Pongal 2026: देशभर में मकर संक्रांति के पर्व की रौनक देखने को मिल रही है और इसी अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के प्रमुख पर्व पोंगल को खास अंदाज में मनाया. 14 जनवरी को प्रधानमंत्री ने केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित पारंपरिक कार्यक्रम में शिरकत की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना में भाग लिया. इस दौरान उन्होंने तमिल संस्कृति से अपने जुड़ाव को व्यक्त करते हुए कहा कि पोंगल अब केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक वैश्विक पर्व बन चुका है, जिसे दुनिया भर में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग उत्साह के साथ मनाते हैं.
आज पूरे देश में मकर संक्रांति अलग-अलग रूपों और नामों से मनाई जा रही है. तमिलनाडु में इसे पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, उत्तर प्रदेश और बिहार में खिचड़ी, गुजरात में उत्तरायण, असम में माघी बिहू और कर्नाटक में सुग्गी हब्बा के नाम से जाना जाता है. इस मौके पर विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पावन अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भारतीय सांस्कृतिक विविधता की सराहना की.
पोंगल पर बोले पीएम मोदी: यह पर्व आभार और संतुलन का संदेश देता है
पोंगल के विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पर्व तमिल जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है और इसमें किसान, धरती और सूर्य के प्रति कृतज्ञता का भाव समाहित है. उन्होंने कहा कि पोंगल हमें यह सिखाता है कि प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए. यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक दर्शन है, जो परिश्रम, सहयोग और कृतज्ञता की भावना को मजबूत करता है.
#WATCH दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज पोंगल एक वैश्विक त्योहार बन चुका है। दुनियाभर में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग इसे उत्साह के साथ मनाते हैं... उसमें एक मैं भी हूं। इस विशेष पर्व को आप सभी के साथ मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। हमारे… https://t.co/6jZzw0Yaen pic.twitter.com/Vww3uU3IuL
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 14, 2026
तमिल विरासत से जुड़ाव मेरे लिए गर्व का विषय: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बीते एक वर्ष में तमिल संस्कृति से जुड़े कई आयोजनों में भाग लेना उनके लिए बेहद सुखद रहा है. उन्होंने गंगईकोंडा चोलपुरम के हजार साल पुराने ऐतिहासिक मंदिर में दर्शन, वाराणसी में आयोजित काशी तमिल संगमम और रामेश्वरम में पंबन ब्रिज के उद्घाटन का जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा कि इन अनुभवों ने उन्हें तमिल सभ्यता की समृद्ध परंपरा और उसकी ऐतिहासिक महानता को और करीब से समझने का अवसर दिया.
प्रकृति संरक्षण पर दिया खास संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने पोंगल के महत्व को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया. उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति आभार केवल उत्सवों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे रोजमर्रा के जीवन में अपनाना जरूरी है. धरती, जल और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है. आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, पानी बचाना और संसाधनों का संतुलित उपयोग करना समय की मांग है.गौरतलब है कि पोंगल तमिलनाडु का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, जो सूर्य देव, प्रकृति, पशुधन और अन्नदाता किसानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है. यह चार दिनों तक मनाया जाने वाला उत्सव है, जिसमें भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल शामिल हैं. इनमें थाई पोंगल मुख्य दिन होता है, जब पूरे राज्य में उल्लास और परंपराओं की अनूठी छटा देखने को मिलती है.
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