'समझ आया तो ठीक, नहीं तो अगली बार मार देंगे', पंजाबी सिंगर तेजी कहलों पर फायरिंग; इस गैंग ने ली जिम्मेदारी

    कनाडा में अपराध की लहर बढ़ती जा रही है. पहले लॉरेंस बिश्नोई गिरोह द्वारा की गई गोलीबारी ने सनसनी फैलाई थी और अब रोहित गोदारा से जुड़ी गिरोहबंदी ने भी हिंसक घटना को अंजाम देकर माहौल और गर्म कर दिया है.

    Teji Kahlon Firing rohit godara gang take responsibility
    Image Source: Social Media

    कनाडा में अपराध की लहर बढ़ती जा रही है. पहले लॉरेंस बिश्नोई गिरोह द्वारा की गई गोलीबारी ने सनसनी फैलाई थी और अब रोहित गोदारा से जुड़ी गिरोहबंदी ने भी हिंसक घटना को अंजाम देकर माहौल और गर्म कर दिया है. सोशल मीडिया पर किये गए दावों के मुताबिक़ गोदारा गिरोह ने एक बार फिर तेज़ी कहलों नामक शख़्स पर ताबड़तोड़ फायरिंग करवाई, और इसके साथ ही उन्होंने खुलेआम धमकियाँ भी जारी कीं.


    गिरोह के एक अहम सदस्य, महेन्द्र सरण, ने सोशल पोस्ट में घटना की जिम्मेदारी ली और तेज़ी कहलों पर निशाना साधने का खुलासा किया. पोस्ट में कहा गया कि आरोपी की पेट में गोली लगी है और अगर उसने समझा तो ठीक नहीं तो अगली बार “कठोर” कार्रवाई करेंगे. उनके आरोपों में तेज़ी पर यह आरोप भी था कि वह गिरोह के विरोधियों को वित्तीय मदद और हथियार पहुँचाने में शामिल था तथा उन पर हमले की साज़िश कर रहा था. महेंद्र सरण ने पोस्ट में साफ कहा कि जो भी उनके “भाइयों” की तरफ मदद या समर्थन करेगा—चाहे वह व्यापारी हो, बिल्डर हो या हवाला कारोबारी उसका परिवार तक सुरक्षित नहीं रहेगा. पोस्ट की भाषा में वह चेतावनी स्पष्ट थी: यह बस शुरुआत है और आगे और कठोर कदम उठाए जाएंगे.

    पिछले हमलों की कड़ी से जुड़ी घटनाएँ

    कनाडा में हाल की हिंसा की श्रृंखला में कुछ हाई‑प्रोफाइल हमले भी शामिल रहे हैं. प्रसिद्ध कॉमेडियन कपिल शर्मा के कैफे पर भी हाल ही में हमला हुआ था, और 16 अक्टूबर की उस घटना के बाद एक स्थानीय व्यवसायी की हवेली को भी निशाना बनाया गया था. इन हमलों की जिम्मेदारी गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों ने ली थी—जिससे स्पष्ट है कि यहाँ कई गिरोह सक्रिय हैं और आपसी रंजिशों का दायरा समाज में भय पैदा कर रहा है.

    क्या कहता है यह मामला?

    सोशल मीडिया पर जारी धमकियों और गोलीबारी ने दर्शाया है कि कनाडा में कुछ संगठित गिरोह अपनी कार्रवाइयों को सार्वजनिक रूप से बढ़ा‑चढ़ाकर पेश कर रहे हैं. ऐसे हालात से न केवल स्थानीय समुदायों में असुरक्षा बढ़ती है, बल्कि प्रवासी और व्यापारिक वर्ग भी असंतुष्ट और भयभीत महसूस कर रहे हैं. कानून‑व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह चुनौती बन चुकी है कि वे इन गिरोहों की सक्रियता को किस तरह नियंत्रित कर पाते हैं.

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