देश के प्रत्येक पुस्तकालय तक पहुंचनी चाहिए ये BOOK... 'ख़ुत्बात-ए-मोदी' किताब का शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया विमोचन

नई दिल्ली: राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण पुस्तक ‘ख़ुत्बात-ए-मोदी: लाल क़िले की फसील से’ का लोकार्पण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी के कर-कमलों द्वारा शास्त्री भवन, नई दिल्ली में संपन्न हुआ. यह पुस्तक वर्ष 2014 से 2025 तक स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिए गए भाषणों का संकलन है.

new delhi Education Minister Dharmendra Pradhan released book Khutbaat-e-Modi
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नई दिल्ली: राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण पुस्तक ‘ख़ुत्बात-ए-मोदी: लाल क़िले की फसील से’ का लोकार्पण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी के कर-कमलों द्वारा शास्त्री भवन, नई दिल्ली में संपन्न हुआ. यह पुस्तक वर्ष 2014 से 2025 तक स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिए गए भाषणों का संकलन है.

इस अवसर पर राष्ट्रीय उर्दू परिषद के निदेशक डॉ. शम्स इक़बाल ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि वे इस लोकार्पण समारोह में शिक्षा मंत्री का हृदय से स्वागत करते हैं और आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण पुस्तक के लोकार्पण के लिए अपना बहुमूल्य समय देकर परिषद का उत्साहवर्धन किया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति भी आभार प्रकट किया, जिनके नेतृत्व और दृष्टि ने उर्दू भाषा को राष्ट्रीय विकास के विमर्श से जोड़ने का अवसर प्रदान किया. राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद का यह प्रयास उर्दू के उज्ज्वल भविष्य और ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद पुस्तक संस्कृति को लोकप्रिय बनाने में भी अत्यंत सक्रिय भूमिका निभा रही है. इसी क्रम में परिषद ने अगस्त 2025 में श्रीनगर तथा नवंबर 2025 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अत्यंत सफल पुस्तक मेलों का आयोजन किया. 

उन्होंने ‘ख़ुत्बात-ए-मोदी’ के प्रकाशन को परिषद की प्रकाशन श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के मंत्र के साथ जिस प्रकार शासकीय दायित्वों का निर्वहन किया है, उसका प्रलेखन हमें उनके भाषणों में मिलता है. ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘उज्ज्वला योजना’, ‘जन औषधि योजना’, ‘आयुष्मान भारत योजना’, ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और ‘सुकन्या योजना’ से लेकर ‘आत्मनिर्भर’ और ‘विकसित भारत’ तक, इन सभी योजनाओं का खाका यदि समझना हो, तो यह प्रधानमंत्री के इन भाषणों से भली-भांति समझा जा सकता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ये भाषण हमें भारतीय नागरिक के रूप में हमारी जिम्मेदारियों का बोध कराते हैं और राष्ट्र निर्माण में अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए प्रेरित करते हैं.

उन्होंने इन भाषणों के महत्व और उपयोगिता पर आगे प्रकाश डालते हुए कहा कि ये भाषण पिछले 12 वर्षों में वैश्विक स्तर पर उभरते हुए नए और सशक्त भारत को प्रतिबिंबित करते हैं. देश की सुरक्षा के लिए आंतरिक और बाह्य स्तर पर उठाए गए सुदृढ़ कदमों की झलक भी इनमें स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. आज भारत हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और प्रतिदिन विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है, जिसका मूल कारण माननीय प्रधानमंत्री का वह विज़न है जिसकी आधारशिला है, ‘नेशन फ़र्स्ट’.

शिक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय उर्दू परिषद के निदेशक को निर्देश देते हुए कहा कि यह पुस्तक देश की प्रत्येक लाइब्रेरी तक पहुँचनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे पढ़ सकें और ‘विकसित भारत’ से संबंधित विषयों पर समाज में व्यापक स्तर पर विमर्श हो सके. उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विरासत, संस्कृति, जीवन-शैली और समृद्ध बौद्धिक परंपरा से जुड़े विषयों पर उर्दू भाषा में पुस्तकों का व्यापक प्रकाशन करने की जिम्मेदारी एनसीपीयूएल को लेनी चाहिए.

शिक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय उर्दू परिषद की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अत्यंत खुशी है कि परिषद ने इन भाषणों को उर्दू में प्रकाशित किया है. उन्होंने परिषद के निदेशक डॉ. शम्स इक़बाल को इस महत्वपूर्ण पुस्तक के प्रकाशन के लिए बधाई दी और आशा व्यक्त की कि इस पुस्तक के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का भारत के निर्माण और विकास से जुड़ा विज़न अधिकाधिक उर्दू पाठकों तक पहुँचेगा. इससे वे प्रधानमंत्री के 12 वर्षों के कार्यकाल में किए गए उल्लेखनीय विकास कार्यों, देश की भलाई के लिए आरंभ की गई योजनाओं तथा राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों से परिचित हो सकेंगे.

इस लोकार्पण समारोह में डॉ. विनीत जोशी (सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार), मनमोन कौर (संयुक्त सचिव, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार), चामो कृष्ण शास्त्री (अध्यक्ष, भारतीय भाषा समिति, नई दिल्ली), प्रोफेसर नैमा खातून (कुलपति, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़), प्रोफेसर शाहिद अख़्तर (पूर्व उपाध्यक्ष, एनसीपीयूएल एवं सदस्य, एनसीएमईआई, नई दिल्ली) सहित शिक्षा मंत्रालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.

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