राजस्थान में लगाए जाएंगे 1 करोड़ से ज्यादा स्मार्ट मीटर, जानिए बिजली उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर

    राजस्थान के बिजली विभाग ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है. सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक राज्य के 1.42 करोड़ घरों में स्मार्ट मीटर इंस्टॉल कर दिए जाएं.

    More than 1 crore smart meters are going to be installed in Rajasthan
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    जयपुर: राजस्थान के बिजली विभाग ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है. सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक राज्य के 1.42 करोड़ घरों में स्मार्ट मीटर इंस्टॉल कर दिए जाएं. अब तक लगभग 15 लाख मीटर लग चुके हैं. यह कदम बिजली वितरण व्यवस्था को सुधारने, बिजली चोरी रोकने और उपभोक्ताओं को पारदर्शी बिलिंग देने के लिए उठाया गया है. हालांकि, इस बदलाव के साथ कई सवाल भी उठ रहे हैं, जैसे: क्या खर्च उपभोक्ता को देना होगा? क्या बिल बढ़ेगा? और क्या सोलर पैनल वाले उपभोक्ताओं के लिए अलग मीटर लगेगा? आइए इसे विस्तार से समझते हैं.

    स्मार्ट मीटर क्या है और इसके लाभ

    स्मार्ट मीटर एक डिजिटल सिस्टम है जो आपके घर में उपयोग होने वाली बिजली की खपत को रीयल-टाइम में रिकॉर्ड करता है. इस डेटा को सीधे बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) के सर्वर तक भेजा जाता है, जिससे:

    गड़बड़ियों और अनुमानित बिलों को खत्म किया जा सकता है. मीटर रीडिंग के लिए कर्मचारियों की जरूरत कम हो जाती है. बिजली चोरी और अनियमितताओं पर नियंत्रण पाया जाताहै. उपभोक्ता ऐप या डिवाइस के माध्यम से अपनी खपत को लाइव देख सकते हैं. इस तकनीकी बदलाव को "स्मार्ट बिलिंग" और "स्मार्ट बिजली प्रबंधन" के रूप में देखा जा रहा है.

    क्या सोलर पैनल उपभोक्ताओं के लिए नया मीटर लगेगा?

    सोलर पैनल वाले उपभोक्ताओं के लिए आमतौर पर अलग मीटर की आवश्यकता नहीं होती. डिस्कॉम बाय-डायरेक्शनल स्मार्ट मीटर इंस्टॉल करता है, जो दो प्रकार से रीडिंग रिकॉर्ड करता है:

    • ग्रिड से ली गई बिजली
    • सोलर सिस्टम से ग्रिड में वापस दी गई अतिरिक्त बिजली

    इस प्रकार के मीटर से नेट बिलिंग की सुविधा मिलती है, यानी जितनी बिजली आपने ली और जितनी वापस दी, उसका अंतर ही आपका बिल बनता है. इसलिए, सोलर उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर एक फायदेमंद समाधान है.

    स्मार्ट मीटर की लागत कौन उठाएगा?

    स्मार्ट मीटर की लागत के लिए राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार मिलकर इसे पूरा करेंगे. केंद्र सरकार हर मीटर पर लगभग 900 रुपये की सब्सिडी देती है. इसका मतलब यह है कि उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर इसका भुगतान नहीं करना होगा. एक सामान्य सिंगल-फेज स्मार्ट मीटर की कीमत करीब 4,000 रुपये है, जबकि तीन-फेज मीटर की कीमत 7,500 से 9,000 रुपये तक हो सकती है, लेकिन यह खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा.

    क्या स्मार्ट मीटर से बिजली बिल बढ़ेगा?

    स्मार्ट मीटर अपने आप बिजली की खपत को बढ़ाता नहीं है. यह केवल खपत को सटीक और रीयल-टाइम में दिखाता है. इससे उपभोक्ता अपनी बिजली की खपत में बर्बादी पकड़ सकते हैं. अनावश्यक उपकरणों की खपत को कम किया जा सकता है. इसके अलावा बिजली चोरी और गलत बिलिंग को रोका जा सकता है, जिससे सिस्टम पारदर्शी होगा. हालांकि, कुछ लोग यह समझते हैं कि स्मार्ट मीटर से बिल बढ़ जाते हैं, लेकिन असल में इसका कारण ट्रांसपेरेंसी है. अब उपभोक्ता अपनी खपत को सही समय पर देख सकते हैं, जिससे उन्हें अपनी बिजली बचाने का बेहतर मौका मिलता है.

    स्मार्ट मीटर का काम कब तक पूरा होगा?

    राजस्थान सरकार ने 2026 तक राज्य भर में स्मार्ट मीटर इंस्टॉल करने का लक्ष्य रखा है. इस प्रक्रिया के तहत, हर दिन हजारों मीटर लगाए जा रहे हैं और धीरे-धीरे यह काम पूरे राज्य में फैल जाएगा. इस बदलाव से न केवल बिजली वितरण प्रणाली में सुधार होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को बेहतर और पारदर्शी सेवा मिलेगी.

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