो आपने लिया इस बात का जो वाकई मुझे दो चार लोगों ने कहा क्या है मैंने कहा देखते हैं जो है ये तब मैंने देखा उसको तो ये क्या है कि रियल टाइम ट्रांसलेशन डिवाइस थी जो कान में लगाई है उन्होंने विदेशी भाषा में क्या है कि लोग साथ बैठते हैं ट्रांसलेटर आप बोलते हैं फिर वो जवाब देता है फिर वो आप बोल बोलते हैं. फिर सामने वाला जवाब देता है. तो उन्होंने शॉर्टकट किया इसको. 21वीं सदी का एक्सपेरिमेंट है ये कि जो रियल टाइम ट्रांसलेशन डिवाइस है उसको अपने कान में ही लगा लो ना. सब वहीं से हो जाएगा. दैट वे जो है तो ये पता लगता है नरेंद्र मोदी कितने टेक्नो सेम है. इसीलिए मैं कहता हूं शायद चीफ मिनिस्टर से तब भी और आज भी वो वर्ल्ड के उन गिने-चुने प्रधानंत्रियों में जिनका टेक्नोलॉजी में विश्वास है. 

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहते हैं. जो जितने आजकल जितने इंप्रूवमेंट हो रहे हैं, जितने आविष्कार हो रहे हैं टेक्निकल उसके अंदर. नरेंद्र मोदी वांट्स टू ऑलवेज कीप हिमसेल्फ अपडेटेड ऑन ऑल दोज़ डेवलपमेंट जो है तो उनके मन में वरना क्या है इंडियन पॉलिटिशियन टेक्नोलॉजी से इससे थोड़ा सा कतराता है कि ठीक है भाई काम करो लेकिन ये मैंने देखा इस तरह से रवि पार्टी में भी यही कहते हैं कि सोशल मीडिया पे जाऊंगा मैं रीच देखूंगा आप ये सारा जो है ये तो क्या 21वीं सदी के प्राइम मिनिस्टर हैं दैट वे जो है तो ये इन्होंने बड़ा अच्छा किया है हमेशा का सशन कर दिया है नाउ ही इज़ इंडिपेंडेंट ही विल नॉट डिपेंड ऑन ट्रांसलेटर्स एट ऑल इन सच इंटरनेशनल एंगेजमेंट्स जो कुछ बोलेंगे वो रियल टाइम ट्रांसलेट सुनेगा उसी हिसाब से सोचेंगे और जवाब देंगे. गुड इनोवेशन कहो या गुड प्रैक्टिस ऑन द पार्ट ऑफ़ द प्राइम मिनिस्टर. 

    सवालः जॉर्डन और उथोपिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो एक कार डिप्लोमेसी देखने को मिली. इसके इस इस कार डिप्लोमेसी के नए संस्करण को आप कैसे देखते हैं? 

    जवाबः मैंने पहले भी कहा था आपसे नरेंद्र मोदी नया नारा लगाते हैं सुपरहिट हो जाता है. नरेंद्र मोदी नया काम करते हैं सुपरहिट हो जाता है. अब बताइए कार में बैठ गए. यही सुपरहिट हो गया. यही नई डिप्लोमेसी हो गई. यही चर्चा हो गई संसार में. Twitter पे जो क्या कहते हैं उसको ट्रेंड करने लग गया संसार में सबसे ज्यादा तो गॉड गिफ्ट है पहले पुतिन के साथ हुआ आप देखिए और फिर उसके बाद अच्छा दुनिया के लोग कार में बैठते हैं कोई ध्यान नहीं देता क्योंकि नरेंद्र मोदी बैठ गए राजा के कार में राजा के कार में उन्होंने बैठा लिया किसी दूसरे राजा को तो कहानी है स्टोरी बनती है उससे जो है तो आप देखिए जॉर्डन वाले थे प्रिंस तो वो उनको म्यूजियम में ले गए वहां म्यूजियम से एयरपोर्ट छोड़ने चले गए दूसरे थे वहां के प्रधानमंत्री जो हैं तो वह उनको एयरपोर्ट से लेकर होटल तक छोड़ दिया उन्होंने. तो स्टोरी चल गई पूरी. तो कार डिप्लोमेसी है और कार डिप्लोमेसी का बेसिक मतलब यह है कि वी आर फ्रेंड्स. हमको भरोसा है एक दूसरे पे. मेरी कार में आप तो ऐसे थोड़ी बैठ जाओगे. अगर आपको मेरे पे भरोसा

    नहीं होगा उस तरह से. अगर केवल फॉर्मल रिलेशन होंगे हमारे. तो कार में कौन कहता है कि मेरी कार में चलो जो है लेकिन वो तो रिलेशनशिप है ना नरेंद्र मोदी का. इस तरह का भरोसा है लोगों में विश्वास है और एक जेस्चर है उनके प्रति कि ठीक है बैठो. तो लोग खुद ही आजकल ड्राइवर बनना पसंद करते हैं. मतलब चलाना पसंद करते हैं उसको. आप देखिए जो इथोपिया का ये जो प्रधानमंत्री चला रहा था ये नोबेल पुरस्कार विनर है. और नोबेल पुरस्कार के लिए ट्रंप कितना रोते धोते रहते हैं आप देखिए. और वो आदमी नोबेल पुरस्कार जो है वो नरेंद्र मोदी की गाड़ी चला रहा है. कुदरत का खेल देखिए आप यहां तो नरेंद्र मोदी के साथ है. वो जो भी कुछ करेंगे उसमें कुछ ना कुछ अद्भुत होगा, नया होगा, चमत्कारी होगा और बहुत ज्यादा चर्चा उसकी सारे संसार में होगी. वो चाहे कुछ भी करें. अब लेट्स सी कि अगला वो क्या करते हैं ऐसा काम. 

    सवालः चर्चा उनके क्रेज की भी है. फिलहाल इथोपिया और ओमान भी पीछे नहीं हटा. उन्होंने भी नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है. तो विदेशों में ये नरेंद्र मोदी का क्रेज आखिर है क्या एग्जैक्टली? 

    जवाबः लास्ट टाइम मैंने कहा था कि विदेशों में नरेंद्र मोदी को सम्मानित करने की होड़ सी लगी हुई है. लोग इंतजार करते हैं नरेंद्र मोदी हमारे राष्ट्र में है. हमारे देश में हम उनको नागरिक सम्मान दें. आप देखिए 29 कंट्रीज 29 ओनर्स एंड वन पर्सन नरेंद्र मोदी इमेजिन आप देखिए और उसमें भी आश्चर्य की बात क्या है कि छह गल्फ नेशंस हैं उसमें से पांच गल्फ नेशंस ने नरेंद्र मोदी को जो है सर्वोच्च पुरस्कार दिया है. तो आप ये कह सकते हैं दैट वे जो है कि ही इज़ द ओनली लीडर इन द वर्ल्ड हु हैज़ बीन ऑनर्ड बाय फाइव नेशंस आउट ऑफ सिक्स गल्फ नेशंस. जो है कितनी बड़ी बात है. देयर इज़ अ मोमेंट ऑफ़ प्राइ फॉर द कंट्री. 

    सवालः मैंने यह भी सुना है कि बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2026 में प्रबुद्ध नागरिक सम्मान देने का फैसला किया है. आप इस डेवलपमेंट को कैसे देखते हैं? 

    जवाबः बहुत अच्छा डेवलपमेंट है. उन लोगों के मन की भावना है. किसी से प्रेरित नहीं है. कोई राजनीति नहीं है. उनका कहना है कि नरेंद्र मोदी का एज अ प्रधानमंत्री नैतिक समर्थन है हमारे मोमेंट को. और 2016 में जब लाल किले से भाषण दिया था तो उन्होंने बलूचिस्तान में जो है मानवीय अधिकारों का जो उल्लंघन हो रहा है पाकिस्तान आर्मी

    द्वारा उसके बारे में चिंता जताई थी तो दे फील इनडेबिटेड टू नरेंद्र मोदी और बलूचिस्तान के वैसे भारत से सदियों पुराने रिश्ते हैं एक पुराना प्यार है अब इसमें तो बलूचिस्तान क्राइसिस में पाकिस्तान आर्मी क्रश कर रही है उसको आप देख रहे हैं ये तो उनका ये स्वाभाविक है कि हम ये जो है बलूची दस्तार होती है एक एक सम्मान है उसका नाम है बलूची दस्तार वो 2026 में नरेंद्र मोदी को हम देंगे. गुड गुड डेवलपमेंट. 

    सवालः  अभी जब तीनों देशों की यात्रा पे गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो उनका जबरदस्त अद्भुत स्वागत हुआ. क्या नजारा आप देखते हैं ये? 

    जवाबः देखो स्वागत विदेशों ने तो किया ही. वहां के प्रधानमंत्री ने किया. कोई छोड़ने आ रहा है, लेने आ रहा है, कोई कार में जा रहा है, कोई कहीं कर रहा है, कोई कॉफी पिला रहा है. ये सब तो था ही. जी. सबसे ज्यादा अद्भुत काम हुआ. भारतीय जो वहां पे हैं उन्होंने कमाल किया. इस बार जो है आप देखिए ओमान का दृश्य देखिए आप टेलीविजन पर आप देखिए उसको जो है तो कम से कम मेरे ख्याल से उस होटल में दो 3000 लोग होंगे भारतीय जो इकट्ठे हुए थे विदेशों में जो प्रधानमंत्री जाता है या मुख्यमंत्री जाता है तो मुझे मालूम है कि

    उनसे मिलवाने के लिए लोग इकट्ठे करने पड़ते हैं मान लीजिए उड़ीसा का चीफ मिनिस्टर गया वहां पे तो ढूंढते हैं वहां के पहले चार दिन लोग जाके कौन-कौन लोग उड़ीसा के यहां पे हैं फिर 10 20 लोग मिलते हैं विदेशों में किसी की रुचि नहीं होती आने जाने के अंदर तो ऐसे फंक्शन फेल हो जाता है अब नरेंद्र मोदी का देखिए डिफरेंट है इशू बिल्कुल जो है वह जाते हैं एंबेसी को कुछ नहीं करना पड़ता एंबेसी को उल्टा कंट्रोल करना पड़ता है कि यार क्राउड ज्यादा आ गई इसको मैनेज कैसे करें वहां पे जो है तो आप दृश्य देखिए वहां पे दो 3000 लोग होटल में ऐसे खड़े हैं जैसे

    अहमदाबाद में खड़े हो जयपुर में खड़े हो या लखनऊ में खड़े हों और नरेंद्र मोदी उनको भाषण दे रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि नया मिनी इंडिया जो है इस देश के अंदर जो है मन में जो है चल रहा है वो बड़ा अद्भुत था दृश्य मैंने बहुत से दृश्य पिछली यात्राओं के नरेंद्र मोदी के देखे हैं भारतीय समुदाय के जिसे कहते हैं ऐसा तो पहले मैंने नहीं देखा इतना स्वागत इतना उत्साह इतनी उमंग जो है इसीलिए वो कहते हैं नरेंद्र मोदी इंडियन डिस्पोराइज एंड लिविंग एग्जांपल ऑफ को एकिस्टेंस एंड कोपरेशन जो है और इसीलिए वो कहते हैं कि मेरा हर दिन जो है नए कलर आते हैं. देयर आर ऑलवेज न्यू कलर्स एवरीडे एंड एव्री न्यू सीजन बिकम्स ए फेस्टिवल फॉर अस. इस तरह के उनके विचार हैं. लोग खुश होते हैं. देखते हैं वहां पे जाए. तो इस बार ओमान का जो इंडियन डिस्पोरा का जो शो था, उनका जो मोदी प्रति जो मान सम्मान था वो बहुत इंप्रेसिव था इस बार. 

    सवालः ओमान की 95% आबादी मुसलमानों की है और फिर भी मोदी जी इतने लोकप्रिय है. इस बारे में कुछ कहना चाहेंगे आप? 

    जवाबः मिरेकल है. मैंने पहले भी आपसे कहा आम धारणा यह रहती है कि भाई बीजेपी को मुसलमान कम पसंद करते हैं. लेकिन परिणाम आते हैं वो बिल्कुल विपरीत होते हैं उसके. अब आप देखिए उस देश  के अंदर 95% इस्लामिक जनता इस्लामिक लोग और नरेंद्र मोदी का कितना सम्मान और सर्वोच्च सम्मान भी उसके साथ में अन्य सम्मान के साथ-साथ जो है तो वाकई मिरेकल है ये और ये मिरेकल नरेंद्र मोदी करते हैं. उन्होंने इस नैरेटिव को बिल्कुल झुठला दिया है कि बीजेपी एंटी मुस्लिम है या बीजेपी को मुसलमान पसंद नहीं करते. नरेंद्र मोदी मुझे लगता है कि पार्टी की धारा से बहुत ऊपर उठ गए हैं और संसार ने इसको मान लिया है. ही इज़ नो बीजेपी, नो कांग्रेस, नो एसपी. ही इज़ नरेंद्र मोदी. सिंगल पर्सनालिटी जिसे कहना चाहिए. उनका डोमेन खुद का अपना है. और प्राइम मिनिस्टर को भी अलग कर दीजिए. उनके नाम से आप जो है तो ही इज़ नरेंद्र मोदी. तो नरेंद्र मोदी एक्सेप्टेबल टू ऑल इंक्लूडिंग ऑल मुस्लिम्स, इंक्लूडिंग 95% मुस्लिम्स ऑफ़ दैट कंट्री. यह आपने देखा है खुद? 


    सवालः इन तीन देशों की यात्राओं का पाकिस्तान को क्या संदेश है? 

    जवाबः वेरी पुअर वेरी डिसपॉइंटिंग जो है वेरी अलार्मिंग लेकिन अब मुनीर को फर्क नहीं पड़ता इससे ज्यादा इन बातों से अमेरिका ने उसे गोद में बैठा रखा है लेकिन एक पल के लिए तो जिसे कहते हैं ना आर्मी में शाम को मेस में जाते हैं जी तो एक ड्रिंक तो लगाई होगी इस निराशा के साथ खैर आज ये क्या हुआ बताओ वहां के जो सुल्तान और ये लोग हैं ये क्या रास्ता भटक गए हैं जिसे कहते हैं मानसिक संतुलन खो बैठे हैं ये नरेंद्र मोदी को हिंदू प्राइम मिनिस्टर इस तरह से स्वागत कर रहे हैं उसका तो मस्ट बी वैरी अपसेट बट नथिंग कैन बी डन.

    सवालः  खाड़ी देशों और पश्चिमी राष्ट्रों को मोदी जी की जो एक ही वक्त पर एक साथ साधने की जो ड्यूल डिप्लोमेसी है उसके बारे में आप क्या सोचते हैं? 

    जवाबः ब्रिलियंट इंटेलिजेंट इसे कहना चाहिए बैलेंसिंग एक्ट जो है टाइप और प्रोएक्टिव और स्ट्रेटजिक मूव आप देखिए एक तरफ तो वो गल्फ राष्ट्रों के साथ वार्ता कर रहे हैं सम्मानित हो रहे हैं डील साइन कर रहे हैं और बैलेंस करने के लिए जयशंकर जो विदेश मंत्री हैं वो इजराइल बैठे हुए हैं. आप देखिए तो बैलेंसिंग एक्ट है. 

    वह यह शो करना चाहते हैं कि एक राष्ट्र का दूसरे राष्ट्र के बारे में जो विचार है वह मेरी नीति को निर्धारित नहीं करेगा. मेरी नीति मेरे राष्ट्र हित से मेरे जजमेंट से प्रभावित होगी जो है वो उससे प्रभावित नहीं होगी. इसका मैसेज ये है तो अच्छा है. डिप्लोमेसी है और डिप्लोमेसी ऐलानिया कर रहे हैं. कोई चोरी छिपाने की कोई बात नहीं है. जयशंकर बैठे हैं कैमरा पे वहां पे इजराइल में. यहां कैमरा पे नरेंद्र मोदी बैठे हैं. सारा संसार देख रहा है. और सबसे बड़ी बात यह है ना कि आदमी की क्रेडिबिलिटी होती है. नरेंद्र मोदी इज़ अ क्रेडिबल वॉइस. उनप कोई पता है कि कोई मैनपुलेशन नहीं है. वहां पे जो है सबके सामने है. किसी का डर, भय, लुका चिपते वो नहीं है. तो एक तरफ वो कर रहे हैं, एक दूसरे वो कर रहे हैं. तो गुड बैलेंसिंग एक्ट अच्छा है. भारत संसार के सब देशों को अपने साथ ले चले. राष्ट्रित के हिसाब से फैसले करें और यह नहीं सोचे कि इस एक देश के साथ मेरे जो संबंध है उसका दूसरे देश पे क्या असरपड़ेगा. फाइन.

    सवालः फरीद झकारिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काफी तारीफ की है. आप क्या कहेंगे इस बारे में? 

    जवाबः वो अमेरिकी पत्रकार हैं. लर्नर्ड है. ही इज़ अ क्रेडिबल वॉइस इन मीडिया. अदरवाइज आल्सो नेटवर्क 18 के मैंने उनके पहले इंटरव्यू देते थे. अभी एनडीटीवी को इंटरव्यू दिया. तो उन्होंने तीन बातें कही. उन्होंने कहा कि एक तो नरेंद्र मोदी हैज़ प्रूव्ड हिमसेल्फ एस अ बेटर प्राइम मिनिस्टर देन जवाहरलाल नेहरू. कि पहली बार किसी क्रेडिबल आदमी ने इस तरह से इस बात को कहा और ऐलानिया कहा और कहा कि नेहरू का कंट्रीब्यूशन था ऑफकोर्स लेकिन जो आधुनिक भारत है मॉडर्न इंडिया है इसको बनाने वाले हैं नरेंद्र मोदी बड़ी इंपॉर्टेंट बात कही उन्होंने और काफी इंडिपेंडेंट और ऐसे स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति माने जाते हैं. उन पे किसी का नियंत्रण नहीं है. उनपे कोई गोदी मीडिया नहीं है. कोई एक्स वाई जेड नहीं है. वो तो अमेरिका में रहते हैं. बहुत सीनियर आदमी है. सेकंड उन्होंने यह बात उसमें कही कि आमतौर पे 10 वर्ष तक शासन करते हैं. लोग तो थक जाते हैं. जनता भी भूख जाती है. मोदी इस एक्सेप्शन. आप देखिए उनके फिजिकल फिटनेस उनका मूवमेंट उनके दिनचर्या सारी जो है और देश के लोग देखिए अभी बिहार में वोट दिया है. उनका जो मैंडेट है वो उसको रिन्यू किया है. जनता ने जो है तो ना तो जनता थकी ना जनता उबासी कहते हैं जिसको वो आई जनता में ना नरेंद्र मोदी थके. तो जगार ने जो बात कही है आई एंडोर्स दैट है तो अच्छा कहा उन्होंने. 


    सवालः एक बार फिर ट्रंप ने मोदी जी की तारीफ करते हुए उन्हें अपना ग्रेट फ्रेंड कहा है. क्या आप भरोसा करते हैं इस बात पर? 

    जवाबः ट्रंप ने पहले तो कहा अमेजिंग इंडिया. फिर कहा मोदी इज अ ग्रेट फ्रेंड. फिर ये कहा इंडिया इज अ की स्ट्रेटेजिक पार्टनर. कौन यकीन करेगा ट्रंप की बातों को? ही लॉस क्रेडिबिलिटी नो वन बिलीव्स हिम 140 करोड़ लोग तो उसको मतलब जैसे कहना चाहिए कि डिसपॉइंटमेंट और हल्का सा हेटेड भाव से ही देखते हैं उसको ही डन लॉट ऑफ़ डैमेज टू द कंट्री टू 140 करोड़ पीपल एंड टू द फ्रेंडशिप ऑफ नरेंद्र मोदी ही कांट बी ट्रस्टेड एनी मोर उसके जितने बयान आते हैं मैं समझता हूं नरेंद्र मोदी भी मुस्कुरा के पढ़ते होंगे और मुस्कुरा के निकल जाते होंगे वहां से कंप्लीटली ही लॉस्ट क्रेडिबिलिटी ही लॉस्ट ट्रस्ट एंड कॉन्फिडेंस और वो कुछ भी कहें लेकिन हां रिकॉर्ड के लिए सुनने में अच्छा लगता है कि एक बार फिर उन्होंने भारत की तारीफ की है. लेट्स सी उसका क्या इंपैक्ट आने वाली ट्रेड डील पे. 

    सवालः राजनीतिक परेक्षकों का ये मानना है कि एक तरफ तो ट्रंप टेरिफ खेलते रहे और दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी ने पूरा गेम ही पलट दिया. आपको ऐसा लगता है? 

    जवाबः बिल्कुल सही है. ट्रंप एक्चुअली फेल टू असेस द पिटिकल कैपेबिलिटीज मैन्योर और डिप्लोमेसी ऑफ नरेंद्र मोदी. आप देखिए उन्होंने सोचा जैसे पहले भारत के प्रधानमंत्रियों को दबाते रहते थे. आपको तो मालूम है विदेश मंत्रालय में पत्ता नहीं हिलता था अमेरिका के इशारे के बिना अमेरिका. कितना डोमिनेंस था उसमें. इशारे के वजह ये कहना ज्यादा सही हो गया कि अमेरिकन पॉलिसीज का अमेरिकन इन्फ्लुएंस का अमेरिकन प्रेसिडेंट का फॉरेन मिनिस्टर का कितना डोमिनेंस था हमारी पॉलिसीज के ऊपर जो है आज कहां है वो दैट वे जो है आज कहीं कुछ नहीं है तो उन्होंने असेस नहीं किया नरेंद्र मोदी को ठीक से स्टैंड लिया और आप देखिए गेम पलट दिया सारा जिस एक्सपोर्ट का खतरा था कि ट्रंप के कारण से हमारे एक्सपोर्ट गिर जाएंगे टेरिफिक से एक्सपोर्ट बैठ जाएंगे रिवर्स हो गया वो तो एक्सपोर्ट इतने बढ़े इससे पिछले 6 महीने के अंदर जो है कि ट्रंप का जो टेरिफ का कार्ड था पिट गया पूरी तरह से जो है इसीलिए तो क्या है कि नरेंद्र मोदी निर्भीक हैं. पीयूष गोयल इसीलिए ज्यादा झुक नहीं रहे हैं वार्ता के अंदर जो है क्योंकि उनका सबसे जो टेरिफ कार्ड था वो था कि भारत के एक्सपोर्ट पिट जाएंगे. भारत एक याचक की स्थिति में रहेगा. भारत के एक्सपोर्ट तो रिवर्स हो गए. वो तो उल्टा बढ़ गए और इतने बढ़ गए कि पिछले साल में इतने कभी नहीं बढ़े थे. पिछले साल का जो लेवल था उसको क्रॉस कर दिया. इस बार के एक्सपोर्ट्स ने जो है इट्स अ मिरेकल. तो नरेंद्र मोदी का जो गेम है जो साइलेंट किलर का जो गेम है नरेंद्र मोदी का ट्रंप जो है उसने मतलब खेल बदल दिया पासा बदल दिया और ट्रंप सोच रहे होंगे कि मैंने क्या किया ये एट द एंड ऑफ़ द डे जो सबसे बड़ा हथियार होता है वो होता है एक्सपोर्ट को रोकना ही फेल्ड टू डीमोरलाइज इंडियन एक्सपोर्ट्स इंडियन एक्सपोर्ट्स मेड न्यू विक्ट्री ए न्यू रिकॉर्ड.

    सवालः  अब आखिर क्या संभावनाएं हैं अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील की?

    जवाबः संभावनाएं अच्छी हैं इफ आई गो बाय यूनियन मिस्टर पीयूष गोयल असेसमेंट तो देन इज लाइकली टू कम इन अनदर 15 डेज और सो जैसा है. पर पीयूष गोयल ने एक बात साफ तौर पे कहा है. उसने कहा कि देखो डील तो तभी होगी. जब दोनों के फायदे की डील होगी और भारत झुकेगा नहीं. अंडर सुपरविजन एंड गाइडेंस ऑफ नरेंद्र मोदी ही इस क्लियरली टोल्ड अमेरिकन पीपल जो है कि डेरी और ये एग्रीकल्चर है ना ये नहीं खुलेंगे. इस पे कोई बारगेन नहीं है. कोई इस पर बात नहीं है. बाकी सब कर लो जो करना है रीज़नेबली. तो अमेरिका ने खुद ने माना कि इंडिया इज हार्ड नट टू ब्रेक बट स्टिल इंडिया गिवन द बेस्ट डील एक्सेप्ट एग्रीकल्चर एंड डेरी. तो उम्मीद तो है लोगों को बशर्त के इसमें एक ही बात है प्रोवाइडेड कहना चाहिए. डील इज डील इज ऑन कार्ड्स डील इज़ विज़िबल इन अदर मंथ और सो 20 डेज जो है बट एंड बट यू नेवर नो एन अनप्रिडिक्टेबल ए विमिकल ट्रंप. व्हाट इट डज़ एट द 11थ आवर यू नेवर नो. बट लेट्स होप एंड लेट्स प्रे दैट सेंस प्रवेल्स अपॉन हिम. ही रेक्टिफाई अरर्लियर मिस्टेक एंड सेंशंस और एग्रीस फॉर द न्यू ट्रेड डील विद इंडिया ऑन म्यूचुअल टर्म्स एंड कंडीशंस. लेट्स सी. 

    सवालः  एक बात सुनिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक सलाह से कीनिया प्रधानमंत्री की बेटी की आंखों की रोशनी लौट आई. वो कौन सी कहानी है जिस पे आज हर हिंदुस्तानी को गर्व है. वास्तव में गर्व है और कुदरत है. 

    जवाबः देखिए उसके भाग्य में लिखा था कि वो नरेंद्र मोदी नाम के एक व्यक्ति से मिलेगा. उसके जीवन का अंधेरा रोशनी में बदलेगा. वह जो एक्स प्राइम मिनिस्टर हैं तो उनकी बेटी को ब्रेन हेमरेज हो गया था. उसी प्रोसेस में आंख की रोशनी चली गई. अच्छे-अच्छे डॉक्टर दिखवाए देश विदेश में. एक्स प्राइम मिनिस्टर थे. पैसे की कमी नहीं थी. कांटेक्ट की कमी नहीं थी. सोर्स की कमी नहीं थी. एक बार नरेंद्र मोदी से टकरा गए किसी मीटिंग में. जिक्र किया अपने अपनी पीड़ा का. नरेंद्र मोदी मैंने कहा ना बहुत बहुत मानवीय संवेदना उनकी बड़ी प्रबल है देखिए तो उन्होंने पूछा क्या है तो उन्होंने बताया ऐसे है तो कहा मैं बताता हूं तो केरल के किसी आयुर्वेद डॉक्टर से उनका परिचय करवाया नेचुरली पीएमओ से फोन भी कराया होगा वो गए होंगे अच्छे से उनका इलाज हुआ बेटी की आंखें ठीक हो गई मिरेकल जो है ये तो ये नरेंद्र मोदी की पर्सनालिटी का वो पार्ट है जो बहुत कम लोग जान पाते हैं ऐसी घटनाएं जैसे आज है और आज आई एम श्योर इस शो के बाद में जितने लोग पीड़ित हैं या जो बीमार हैं, मरीज हैं, वह केरल जाएंगे. जाता है आदमी जाना चाहिए जो है तो यह एक ह्यूमन आस्पेक्ट था जिसमें नरेंद्र मोदी ने देश के हर नागरिक का मान ऊंचा किया और खुद भी उनको अच्छा लगा कि यार अच्छा हुआ आज मेरे कहने से या मेरे एफर्ट से जो है ना एक व्यक्ति को जीवन में जो है ना रोशनी मिल गई. 


    सवालः ब्रिटेन, जॉर्डन और ओमान के साथ भारत का हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट. आखिर क्या संदेश है इसमें डोनाल्ड ट्रंप के लिए? 


    जवाबः डोनाल्ड ट्रंप का यह है भाई जिसे कहते हैं डम अंग्रेजी में कहो तो माय फुट और कुछ कहो आप तो आप ये मत लो उसको यूं कह दो मेरे को परवाह नहीं है भाई देखो आप करो स्वागत है आपका नहीं करो हमें कोई नुकसान नहीं है हमारे तो लाइन लगी हुई है देखिए ब्रिटेन आ गया ये आ गया ये आ गया और तुम टेरिफ भी मत करो चलो मान लिया एक पल के लिए मेरे एक्सपोर्ट प्रभावित होने वाले नहीं है भारत याचक बन के नहीं आएगा भारत अपनी शर्तों पे करेगा भारत अपने किसानों को या उनके हितों की रक्षा से पीछे नहीं हट सकता. 

    भारत जो है भारत अपने किसानों के हितों की बलि नहीं देगा. एंड नॉट ओनली किसान डेरी इन एग्रीकल्चर कुछ और फैक्टर भी हो सकते हैं जो मालूम नहीं है हमें जिसके लिए कि अमेरिका प्रेशर कर रहा है. चावल के लिए कर रहा था. ठीक है थोड़ा बहुत चावल और खरीद लो. कोई बात नहीं. दैट विल है. लेकिन जो बेसिक सेक्टर्स हैं इंडियन इकॉनमी के बेसिक जो भारत के मर्यादा है जो नरेंद्र मोदी का जो चार्टर है इंडियन इकॉनमी का उससे कंप्रोमाइज नहीं हो सकता. ट्रंप फॉर ए मोमेंट मस्ट हैव बीन वेरी अपसेट कि ये क्या हुआ? मैंने ट्रेड डील नहीं करी और सारे राष्ट्र एक-एक करके ट्रेड डील करते चले जा रहे हैं. लेकिन क्या है ना वो थोड़ा सा इमंबैलेंस्ड है. उसको मतलब कोई फर्क नहीं पड़ेगा मेंटली कुछ दिनों के लिए. वो तो कभी जाएंगे छोड़ के किताब लिख रहे होंगे तब उनको याद आएगी कि हां यह घटना हुई थी. इसी तरह से जो है लेकिन फिर भी फेस वैल्यू पे जैसे भी थी ही मस्ट बी अपसेट एंड डिसपॉइंटंटेड विद इंडिया अचीवमेंट फॉर साइनिंग फ्रीक्वेंट फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स लाइक एनीथिंग और बहुत शानदार तरीके से. 

    सवालः आपने जेसी शो में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन तीन देशों के दौरे को डिकोड किया उसका एनालिसिस किया. लेकिन जब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी विदेश दौरे पर जाते हैं तो भारतीय यह पूछते हैं कि हमारे लिए क्या लेकर आए? 

    जवाबः वो लेकर आते हैं 140 करोड़ भारतीयों के लिए आत्मसम्मान. वो लेकर आते हैं भारत की वो पोजीशनिंग जब प्रधानमंत्री किसी भी राष्ट्र अध्यक्ष के साथ हाथ मिलाते हैं तो भारतीयों को यह संदेश जाता है कि अब भारत को सिर्फ सुनने वाला देश नहीं बल्कि सुने जाने वाला देश माना जाता है. और यही है भारत की बढ़ती हुई पहुंच. वो कहते हैं शायरी के अंदाज में कि हमने जब ख्वाब देखे तो जमीन ने आसमान खोल दिया. हमने जब रास्ते तय किए तो दुनिया ने रास्ते छोड़ दिए. अब यह दुनिया को तय करना है कि क्या वो भारत की रफ्तार के साथ चलने को तैयार है. 

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