How Modi-Putin Power Play stuns world, पढ़ें The JC Show का संपूर्ण विश्लेषण

    दुनिया की राजनीति में आज हलचल है. दो महाशक्तियों के बीच नया समीकरण, नई चाल, नई कहानियां.  कूटनीति के शतरंज पर चली गई एक ऐसी बाजी जिसने दुनिया के पावर गेम को हिला कर रख दिया है. क्या यह साझेदारी एक नई विश्व व्यवस्था गढ़ रही है?

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    नई दिल्ली: दुनिया की राजनीति में आज हलचल है. दो महाशक्तियों के बीच नया समीकरण, नई चाल, नई कहानियां.  कूटनीति के शतरंज पर चली गई एक ऐसी बाजी जिसने दुनिया के पावर गेम को हिला कर रख दिया है. क्या यह साझेदारी एक नई विश्व व्यवस्था गढ़ रही है? क्या यह मुलाकात आने वाले दशक का जिओपॉलिटिकल ऑर्डर तय करेगी? और क्या भारत बन रहा है ग्लोबल पावर प्ले का नया सेंटर? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादमीर पुतिन के बीच हुई इस मुलाकात को करेंगे डिकोड. 

    सवालः इसके मायने, इसके संदेश आज के द जेसी शो में. सर पहले सवाल के साथ शुरुआत करती हूं और आज हमने द जेसी शो की हेडलाइन रखी है. हाउ मोदी पुतिन पावर प्ले स्टंस द वर्ल्ड. आप एग्री करते हैं इस आकलन से? 

    जवाबः यू आर अब्सोलुटली करेक्ट. द एंटायर वर्ल्ड स्पेशली अमेरिका एंड यूरोपियन कंट्रीज. दे आर कंप्लीटली स्टंट द वे पुतिन हैज़ पब्लिकली कम आउट इन सपोर्ट ऑफ ह ओल्ड फ्रेंड मोदी ऑन टेरिफ इशू ही क्लियरली सेड और इवन वांट दैट ट्रंप हैज़ नो बिज़नेस टू पुट 25% एक्स्ट्रा ऑयल टेरिफ्स ऑन इंडिया इन दिस वे ही हैज़ प्रैक्टिकली चैलेंज द अथॉरिटी ऑफ़ ट्रंप जस्ट इन सपोर्ट ऑफ ह फ्रेंड नरेंद्र मोदी एट द सेम टाइम इट एन इमरजेंस ऑफ अ न्यू वर्ल्ड ऑर्डर वेयर आई आई थिंक नरेंद्र मोदी स्टैंड्स मोर टॉलर एंड मोर इफेक्टिव ऑन द ग्लोबल फ्रंट एंड प्रसाइजली वी कैन से दैट दिस विजिट हैज़ ओपन द न्यू डोर्स ऑफ ए न्यू वर्ल्ड फ्रंट वेयर इंडिया चाइना एंड रशिया विल प्ले ग्रेटर रोल देन अमेरिका. 

    सवालः सर ऐसा क्यों हुआ कि प्रोटोकॉल तोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुतिन को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे. 

    जवाबः एक दोस्त का प्यार है, सम्मान है. थोड़ा अप्रत्याशित था. खुद पुतिन को सूचना नहीं थी. रशियन इंटेलिजेंस को सूचना नहीं थी. पुतिन उतरे देखा मुस्कुराए उनको बाहों में लिया. गदगद थे और उनके तुरंत बाद क्रिमिनल से जो सैनिक राजधानी है रशिया की वहां से संदेश जारी हुआ यू प्रज़ नरेंद्र मोदीस अनएक्सेक्टेड जेस्चर टू रिसीव रशियन प्रेसिडेंट एट एयरपोर्ट बहुत अच्छा लगा उन सबको एक नई दोस्ती की एक नए प्रकार की जो है यह शुरुआत हुई 

    सवालः सर अपने तमाम सुरक्षा प्रोटोकॉल को छोड़ते हुए तमाम तामझाम को छोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पुतिन उनकी कार में बैठकर के पीएम हाउस तक पहुंचे. आखिर यह कार डिप्लोमेसी है क्या? 

    जवाबः कार डिप्लोमेसी इज अ न्यू इनोवेशन. पिछले साल गए थे प्रधानमंत्री मास्को तो पुतिन ने यही किया था. उन्होंने कहा कि मेरा फैसला था कार में साथ बैठने का. कार में बैठाया चले गए. उतर गए आगे. इस बार आए तो नरेंद्र मोदी ने यही किया. उनको वही सम्मान दिया. अपनी कार में बैठाया रशियन इंटेलिजेंस 100 लोगों का ग्रुप, केजीबी की सिक्योरिटी दुनिया भर के इंतजाम सब जिसे कहते हैं धरे रह गए. इंडियन सिक्योरिटी भी देखते रह गई और प्रधानमंत्री ने उनको बैठाया गाड़ी में अपने साथ और एयरपोर्ट से चल दिए. तो अपने आप में एक संबंधों की जो नजदीकी या संबंधों की जो निकटता है उसको यह दर्शाता है और फिर आप जानते हैं कि हेडलाइंस बटोरने, रोमांच पैदा करने, सनसनी पैदा करने में नरेंद्र मोदी का कोई स्थानी नहीं है. इसलिए इस पूरी यात्रा की जो सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ थी वो यह थी कि नरेंद्र मोदी उन्हें अपने साथ बैठा के कार में अपने घर तक लेकर गए. 

    सवालः जब कार में दोनों लोग बैठ रहे थे तो प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को कहा राइट साइड बैठने को. क्या इसे किसी तरीके का शुभ मुहूर्त माना जाता है? 

    जवाबः शुभ मुहूर्त का ये एक प्रोटोकॉल चला आ रहा है. बरसों से जो है जो वीआईपी होता है, मेहमान होता है, आपका गेस्ट होता है उसे कार में जो है कहते हैं दाएं तरफ बैठिए जो है तो नरेंद्र मोदी ने उस गरिमा का उस प्रोटोकॉल का पालन किया. जैसे पुतिन प्लेन से उतरे नरेंद्र मोदी कार की तरफ आगे बढ़े तो बाय चांस इंसिडेंटली वो लेफ्ट साइड की तरफ मुड़े. इस तरह से नरेंद्र मोदी ने रोका इशारा किया इधर आओ तो गाड़ी से घूम के वापस जो है राइट गेट की तरफ आए पुतिन एक पल के लिए ठिटके मुस्कुराए और फिर नरेंद्र मोदी की एडवाइस थी या जो इशारा था उसको उन्होंने माना और राइट हैंड से आकर के वहां पे बैठे लेकिन इस बार क्या था इसमें माइक्रो मैनेजमेंट भी था नरेंद्र मोदी का तो राइट हैंड में बैठाया फिर दूसरा क्या है कि पीएम हाउस ने जो लैंडिंग पॉइंट था जहां कार को रुकना था वहां स्वागत का इंतजाम था. लोग माला लेके बुके ले खड़े थे. वरिश्ता के क्रम में जो है अब अगर लेफ्ट में उतरते तो फिर घूम के जाना पड़ता. तो नरेंद्र मोदी ने फोर्स ही किया इसको और शुरू से उनको राइट हैंड में रखा ताकि उतरे तो सब काम ठीक ढंग से हुआ. प्रोटोकॉल के तरीके से हुआ. तो ये बड़प्पन है नरेंद्र मोदी का एक सम्मान था. पुतिन के प्रति उन्होंने किया. दैट्स ऑल. 

    सवालः पीएम मोदी और पुतिन की आपसी केमिस्ट्री को आप कैसे देखते हैं? 

    जवाबः आपसी केमिस्ट्री अद्भुत है. दे आर मेड फॉर ईच अदर. इसे कहना चाहिए और जो उनके रिश्ते हैं वह सरकारी कम है. पर्सनल ज्यादा हैं. उनके रिश्ते दो देशों के बीच नहीं दो व्यक्तियों के बीच कहे जा सकते हैं. आमतौर पर पुतिन की जो छवि है, बॉडी लैंग्वेज है, फेशियल एक्सप्रेशनंस हैं उनके. वो एक कठोर किस्म के और इनडिफरेंट, एग्रेसिव थोड़ा सा डिफेंसिव इस तरह के रहते हैं. लेकिन यहां उनकी बॉडी लैंग्वेज डिफरेंट थी. वो मुस्कुराए मोदी और वह गले मिले स्वागत स्वीकार किया गाड़ी में बैठे और चले गए तो एक तरह से क्या है कि ये जो उनकी केमिस्ट्री है यह बहुत जबरदस्त वहां पर दिखी और इसी केमिस्ट्री में उन्होंने देखा कि अब जल्दी ही शायद जब समय मिलेगा तो नरेंद्र मोदी रेसोंड करेंगे पुतिन के इनविटेशन को जाएंगे. तो ये मित्रता है और प्रगाढ़ होगी. दिस इज ऑल. 

    सवालः  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की दोस्ती कितनी पुरानी है? 

    जवाबः दोस्ती बहुत पुरानी है. 2001 तो सामने दिख ही रहा है. जब नरेंद्र मोदी वाज़ अ यंग चीफ मिनिस्टर ऑफ गुजरात उस समय दन प्राइम मिनिस्टर अटल बिहारी वाजपेयी मास्क हो गए थे ऑफिशियल विजिट पे. तो उस डेलीगेशन में नरेंद्र मोदी आल्सो अकंप्लीड द प्राइम मिनिस्टर द फॉर्मर प्राइम मिनिस्टर जो है उनके साथ थे. उनकी मुलाकात हुई वहां पे पुतिन से और पहली मुलाकात के बाद ही नरेंद्र मोदी ने जो ब्लॉग या पोस्ट लिखा तो उन्होंने कहा कि मैं कंपेरेटिवली एक छोटी स्टेट से आता था लेकिन पुतिन ने जो मान सम्मान और रिस्पेक्ट दिया उससे मैं बहुत प्रभावित हूं और एक्चुअली उसी मान सम्मान और रिस्पेक्ट से जो है उस दोस्ती की नींव पड़ी जो 2014 के बाद और पक्की हुई और अब और पक्की होती जा रही है और वैसे उस समय भी क्या है क्योंकि नरेंद्र मोदी एक क्यूरियस इन्वेस्टिंग स्टेट गवर्नमेंट के मुख्यमंत्री थे तो वहां भी उन्होंने कुछ ऐसी संभावनाएं तलाशी क्या कुछ गठबंधन या कोई प्रोजेक्ट हम रशिया में भी ले सकते हैं गुजरात गवर्नमेंट की ओर से तो एक पायलट प्रोजेक्ट उसमें भी लिया गया उसके बाद में फिर ज्यादा बात आगे नहीं बढ़ी ये दिल्ली आ गए लेकिन उसकी जो शुरुआत है आप कह सकते हैं वो 2001 से शुरू होती है और आज जारी है. 

    सवालः  मोदी और पुतिन की दोस्ती को लेकर राजनीतिक क्षेत्रों में एक नया नारा प्यूमो पी यू एमओ इस वक्त काफी प्रचलित है. कुछ कहना चाहेंगे आप इसके बारे में? 

    जवाबः क्लियर है पीयू पुतिन वो नरेंद्र मोदी यह एक्चुअली उनकी दोस्ती का एक प्रतीक है एक सिंबल जो सोशल मीडिया में सुपरहिट हुआ इसमें कि एक एक फ्रेंडली संकेत जिसे कहना चाहिए तो नरेंद्र मोदी ने उनकी तारीफ की उन्होंने इनकी तारीफ की और फिर ये एक एक नारा और चला वहां पे नरेंद्र मोदी का नारा था सबका साथ सबका विकास तो पुतिन के यहां ये बात चली कि गो टुगेदर ग्रो टुगेदर तो इस तरह से मिलके ऐसा लगा कि एक जोड़ी है लोकप्रिय जोड़ी है और सोशल मीडिया पे ट्रेंड करती है वो तो इसी से नारा आगे चल पड़ा और वैसे भी नरेंद्र मोदी के भाग्य में एक लकीर है जो बोलते हैं जो बात कहते हैं वो नारा अपने आप में सुपरहिट हो जाती है तो हो गया ये भी.

    सवालः  एक और बात कही नरेंद्र मोदी ने उन्होंने कहा कि भारत और रूस की दोस्ती एक ध्रुव तारे की तरह अटल है क्या कहना चाहते थे नरेंद्र मोदी सर  उनका कहना ये कि ध्रुव तारा देखो संस्कृति हो भाषा हो इनके विद्वान तो है नरेंद्र मोदी शब्दों का आविष्कार करते हैं हर बार वो नया-नया जो है तो उन्होंने कहा कि हमारी दोस्ती जो है एक ध्रुव तारे की तरह है ध्रुव तारे की विशेषता क्या है? 

    जवाबः अटल है, स्थिर है, हिलता डुलता नहीं है. इसी तरह से उन्होंने कहा भारत और रूस की दोस्ती एक तारे की तरह जो है ना स्थिर है, अटल है. और इसीलिए कहा कि पश्चिमी राष्ट्र देखते रहे और दुनिया में जो ब्रांड है यह शाइन कर रहा है मोदी और पुतिन का एक ध्रुव तारे की तरह नॉर्थ स्टार की तरह जो है यह इसको ये शाइन कर रहा है और बस ठीक है. तो आपस में कहा कि दोस्ती आगे रहेगी. इस तरह से दोस्ती आगे बढ़ेगी. यह जो शब्द है नारा है यह एक प्रतीक के रूप में चला उस समय दोस्ती का प्रतीक इन दोनों की मित्रता का प्रतीक दैट्स ऑल 

    सवालः  पुतिन का यह कहना था कि भारत भाग्यशाली है क्योंकि उनके पास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं आप क्या कहना चाहेंगे इस पर अब्सोलुटली करेक्ट देश के 140 करोड़ लोगों की भावना जो है उसको पुतिन ने उित किया है लेकिन थोड़ा अनयुअल था अच्छा था दोस्ती के प्रेम में था और उन्होंने वो बात कही है जो सच है इस देश में तो देश में अगर आके उस देश की बात करेंगे तो सबको अच्छा लगेगा. खुद पुतिन ने दो टू के कहा है द पीपल ऑफ इंडिया कैन ऑलवेज फील प्राउड इन देयर लीडरशिप. मतलब यह है कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं तो उनका भाग्य है. उनकी खुशकिस्मती है. और आगे उन्होंने एक लाइन और आगे बढ़कर के कहा कि नरेंद्र मोदी ऑलवेज पुट्स वेरी हाई टारगेट्स चैलेंजेस बिफोर ह कंट्री बिफोर एडमिनिस्ट्रेशन एंड बिफोर हिमसेल्फ. इससे है तो कुल मिलाके उन्होंने जो देश की भावना है 140 करोड़ लोगों की उसको अभिव्यक्त अपने शब्दों में और किया कि यह देश के लोगों का भाग्य है कि नरेंद्र मोदी उनके पास है. 

    सवालः  पुतिन ने लीक से हटकर जो भारत के लीडिंग न्यूज़ चैनल आज तक को इंटरव्यू दिया उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता लीडरशिप के बारे में काफी बातें की. उस पर आप क्या कहेंगे? 

    जवाबः उस इंटरव्यू को देखने से यह स्पष्ट पता लगता है पुतिन ने उनके बारे में जो कुछ कहा है उससे स्पष्ट है कि आज भी अंतरराष्ट्रीय कोर्ट नीति में नरेंद्र मोदी की जो धमक है वो बरकरार है. पुतिन ने शायद अपने पूरे करियर में किसी फॉरेन डिग्निटी किसी फॉरेन प्राइम मिनिस्टर प्रेसिडेंट की इतनी तारीफ नहीं की जितनी उन्होंने इस बार नरेंद्र मोदी की की है. तारीफ उससे कुछ लोग हैरान भी थे लेकिन यह थे और सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने नरेंद्र मोदी की तारीफ के लिए आज तक के प्लेटफार्म को चुना. वास्तव में आज तक का यह अंजना और गीता का इंटरव्यू सुपरहिट था. करोड़ों लोगों ने इसे देखा. इसका दूसरा एक आस्पेक्ट यह भी है. इट हैज़ रेस्टर्ड फदर स्ट्रेंथ द क्रेडिबिलिटी गुडविल एंड इमेज ऑफ आयतक ग्रुप. यू कैन से अरुणपुरी एंड द अदर पार्ट इज द चैनल हैज़ अगेन रेस्टर्ड इट्स पोजीशन इट्स डोमिनेंस इन द न्यूज़ मार्केट एक इंटरव्यू मिला सारे देश ने उसको देखा और दूसरी बात यह है कि अगर इस इंटरव्यू को अरेंज करने में या कोऑर्डिनेट करने में अश्लील वैष्णव पीएमओ की कोई भूमिका रही है तो वो भी स्वागत योग्य है. यह सब होना चाहिए. इट इज़ अ न्यू ओपनिंग. इट इज़ अ रिवाइवल ऑफ ओल्ड प्रैक्टिसेस. इस तरह से और आज तक ने जो कदम उठाया और मोरल सपोर्ट कहो या एक उस तरह का राज सरकार का भी उन्होंने पूछा होगा तो उन्होंने हां तो कहा होगा क्लियर तो किया होगा ऐसा प्रोटोकॉल है तो एक अच्छे अच्छी शुरुआत है और अच्छा जिसे कहना चाहिए प्रयास है कुछ लोगों का यह भी कहना है कि न्यूज़ एजेंसीज को भी इस वॉइस में शामिल किया जाना चाहिए से एएनआई एटसेट्रा इस तरह की जो है आप देखिए जो एएनआई की सुमिता प्रकाश उन्होंने काफी इंटरव्यू किए हैं नरेंद्र मोदी के किए हैं अमित शाह के किए हैं और जिसे कहना चाहिए फथफुली अच्छे इंटरव्यू किए हैं. तो अगली बार जब ऐसी कोई स्थिति बनती है तो हमें आगे बढ़ के इनिशिएटिव लेके देखना चाहिए कि न्यूज़ चैनल के साथ-साथ एक दो न्यूज़ एजेंसीज को भी मेरिट पे अगर हम उसमें उनको साथ में एडजस्ट कर सकें या अकोमोडेट कर सकें या इनकर्पोरेट कर सकें तो ये एक अच्छी शुरुआत होगी. इट वाज़ ओवरऑल ए गुड मूव. 

    सवालः  नरेंद्र मोदी पुतिन शिखर सम्मेलन का दो टूक मैसेज ट्रंप के लिए क्या है? 

    जवाबः ट्रंप के लिए दो मैसेज हैं. पहला यह है कि इंडिया रिफ्यूजेस टू बो डाउन इन फ्रंट ऑफ एनी प्रेशर. इंडिया विल नॉट बी अ सब्जेक्ट ऑफ ब्लैकमेल और एक्सटोशन ऑन टेरिफ इशू. दूसरा मैसेज यह है कि ट्रंप शुड केयरफुली नोट दिस थिंग दैट इंडियन फॉरेन पॉलिसी इंडियन फॉरेन एजेंडा इज नो मोर गोइंग टू वर्क आउट इन अकॉर्डेंस वि द प्रायोरिटीज और प्रेफरेंसेस ऑफ अमेरिका दी टू आर द मेजर मैसेजेस फॉर ट्रंप फ्रॉम दिस विजिट एंड थर्ड मैसेज हैज़ गॉन फ्रॉम पुतिन पुतिन से जो तीसरा मैसेज गया है वो ये गया है कि पुतिन हैज़ चैलेंज्ड ट्रंप्स अथॉरिटी पब्लिकली ऑन टेरिफ इशू दीज़ आर द मैसेजेस 

    सवालः  पीएम मोदी के साथ में अपने रिश्तों को निभाते हुए पुतिन ने एक बात कही दिल्ली में पहुंचते ही उन्होंने कहा कि अमेरिकी टेरिफ के आगे नरेंद्र मोदी झुकने वाले नहीं है और वो झुकने वाले नेता ही नहीं है. यह आउट ऑफ पैटर्न जो मोरल सपोर्ट था इसे आप कैसे देखते हैं? 

    जवाबः आई सैल्यूट पुतिन फॉर ह करज एंड कन्विक्शन टू गो आउट ऑफ द वे टू सपोर्ट नरेंद्र मोदी ऑन दिस इशू. और वास्तविकता भी यही है कि नरेंद्र मोदी झुकते नहीं है, रुकते नहीं है, डरते नहीं है. यह हम सब जानते हैं. इन 14 वर्षों में हमने इस बात को देखा है. दैट इज है. इसीलिए उन्होंने इस बात को वहां वापस जो है वो दोहराया और साथ ही यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी एक जो है ना निर्णायक और एक दूरदर्शी नेता हैं. लेकिन क्या है कुछ लोग विदेशों में इसे जेलस फील करते हैं. और यह कहा कि सम एक्टर्स आर विलिंग टू डिस्टर्ब इंडिया रोल इन ग्लोबल मार्केट. तो उनके मन में एक सहानुभूति थी. पर उन्होंने कहा पुतिन ने कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा और इसी तरह से हमारी दोस्ती और ये रिश्ता जो है ये आगे बढ़ता रहेगा. और नरेंद्र मोदी का जो मजबूत व्यक्तित्व है और इंडिया टुडे के इंटरव्यू में भी यही कहा कि वो झुकते नहीं है. वो ऐसे व्यक्ति नहीं जो झुके या दबाव में आए. दिस इज ऑल. 

    सवालः  पुतिन ने यहां पर यह भी कहा कि अमेरिका जब खुद हमसे फ्यूल खरीद रहा है तो भारत से क्या दिक्कत है? आप इसे किस तरह से देखते हैं? 

    जवाबः अब्सोलुटली करेक्ट. दिस ओनली एक्सपोजेस ट्रंप्स हिपोक्रेसी एंड डबल स्टैंडर्ड्स. और ठीक कहा है पुतिन ने कि अमेरिका को अधिकार है हमसे फ्यूल खरीदने का रशिया से. तो भारत को क्यों नहीं? इंडिया इज ए मेजर ग्लोबल पावर. इट कांट बी आर्म ट्विस्टेड बाय एनी अदर कंट्री. इट्स नो मोर ए ब्रिटिश कॉलोनी एंड एवरीवन मस्ट एक्सेप्ट दिस रियलिटी इन लाइफ. तो जब यह स्थिति सबके सामने है तो उसको स्वीकार करना चाहिए. तो कोई उनका बेसिस नहीं है भारत पे टेरिफ लगाने का. तो यह कुल मिला के उनका ये कहना था. 

    सवालः पुतिन ने कहा कि तेल की सप्लाई भारत को बेरोकटोक चलती रहेगी. अमेरिका का इस पर क्या रिएक्शन होगा? 
    जवाबः अमेरिका मस्ट बी वेरी अपसेट. ओपन चैलेंज जॉइंट चैलेंज डायरेक्टली बाय रशिया कि हम तो देंगे तेल और भारत यह कि हम तो खरीदेंगे तेल वहां से दे वेरी अनकंफर्टेबल सिचुएशन फॉर ट्रंप जो है सो दिस इज ऑल के अमेरिका का रिएक्शन तो नेगेटिव होना चाहिए जो लगता है जिस तरह से जो है 

    सवालः आपको लगता है कि पुतिन की भारत यात्रा का कोई भी नेगेटिव इंपैक्ट पड़ेगा अमेरिका के साथ होने वाली भारत की ट्रेड डील पर 

    जवाबः मे बी मे नॉट बी यू नो ट्रंप ट्रंप इस अनपेबल विमिकल लेकिन अपेरेंटली ऐसा लगता है कि ट्रंप मस्ट बी वेरी अपसेट वि द लेटेस्ट डेवलपमेंट्स ऑन दिस फ्रंट इन न्यू दिल्ली बाय पुतिन मोर एंड बाय मोदी आल्सो टू सम एक्सटेंट तो ऐसा लगता है कि अब जो वार्ता आगे बढ़ेगी तो नेक्स्ट वीक विल कम टू नो द एक्सैक्ट रिएक्शन ऑफ ट्रंप बाकी ऑन द फेस वैल्यू यह है कि अमेरिकन डेलीगेशन वििटिंग इंडिया द नेक्स्ट वीक टू फाइनलाइज द टू हैव डिस्कशन ऑन टेररिफ्स कहते हैं और कुल मिला के यह है कि भारत QUESTIONSकार को तो आशा है कि डील हो जाएगी और इस विजिट का कोई नेगेटिव प्रभाव नहीं पड़ेगा. विदेश मंत्री ने भी कुछ दिन पहले यही कहा है कि पुतिन की यात्रा का हमारी जो अमेरिका के साथ संबंध जो डील है उसके प्रोस्पेक्ट्स हैं उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. सो लेट्स सी व्हाट रियली कम्स आउट इन द कमिंग डेज. 

    सवालः भारत, रूस, चीन, अमेरिका में जो लव, हेट रिलेशनशिप एंड कंट्राडिक्शंस हैं उसे आखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतनी कुशलता से कैसे मैनेज कर लेते हैं? 

    जवाबः गॉड गिफ्ट है. बाकी तो बहुत मुश्किल है. आप देखिए भारत अमेरिका का रिश्ता अलग है. भारत रूस का रिश्ता अलग है. भारत चीन का रिश्ता अलग है. पाकिस्तान का रिश्ता अलग है. और उनके रिश्ते भी क्रॉस हैं आपस में. आप देखिए चाइना जो है हमारे सबसे बड़े शत्रु है पाकिस्तान उसका गार्डियन है. अमेरिका भी उसी तरफ बढ़ रहा है. हम रशिया चाइना का फ्रेंड है लेकिन हमारा दोस्त है. तो एक कंट्राडिक्शन है आपस में. तो नरेंद्र मोदी ने कहा था वी आर मल्टी अलाइन नेशन जिसे कहना चाहिए. हम किसी एक ग्रुप के साथ नहीं है. यूरोप चाहता अमेरिका चाहता है आप एक जगह इधर आइए उधर आइए. कहते हैं नो हम तठस्थ नहीं है. हम शांति के साथ हैं. इन्हें जो है ये इसको नरेंद्र मोदी मैनेज कर रहे हैं. लेकिन बेसिक क्या है? इनहेरेंट कंट्राडिक्शंस हैं इन सारे रिलेशनशिप के भीतर. अब देखिए कब तक किस तरह से ये चीजें मैनेज होती हैं. लेकिन सो फार ही हैज़ बीन सक्सेसफुली मैनेजिंग ऑल दीज़ कंट्राडिक्शन. बट दीज़ आर द बेसिक कंट्राडिक्शन इनबिल्ट कंट्राडिक्शन जिसे कहते हैं. और जब भी चाइना की बात होती है तो चाइना का जो इशू है बहुत गंभीर है. कई दफे लोग ये सवाल करते हैं ना कल को अरुणाचल में फिर चाइना घुसा है. कुछ और हुआ. दैट वे है तो हम क्या करेंगे या रशिया क्या करेगा एक बात आती है ना सवाल उसमें जो है तो इनबिल्ट कंट्राडिक्शन है और रूस की जो पोजीशन है उसने बहुत क्लियर कर दिया अपनी पोजीशन को उसने कहा है स्मार्ट ऑपरेटर है देखो हर कोई स्मार्ट है आजकल जो है तो पुतिन ने भी इंस्पाइट ऑफ ऑल फ्रेंडशिप जो है ये कहा है उसके अंदर कि इंडिया एंड चाइना आर आवर क्लोजेस्ट फ्रेंड्स मतलब दोनों हमारे सबसे निकट के दोस्त हैं बट वी हैव नो राइट टू इंटरवीन इन देयर बटरल रिलेशंस तो ब्रॉडली जो है ना वो हस्तक्षेप नहीं करेंगे. लेकिन कोई स्पेसिफिक रिक्वायरमेंट आई तो अग्नि परीक्षा उस दिन होगी. पर सवाल यह है कि वो आएगी कि नहीं आएगी यह समय के साथ देखने वाली बात है. पुतिन ने यह भी कहा है कि सो फार इंडिया एंड चाइना हैज़ बीन सक्सेसफुली मैनेजिंग ऑल दी कंट्राडिक्शन. तो सारी बात कूटनीति की भाषा में इस तरह से हो रही है. लेकिन सो फार नरेंद्र मोदी इस मैनेजिंग ऑल दिस डायमेंशंस. 

    सवालः बहुत इंटरेस्टिंग आपने अभी कंट्राडिक्शन समझाए. मैं यह समझना चाहती हूं कि नरेंद्र मोदी और पुतिन इतने प्रगाड़ दोस्त हैं तो क्या कभी जरूरत पड़ने पर ऐसे कंट्राडिक्शन के दौरान भारत और चाइना के बीच रूस बीच में आएंगे पुतिन चाइना और भारत के बीच में मध्यस्था करेंगे

    जवाबः देखो इन जनरल हो सकता है इन जनरल जिसे कहते हैं उस वेल में हो सकता है इशू बेस्ड मुझे नहीं लगता फिर वही झगड़ा आएगा कि दो राष्ट्रों का झगड़ा तीसरा राष्ट्र बीच में कैसे आया इंडिया विल नॉट अलाउड अभी जब ट्रंप ने कहा था मैं समझौता कराता हूं भारत ने कहा नो कीप ऑफ हम खुद अपना झगड़ा सौटाएंगे. द वे इंडिया का स्टैंड भी यही रहेगा उसके अंदर जो है और सो फार क्या इंडिया मैनेज कर रहा है. तो इट इज वेरी क्यूरियस टू नो कि मान लो कल को कोई ऐसी स्थिति आई बिल्कुल इस तरह की कि भारत को लगा कि चाइना अपनी लक्ष्मण रेखा के बाहर जा रहा है और हमें सैनिक कारवाई करनी पड़ सकती है या कुछ करना पड़ सकता है. तो एज अ कंसल्टेशन दे माइट कंसल्ट पुतिन. बाकी पुतिन का कोई इस तरह का डायरेक्ट इंटरवेंशन हो इस मामले में ऐसा मुझे लगता नहीं है वक्त जरूरत पड़ने में. क्योंकि नरेंद्र मोदी खुद ही एक टावरिंग व्यक्ति है जो है और नरेंद्र मोदी खुद जो करते हैं वो करते हैं फिर वो उस बात को चाइना के बारे में भी मुझे लगता है इस बार तैयारी है उनकी अगर चाइना ने कुछ ऐसा किया तो चाइना को भी पाकिस्तान की तरह मुंह तोड़ जवाब जो है ना दिया जा सकता है लेकिन आपका जो सवाल है कि क्या वो मध्यस्था करेंगे इट विल डिपेंड ऑन द इश्यूज इश्यूज क्या स्पेसिफिक हैं और उसमें जो है रशिया पुतिन हाउ मेनी एक्स्ट्रा माइल्स ही ट्रेवल्स फॉर अस एट दैट टाइम और उसकी हैसियत है कि नहीं चाइना के सामने एक्स्ट्रा माइल ट्रेवल करने की उसमें होगा तो फिलहाल तो आप ये कहिए कि एवरीथिंग शुड बी लेफ्ट टू नरेंद्र मोदी. जैसे कहना चाहिए ह लीडरशिप एंड ह कॉम्पिटेंस व्हिच हैज़ सो फार बीन एस्टैब्लिश्ड मोर देन वंस ऑन चाइना फ्रंट. 

    सवालः  भारत रूस संबंधों के इतिहास की अगर बात करें तो इतिहास ये कहता है कि जबजब संकट की घड़ी आई तबतब रूस ने भारत का साथ दिया. आप इस पे कुछ कहेंगे? 

    जवाबः जहां तक भारत और रशिया के संबंधों का प्रश्न है, संकट की हर घड़ी में रशिया हमारे साथ खड़ा रहा है. एंड लाइक द सेम वे भारत भी पॉलिटिकल संकट की हर घड़ी में रशिया के साथ खड़ा रहा है. जहां तक भारत के साथ रूस के खड़े रहने का सवाल है. सबसे बड़ा समर्थन रशिया से हमें 1971 की लड़ाई में मिला. जब हम लड़ाई जीत चुके थे. अमेरिका का प्रभाव था, दबाव था. उसमें रशिया हमारे समर्थन में आया. उसने उस समर्थन से अमेरिकन प्रेशर को बैलेंस किया और अल्टीमेटली फिर जो है 90 95 हजार सैनिकों का सरेंडर हुआ और बांग्लादेश की लड़ाई जो है हमने जीती. तो भारत मोटे तौर पे भारत की जनता रशिया के कंट्रीब्यूशन को 1971 से देखती है. हालांकि संबंध 1950 से उनके साथ रहे हैं. 1962 की लड़ाई से पहले ही जेट फाइटर के मेक के शायद ऑर्डर दिए गए थे. लेकिन उनकी डिलीवरी 6364 में हुई. तो मूलत देखा जाए तो भारत के लोग रशिया के सपोर्ट को 71 से जानते हैं. 71 से गिनते हैं. 

    सवालः  भारत और रूस के बीच जो मेजर डिफेंस डील्स हुई है उन पर आप क्या कहेंगे? 

    जवाब: डिफेंस हैज़ बीन ए एरिया ऑफ़ फोकस बिटवीन पुतिन एंड नरेंद्र मोदी. डिफेंस से मैंने सुना कुछ ऐसे मेजर अंडरस्टैंडिंग्स हुई है जो पब्लिक इंटरेस्ट में बाहर नहीं आई हैं. सरकार सीक्रेसी के कारण से उनको बाहर शायद नहीं लाना चाहती है. लेकिन नरेंद्र मोदी ने कुछ मेजर काम इस बार पुतिन से करवाए हैं इन द इंटरेस्ट ऑफ द कंट्री जिसे कहना चाहिए. और अपेरेंटली अगर हम देखते हैं डिफेंस के अंदर तो सबसे बड़ा काम यह हुआ टेक्नोलॉजी को शेयर करने का. तो खुद पुतिन ने कहा है कि वी नॉट ओनली सेल टेक्नोलॉजी वी आल्सो शेयर इट इट्स अ वेरी रेयर फिनोमिना इन मिलिट्री टेक्निकल कोपरेशन एंड दिस आल्सो शोज़ द लेवल ऑफ़ ट्रस्ट एंड कॉन्फिडेंस बिटवीन द पीपल एंड द गवर्नमेंट्स ऑफ दी टू कंट्रीज जो है और आगे अगर इसकी व्याख्या करें तो 500 एस पे बातचीत हुई है. उन्होंने कहा थोड़ा वक्त लगेगा कोई बात नहीं. एसयू 57 की बात हुई है. फिर S400 की बात हुई है. उसका जो बैलेंस खेप आना है वहां से उसके बारे में बात हुई है. न्यूक्लियर रिएक्टर्स के बारे में बात हुई है. लोकलाइज्ड छोटे जो रिएक्टर्स हैं. तो एक तो पहले ही तमिलनाडु में प्लांट लग चुका है. एक दूसरा प्लांट भी जल्द ही लगने वाला है. राजनाथ सिंह और रशियन डिफेंस मिनिस्ट्री की आपस में चर्चा हुई है. कुल मिला के ऐसा माना जा रहा है कि जो विजिट थी इसका मेन फोकस जो आउटकम जो है वो डिफेंस में हुआ है. कुछ तो जानकारी पब्लिक हुई है. कुछ जानकारी नेशनल इंटरेस्ट में पब्लिक नहीं हुई है. बट आई थिंक नरेंद्र मोदी हैज़ हैज़ हैड सम मेजर गेंस ड्यूरिंग दिस विजिट ऑन डिफेंस फ्रंट फ्रॉम रशिया. ऐसा मुझे लगता है. 

    सवालः डिफेंस डील से इधर और कुछ जो समझौते दोनों देशों के बीच हुए हो वुड यू लाइक टू इंडिकेट? 

    जवाबः हां ससुरा समझौता तो वो है व्यापार जो दोनों देशों के बीच में अभी 65 बिलियन डॉलर का है उसको 2030 अर्थात अगले 5 साल तक जो है ना उसको 100 बिलियन डॉलर तक लेके जाना सबसे बड़ा फैसला ये हुआ है फिर ये हुआ वीजा फ्री है आओ भाई इंडिया जो है फिर पांच छह सेक्टर्स में एक मेजर फ्रेमवर्क बना है रोड मैप बना है अगले पांच साल के लिए आप कह सकते हैं उसमें कि लेबर मोबिलिटी उसको आप कह सकते हैं फूड सेफ्टी कह सकते हैं देन मेडिकल कोपरेशन हेल्थ कोपरेशन आप कह सकते हैं. ट्रांसपोर्ट कह सकते हैं, एग्रीकल्चर कह सकते हैं, न्यूक्लियर कह सकते हैं. इस तरह से मेजर जो है ना एग्रीमेंट सारे वो रशिया के साथ में हुए हैं. एस फ बटरल एग्रीमेंट्स आर कंसर्न द विजिट हैज़ बीन 100% सक्सेसफुल वेयर इंडिया हैज़ बीन ए मेजर गेनर. 

    सवालः पुतिन ने यह भी कहा कि मैं दिल्ली केवल तेल बेचने या फिर कारोबार करने नहीं आया हूं बल्कि मैं अपने दोस्त से मिलने भी आया. तो सर इसके बारे में आप क्या कहेंगे? 

    जवाबः अब्सोलुटली करेक्ट. वह तो खुद ही कह चुके हैं कि नरेंद्र मोदी से मेरे व्यक्तिगत रिश्ते हैं. मोदी के साथ मेरे पुराने संबंध हैं. मैं मोदी से बहुत प्रभावित हूं. ये पब्लिकली सारी बातें कह चुकी हैं. तो इसलिए उन्होंने कहा कि ये जो ड्राइविंग फैक्टर था इस बार विजिट का मास्को से दिल्ली का नॉट ओनली बिजनेस ऑयल्स एंड ऑल दी थिंग्स डिफेंस डील्स बट था कि नरेंद्र मोदी से मिलेंगे दोस्त से मिलेंगे. इंडिया में जाएंगे तो नरेंद्र मोदी से मुलाकात होगी गपशप होगी. तो सही कह रहे हैं कि खाली तेल और कारोबार के लिए मैं नहीं आया हूं. मैं व्यक्तिगत रिश्ते हैं मोदी के हैं. उनका सम्मान करने, उनको रिन्यू करने, उनको फदर स्ट्रांग उनको स्ट्रेंथन करने के लिए आया हूं. करेक्ट. 

    सवालः आखिर पुतिन की इस ऐतिहासिक भारत यात्रा को किन निगाहों से पाकिस्तान, चीन और यूरोपीय कंट्री देख रहे होंगे? 

    जवाबः दे ऑल मस्ट बी अपसेट. पाकिस्तान इसी से अपसेट हो गया. आतंकवाद में साथ खड़ा है हमारे रशिया. एक तरह से तो अपसेट है. चाइना इसलिए अपसेट है कि रशिया मेरा खास आदमी यह कहां चला गया दूसरे खेमे में वहां ऐसा नहीं खेमा नहीं बदल लेकिन आगे जाकर कितना बदल ले मन में शंका आती है ना यूरोपियन कंट्रीज वो अपसेट है वो इससे पुतिन से अपसेट हैं तो देखते हैं अभी हम तो नरेंद्र मोदी को अपना समझते थे उनसे उम्मीद कर रहे थे यूक्रेन बाहर को सुलझाएंगे तो ये कहां चला गया वहां होता है मन का भाव है कैसे आता है ब्रॉडली जो है तो ऑल दिस पीपल आर क्यूरियस रादर अपसेट वेरी क्यूरियस एंड टू नो व्हाट एक्सक्टली हैपन इन दिल्ली और दिल्ली में जो कुछ हुआ उसका आने वाले दिनों में अगले दिनों में परिणाम क्या निकलेगा? आउटकम क्या होगा? उसके रिफ्लेक्शंस क्या होंगे? सो लेट्स वेट. 

    सवालः यूक्रेन सहित पश्चिमी राष्ट्रों को यह आशा थी कि पुतिन के दिल्ली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने को लेकर जो नैतिक प्रभाव है अपना उसका उपयोग करेंगे. क्या आपको सचमुच लगता है कि इस दिशा में कुछ हुआ है? 

    जवाबः देखो होना तो बाद की बात है पर यह है ना कि दिल है कि मानता नहीं. अब 5000 किलोमीटर यूक्रेन है. 4500 किलोमीटर रशिया है. दोनों बैठकर सोचते हैं यह उनका भरोसा है नरेंद्र मोदी में कि नरेंद्र मोदी जरूर कुछ कर सकते हैं. यूरोपियन कंट्रीज कहते हैं वो भी कर सकते हैं. सारे स्टेक होल्डर्स हैं. नरेंद्र मोदी पे भरोसा है. इस बार मैंने पढ़ा कि यूरोपियन देशों ने गुहार लगाई है कि आप पुतिन से बात करिए. वो आपकी सुनते हैं. देखिए अब इस तरह से जो है ये तो उनकी उम्मीद है. उसी उम्मीदों के साथ में वो लोग अपेक्षा कर रहे थे. इस बार कुछ हुआ होगा. अब होने की ज्यादा गुंजाइश अभी नहीं थी. उसमें जो जो स्टेटस है यूक्रेन और रशिया एग्रीमेंट की सीज फायर की ज्यादा गुंजाइश नहीं है. और हो सकता है पॉलिटिकली भी नरेंद्र मोदी मे नॉट लाइक टू वेस्ट ह पॉलिटिकल कैपिटल एट दिस मोमेंट रशिया के साथ जो कैपिटल बनी है लेकिन मोदी इस ओपन ऑफ नरेंद्र मोदी ने कई बार यह कहा हुआ है कि भाई अंतिम समाधान युद्ध के मैदान में नहीं है. सशन इज द डायलॉग एंड डिप्लोमेसी. आपको वही करना पड़ेगा. 

    पिछली बार भी जब वो वहां गए थे यूक्रेन भी गए थे उसके बाद भी जब मैसेज आए थे तो ऐसी खबरें आई थी कि यूक्रेन सहमत है समझौते रशिया ने कहा हमें भी मोदी की लीडरशिप में जो है वो भरोसा है एक तरह से करिए इसको बीच में ट्रंप आ गए चुनाव हो गया अमेरिका में ट्रंप तो लोग कहते हैं ना बुल इन चाइना शॉप इन यूक्रेन वॉर जो है यह तो सब बिगड़ गया जो है तो अब क्या है कि हर किसी के लिए हस्तक्षेप करने की सीमाएं हो गई हैं ट्रंप के रवैया को देखते हुए अब ट्रंप क्या है उसने तो कहते हैं वन वे ट्रैफिक में एक तरफा एग्रीमेंट बना लिया है. रशिया तो हैप्पी है. वो कहते हैं जितने एरिया पे आपका कब्जा है आप ले जाइए यूक्रेन से जो है यूक्रेन इसके लिए तैयार नहीं है. तो वो आज ही उनका एक पोस्ट मैंने देखा है ट्रंप का जो है कि भ यूक्रेन इज नॉट रेसोंडिंग. रशिया इज़ रेडी. तो ऐसे चलता रहेगा. लेकिन अब यूरोपियन देशों की आशा है और आशा तो ठीक है. और यह बात तो सही है कि नरेंद्र मोदी कुछ ना कुछ तो करेंगे. आगे जब बात बढ़ेगी तो मोदी विल सर्टेनली ट्राई टू पुट ह इनफ्लुएंस जितना कर सकते हैं इसके अंदर लेकिन मामला इतना उलझ गया है इसके अंदर पहले मामला होते रुक गया नरेंद्र मोदी की मध्यस्था से उसमें बात होने को थी बात आगे बढ़ सकती थी उसमें नहीं हुई अब सिचुएशन थोड़ी चेंज है लेकिन स्टिल लोगों की उम्मीद है लेट्स सी उनकी उम्मीदें पूरी हो और यह युद्ध विराम जो है हो वहां पे. 

    सवालः सुना तो यह भी है कि पुतिन के बाद उनके धुर विरोधी यूक्रेन के राष्ट्रपति राष्ट्रपति जेलस्की भी भारत आ रहे हैं और उसके लिए भी भारत पूरा वेलकम रेड कारपेट वेलकम करने के लिए तैयार है. अब यह बहुत विरोधाभास समझ लें या ये चमत्कार समझ लें. डिप्लोमेसी मैनेजमेंट है बैलेंस है नरेंद्र मोदी का. इसे कैसे देखते हैं आप? 

    जवाबः नरेंद्र मोदी इस अ मास्टर ऑफ मैनेजिंग कंट्राडिक्शन. ये तो आप जानते ही हैं. दैट इज़ है. अब देखिए पुतिन का भरोसा और पुतिन को मालूम है क्यों आ रहे हैं. उनकी सहमति से ही आ रहे हैं. एनीवे ऐसा नहीं कि चुपके से आ रहा है कोई व्यक्ति. जब यहां पे थे तब उनको मालूम था कि अगले महीने हो सकता है जनवरी के फर्स्ट या सेकंड वीक में जो है वह यूक्रेन के राष्ट्रपति जोस्की जो है यहां पे भारत आए लेकिन सर्टेनली इट इज़ ए जिसे कहना चाहिए कि रफ एंड टफ जो राइड है बैलेंसिंग एक्ट है नरेंद्र मोदी के लिए इसमें तो कोई शक नहीं है लेकिन वो ये सब कई सालों से कर रहे हैं इस बार भी कर लेंगे और वो इसी उम्मीद के साथ आ रहे हैं. कई बार यह होता है ना व्यक्ति जब तक मिल नहीं ले ना उसको मजा नहीं आता बात का उसको लगता नहीं कि मेरा काम होगा अब देखो उनकी आठ बार बात हो चुकी है नरेंद्र मोदी की फोन पर उनके साथ में चार बार वो फिजिकली आपस में व्यक्ति से मिल चुके हैं लेकिन दिल है कि मानता नहीं अब वो कह रहे हैं नहीं मैं दिल्ली आना चाहता हूं तो 5000 किलोमीटर से चल के वो दिल्ली आएंगे इसी उम्मीद के साथ कि मैं फेस टू फेस बैठूंगा नरेंद्र मोदी को कन्विंस करूंगा कि पुतिन आपकी सुनते हैं आप युद्ध को रुकवाइए इसी आशा और उम्मीद के साथ जो है और भारत आ रहे हैं. स्वागत है. 

    सवालः अमेरिकन डॉलर के प्रवित को खत्म करने के लिए अब भारत रूस ने लोकल करेंसी में व्यापार करने का फैसला किया है. इसे आप कैसे देखते हैं और इसका असर अमेरिकन डॉलर पे कितना पड़ेगा? 

    जवाबः असर तो है देखो ये तो शुरुआत है. डॉलर वैसे क्या है? बहुत ही स्ट्रांग करेंसी है. लेकिन जो शुरुआत हुई है ब्रिक्स वाले भी कोशिश कर रहे हैं. भारत रशिया में तो ऑलरेडी चल रहा है. तो इनफैक्ट क्या है कि डॉलर एकदम से खत्म तो नहीं होगा. हम लगेंगे 10 20 साल उसको जो है लेकिन कमजोर हो जाएगा क्योंकि मल्टीपल करेंसी अगर सिस्टम आप इंट्रोड्यूस कर देते हैं जैसा कि रशिया और इंडिया ने आपस में कर लिया है तो डॉलर की ताकत कमजोर होगी उसकी स्ट्रेंथ कमजोर होगी तो निश्चित तौर पे इट्स अ बैड डेवलपमेंट फॉर डॉलर ये जो लोकल करेंसी में कारोबार करने का जो फैसला है उसको और आगे बढ़ा रहे हैं यह डॉलर के लिए एक नेगेटिव संकेत है. यह एक्चुअली डीडोलराइजेशन है. एक तरह देखा जाए तो जो है बट डॉलर स्टिल वेरी स्ट्रांग बट जिसे कहना चाहिए डेंट डॉलर को लगा है. 

    सवालः कुछ महीने पहले ट्रंप ने भारत और रूस की अर्थव्यवस्था को डे इकोनमी कहा था तो अब इंडियन इकोनमी की 8.2% ग्रोथ रेट को देखकर ट्रंप क्या कहेंगे? 

    जवाबः ही मस्ट बी वेरी अपसेट एंड हैज़ नो फेस टू शो यही है बेसिकली और भारत में नरेंद्र मोदी का चमत्कार हो गया है और फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा है ना कि इनस्पाइट ऑफ़ ऑल ग्लोबल अनसर्टेनिटीज जो है इंडिया अंडर द स्टेबल लीडरशिप ऑफ़ नरेंद्र मोदी हैज़ गेन दिस अचीवमेंट ये 8.2 वाला जो है कि थर्ड क्वार्टर है उसके अंदर जो सबसे और शायद वो जो ग्रोथ है वो कहीं आसपास कहीं दिखाई नहीं देती है. दैट इट इज़ अ मिरेकल. अब इस ग्रोथ को कुछ लोगों ने पहले कहा करते थे कि इट्स अ हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ. जब दो3% ग्रोथ होती थी इंडिया की. तो नरेंद्र मोदी ने इसको बहुत मतलब सीरियसली लिया है और कल उनका बयान था उसके अंदर था कि इस तरह का जो प्रचार लोग करते हैं कि हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ जो है इट्स मेलाइनिंग द एंटायर कम्युनिटी एंटायर सिविलाइजेशन जिसे कहते हैं तो इन सब लोगों के जिसे कहना चाहिए मोटी भाषा में कि एक तमाचा है सब लोगों के लिए जो भारत की ग्रोथ रूट को लेके क्वेश्चन करते थे और जिसमें खास करके ट्रंप जिन्होंने कहा था डेड इकॉनमी इंडिया की जो है अब आप देखिए यहां पे इंडियन इकॉनमी कितनी स्ट्रांग है अभी जीएसटी टू पहले इनकम टैक्स एक्ट हुआ, रिफॉर्म्स हुए. अब क्या है कि इसमें कस्टम में रिफॉर्म्स आने जा रहे हैं. और कस्टम के जो रिफॉर्म्स हैं जैसे है दैट विल बी अ की टू द ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ़ एंटायर इंडियन इकॉनमी. आप देखना आने वाले समय में जो है और इसके लिए जो है पीयूष गोयल है वित्त मंत्री सीतारमण है. 

    एक थिंक टैंक के जो हैं अश्विनी वैष्णव हैं. ये सब बैठ के सोच रहे हैं. उसके अंदर जो है अश्विनी वैष्णव की बात चलती है. तो दिस मैन इज टू वॉच इन द कैबिनेट इन द कमिंग इयर्स. देयर इज़ ए कहते हैं ना राइज़ एंड राइज़ ऑफ़ अश्विनी वैष्णव. और जितने विभाग उनको दिए जाते हैं बहुत अच्छे चलते हैं. रेलवे का कितना अच्छा चल रहा है. कौन मुझे उस दिन कह रहा था कि वह इतने साइलेंट परफॉर्मर और साइलेंट वर्कर हैं. इतने विभाग हैं उनके पास में. दो तीन और भी जोड़ दोगे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा. निभा लेंगे उसको. तो कुल मिला कहने का तात्पर्य है कि नरेंद्र मोदी की जो टीम है, थिंक टैंक है, वित्त मंत्री है, पीयूष गोयल है, अश्विनी वैष्णव है, और लोग हैं, पीएमओ के ऑफिसर्स हैं उसके अंदर जाना. सुपर है, यूनिक है. तो इसलिए यह जो चमत्कार हुआ है 8.2 का, यह हो सकता है यह रेट स्थाई भी रह जाए आने वाले समय में और एक मिरेकल होगा एशियन कंट्रीज के अंदर कि इंडिया हैज़ अचीव्ड दिस लेवल ऑफ़ ग्रोथ. 

    सवालः अमेरिका के पूर्व पेंटागन अधिकारी हैं माइकल. उन्होंने पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी की बढ़ती दोस्ती पर डोनाल्ड ट्रंप पर व्यंग किया है और उन्होंने कहा कि उन्हें तो नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए. क्या आप कुछ कहना चाहेंगे इस पर? 

    जवाबः वो ठीक कह रहे हैं. मन की पीड़ा इन शब्दों में उन्होंने व्यक्त की है. मन का फ्रस्ट्रेशन है. क्या करो? बट ही इज़ राइट कि वो फीपा पुरस्कार एक मिल गया है वहां पे जो है नोबेल पुरस्कार का तो कोई चांस था नहीं. बहुत कोशिश की उन्होंने मुनीर एंड कंपनी से लेकिन बैठा नहीं. दैट वे जो है अब इसने व्यंग किया इस आलोचक ने कि आज जो रशिया और इंडिया इतना करीब आ गए हैं और एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की बात चल रही है एट द कॉस्ट ऑफ अमेरिका. ठीक है? तो इस पल का जो श्रेय है वह पुतिन को नहीं जाता है. मोदी को नहीं जाता है. वह श्रेय जाता है ट्रंप को फॉर स्पइलिंग डिप्लोमेसी ऑफ अमेरिका. उस फ्रस्ट्रेशन में उन्होंने कहा है कि इस पल का जो श्रेय है वो इनको मिलना चाहिए और इसके लिए इन्ह नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए ताकि नोबेल पुरस्कार पाने की उनकी जो एक इच्छा है वो पूरी हो सके. व्यंग है बट गुड व्यंग एट द मोमेंट. 

    सवालः इन सबके बीच देखा गया है कि अमेरिका और भारत के बीच जो पर्यटन व्यवसाय है उसमें निरंतर गिरावट आ रही है. क्या इसको लेकर गजेंद्र सिंह शेखावत के पास कोई प्लान? 

    जवाबः देखो गजेंद्र सिंह बहुत कॉम्पिटेंट आदमी हैं लेकिन स्थितियां उनके नियंत्रण में नहीं है. गिरावट आने का क्या कारण? कारण है आपके सामने वीजा टेरिफ्स, एंटी ट्रंप सेंटीमेंट इन इंडिया आप देख रहे हैं. कोई लोग जाना नहीं चाहते. कोई बच्चों से परेशान है. उनके वीजा रुक गए वहां पे. तो तीनों जो कारण यह हैं जब तक यह बेसिक कारण हटेंगे नहीं तब तो ना तो स्टूडेंट जाएंगे ना व्यापारी जाएंगे ना कारोबारी जाएंगे ना टूरिस्ट जाएंगे तो थिंग्स आर बियोंड द कंट्रोल एंड कॉम्पिटेंस ऑफ टूरिज्म मिनिस्ट्री और गवर्नमेंट ऑफ इंडिया जब तक ये तीन मुद्दे नहीं सुलझेंगे जिसे कहते हैं तब तक कैसे बढ़ेगा हमारा टूरिज्म अमेरिका के साथ जो कि दूसरी जगह जबरदस्त बढ़ रहा आप देखिए अब विजय सिंह शेखावत का प्लान देखिए डोमेस्टिक टूरिज्म आज कहां से कहां है उनके आने के बाद से कितना इतना ग्राफ ऊपर गया है. 

    आज आप देखते हैं नैनीताल जाते हैं, जयपुर जाते हैं, देहरादून जाते हैं. दो-द किमी की लाइन दिखाई देती है आपको. वेटिंग लाइन ट्रैफिक जाम कितना बढ़ा है. लेकिन वो सीमा है ना कि अब अमेरिका का क्या करो? जब तक ये तीन चीजें इनमें सशन नहीं होगा तब तक इंप्रूवमेंट नहीं हो सकता टूरिज्म का. बाकी मिनिस्ट्री तो अच्छा काम कर रही है. अभी उन्होंने प्लान बनाया है कि अगले 5 साल में 2030 तक जो है भारत की गिनती संसार के उन 10 देशों में हो जाए जो टॉप टूरिज्म कंट्रीज कहे जाते हैं. 10 में आ जाओ. फिर 47 में और नीचे आ जाएंगे. सेकंड पे आ जाएंगे, थर्ड पे आ जाएंगे. फिर क्या डिफरेंट प्लान्स बनाए हैं मिनिस्ट्री ने. आप देखिए यहां जो है और सबसे बड़ी बात यह है टूरिस्ट डेस्टिनेशन डेवलप हो रहे हैं. वेडिंग डेस्टिनेशंस बन रहे हैं. टूरिज्म में क्या बूम आया हुआ है. तो वी कैन से कि एक्सेप्ट अमेरिका देयर इज़ अ कंप्लीट बूम इन टूरिज्म इन द कंट्री वीजा विद ऑल अदर कंट्रीज. एक्सेप्ट अमेरिका इसे कहना चाहिए. तो लेट्स सी कि कब यह स्थिति सुधरती है और कब इस दिशा में आगे कारवाई होती है. 

    सवालः आखिर क्या है मोदी पुतिन का रे एजेंडा यानी कि रेसिप्रोकल एक्सचेंज और लॉजिस्टिकल सपोर्ट ये एजेंडा क्या है? 

    जवाबः एजेंडा बहुत क्रिटिकल है. बहुत इंपॉर्टेंट है. इसमें यह है कि जितने इंडिया और उनके जो पोर्ट्स हैं जो है यह एयर बेससेस हैं इंडिया रशिया के जो है वो जॉइंटली इस्तेमाल किए जाते हैं. दोनों दोनों सेनाओं द्वारा जो है किए जा सकते हैं. ये बहुत बड़ा फैसला है. एक तरह से बहुत बड़ा डेवलपमेंट है. कहना चाहिए इसके इंप्लिकेशन क्या होंगे? इसका वो जो कहते हैं प्रोसीजर क्या तय होगा ये तो वक्त के साथ पता लगेगा. बट ए मेजर डेवलपमेंट एंड मेजर अचीवमेंट रादर आई शुड से ऑन डिफेंस फ्रंट विद इंडियन गवर्नमेंट. 

    सवालः एक चीज समझना चाहते हैं कि कंट्रोवर्सी क्या है? राहुल खड़गे पुतिन नो डिनर पॉलिसी जो थी इनविटेशन नहीं था. नो डिनर इनविटेशन वो है आखिर है क्या? क्या पुतिन खुद पहल करके राहुल और सोनिया से नहीं मिले. 

    जवाबः अब राहुल गांधी का कहना यह है कि भाई विदेशी मेहमान आते उनको बुलाया नहीं जाता. पर भी अब तो ऐसा विदेशी मेहमान था ना जो गांधी परिवार से बहुत पुराने से जुड़ा हुआ है रशिया. रशिया का आदमी 30 साल से तो यही है वहां पर प्रेसिडेंट जो है आपके संबंध रहे हैं उनके साथ. अब वो खुद आए हैं. एंड ही हैज़ चोजन नॉट टू कॉल ऑन यू नॉट टू मीट यू सुमोटो. तो यह भी तो एक आस्पेक्ट है ना कि भारत सरकार ने आपको बुलाया कि नहीं बुलाया. उनके साथ में अपॉर्चुनिटी दी कि नहीं एस एलओपी जो है लोकसभा राज्यसभा जो है. लेकिन एट द सेम टाइम यह भी तो एक क्वेश्चन है ना कि जो गेस्ट खुद आ रहा है वो भी तो अपनी इच्छा जाहिर कर सकता है ना. और विदेशी मेहमान जब आते हैं अपनी इच्छा जाहिर करते हैं मिलने की तो भारत सरकार मिलवाती है उनसे जब तक कि कोई एंटी नेशनल व्यक्ति नहीं हो सामने वाला जो है तो मिलवाती है तो कुछ चांस ऐसा हुआ उन्होंने इच्छा जाहिर नहीं की और उसके कारण स्पष्ट है पुतिन स्मार्ट ऑपरेटर है और आजकल क्या है किकोंकि इकॉनमी जो है डिफरेंट कंट्रीज में दे हैव टेकन अ फ्रंट सीट देन पॉलिटिकल सीट्स तो हर जो पॉलिटिकल लीडर है प्राइम मिनिस्टर है वो एक अच्छा बिज़नेसमैन हो गया अच्छा सेल्समैन हो गया है वो अच्छे से समझता है मुझे कब किससे मिलना है किससे नहीं मिलना है कीपिंग इन माइंड माय माय बिज़नेस इंटरेस्ट वि दैट पर्टिकुलर कंट्री तो उन्होंने सोचा वो यहां अच्छा चल रहा है. क्यों बीच में एक करें इस तरह की सिचुएशन या लाइकली सिचुएशन जो है तो नहीं मिले और मिलना नहीं हो पाया तो था कि डिनर का इनविटेशन नहीं आया मे बी सम कम्युनिकेशन गैप अब बस अभी चलता है ऑल इन लाइफ जो है बाकी बेसिकली था के पुतिन चाहते तो खुद ही जाके मिल लेते तो ये बात ही नहीं आती एनी हाउ लेट्स वेट फॉर द नेक्स्ट टाइम 

    सवालः एक सवाल और है कि पुतिन की भारत यात्रा के बाद जो भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई है उसको कितनी मजबूती मिली? 

    जवाबः बिल्कुल मजबूती मिली है उनको तो अमेरिका तो देखो डबल स्टैंडर्ड है हिपोक्रेसी आतंकवाद पे पाकिस्तान को सपोर्ट कर रहा है जो संसार का देश पाकिस्तान को सपोर्ट कर रहा है समझ लो कि आतंकवाद को निपटाना नहीं चाहता रशिया आतंकवाद को निपटाना चाहता है इंडिया के साथ इसलिए सीरियस मूव है ये और प्रस्ताव पास हुआ है वो जीरो टॉलरेंस वाला जो है और ये खाली कागजी प्रस्ताव नहीं है भारत और रशिया के बीच नरेंद्र मोदी पुतिन के बीच आतंकवाद को लेके जो भी डिस्कशन हुआ है इट इज़ अ सीरियस डिस्कशन.

    सवालः क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि नरेंद्र मोदी के 140 करोड़ के बाजार पर चीन अमेरिका के साथ-साथ रूस की भी निगाहें हैं. 

    जवाबः ऑफकोर्स तो मैंने आपसे कहा ना हर व्यक्ति मल्टीपल एजेंडा होता है हर व्यक्ति का और एजेंडा क्या स्वाभाविक है और खासकर भारत मित्र राष्ट्र है. अगर चीन की निगाह है, अमेरिका की निगाह है तो रशिया की निगाह सबसे पहले होनी चाहिए. ही हैज़ अ बेटर मोरल अथॉरिटी मोरल कन्विक्शन टू रूल इन इंडियन मार्केट टू टू सेल और बाय इन इंडियन मार्केट. हम जिसे कहते हैं तो उनकी भी निगाह है. तो नरेंद्र मोदी एक ऐसी खास पोजीशन में है आज वर्ल्ड इकॉनमी के अंदर कि उनके पास 140 करोड़ लोगों का मार्केट है. इसलिए क्या है आप चाहो या नहीं चाहो आप इंडिया को इग्नोर नहीं कर सकते. आप पसंद करो या खिलाफत करो लेकिन जिसे कहते हैं इग्नोर नहीं कर सकते आप उसको. तो नरेंद्र मोदी इज़ अ राजा ऑफ दिस मार्केट. 140 करोड़ पीपल जो है तो रशिया का भी इंटरेस्ट है. तो वेलकम है. आओ हम तो चाहते हैं खरीदो यहां पे बेचो. स्वागत है. 

    सवालः इन सबके बीच बड़ा सवाल यह भी है कि भारत और रूस के बीच जो ट्रेड डेफिसिट है, व्यापार घाटा है उसे भारत कैसे पूरा करेगा? 

    जवाबः वो तो एक सीरियस इशू है क्योंकि ऑयल का लोकल करेंसी में है लेनदेन और वहां भुगतान है उसको इंडिया में जब तक कि रशिया को हम एक्सपोर्ट नहीं करेंगे, एक्सपोर्ट नहीं बढ़ाएंगे, माल नहीं बेचेंगे. तब तक ट्रेड डेफिसिट आज जो नेगेटिव है वो नहीं हो सकता है और इंडिया की मजबूरी क्या है कि तेल सस्ता मिल रहा है. तो नेगेटिव ट्रेड डेफिसिट के बावजूद भी क्या है कि हम उसको निभा रहे हैं क्योंकि वहां जो हमारा बेनिफिट है वो लार्जर है. जो हमारा जो फायदा है प्रॉफिट है वो लार्जर है एज़ कंपेयर टू ट्रेड डेफिसिट जो है. तो गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया अब सीरियस है और अब इसमें कोशिश हो रही है पूरी प्लान बन रहा है इसके अंदर कि मिनिस्ट्री कॉमर्स में बन रहा है. इकोनमिक मिनिस्ट्री में प्लान बन रहा है इसमें जो है कि हाउ टू रेक्टिफाई दिस ट्रेड डेफिसिट विद रशिया. तो लेट्स सी अगले दो-ती सालों में कुछ ना कुछ इसमें होना चाहिए, सुधार होना चाहिए और आज जो नेगेटिव है वो जो बैलेंस है वो थोड़ा नेगेटिव बैलेंस कम होना चाहिए. ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए. 

    सवालः आखिर क्या है भारत और रशिया का नया सिल्क रूट कनेक्शन जो चाब बाहर से सीधा मॉस्को तक भारत के लिए रास्ता बनाएगा. 

    जवाबः ये तो बहुत अच्छा डेवलपमेंट है. इसे कहना चाहिए गेम चेंजर हो सकता है. लोग जो है साउथ चाइना सी से बहुत परेशान है लोग और सिल्क रूट से क्या राहत मिलेगी और सिल्क रूट क्या चाइना में पहले रेशम में चाइना बनता था किसी जमाने में तो रोमन साम्राज्य को वहां से ब्रिटेन को यूरोपियन कंट्रीज को वहां से आता था तो उस रूट को इसलिए जो है ना सिल्क रूट कहा जाता है. अब ये जो बना है तो ये बना है कि इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बना रहे हैं जिसको जो है ये 7200 कि.मी. लंबा होगा और 30% आपका कॉस्ट भी सेविंग आपको इसमें होगा. मिरेकल तो चाइना की परवाह किए बिना इस रास्ते से व्यापार हो सकता है. अभी 10 दिन पहले मैंने पढ़ा कि एक कैंटर मास्को से चला तेहरान के लिए इसी रूट से जो है ये और कुछ दिनों में 12 दिन में शायद वो यहां पे पहुंच गया सुरक्षित न्यू एक्सपेरिमेंट. तो ये रास्ता अगर चल गया तो भारत से भी क्या होगा कि सामान ईरान के थ्रू होता हुआ जाएगा आगे सारा और सेंट्रल एशिया और उनमें जाके आगे रशिया पिटर्स पर्क उन सब में जाएगा. वहां से जो है तो अभी क्या है तीन रूट हैं इंडिया और रशिया के बीच में एक रूट तो बॉम्बे पीट्सबर्ग का 16000 कि.मी. का है. दूसरा यह बन रहा है. तीसरा 10,000 कि.मी. का है. तो दिस विल बी कंपेयर टू द बेस्ट रूट जो बन रहा है. इस तरह से इसको मजबूत कर रहे हैं ये. तो इसमें क्या स्ट्रेटेजिक इसकी लेवेंसी है कि चाइना के कंट्रोल से बाहर होगा. हमारा कंट्रोल ज्यादा होगा. रशिया का कंट्रोल ज्यादा होगा. इसमें जो है फास्टर होगा और चीपर होगा. 

    सवालः राम माधव ने कहा है कि वेस्ट हैज़ ऑलवेज मिसअंडरस्टुड पुतिनस नेशनलिज्म. इसका मतलब क्या है? 

    जवाब: इसका मतलब यह है कि उनकी इस बात पे सहानुभूति है रशिया के साथ, पुतिन के साथ और उनको लगता है कि जो वेस्ट है जो वेस्टर्न कंट्रीज हैं इट हैज़ बीन बायस टुवर्ड्स पुतिन. और उनका कहना यह है कि वेस्ट ये चाहता है कि पुतिन को आइसोलेट किया जाए. इंडिया चाहता है उसको इंटीग्रेट किया जाए. एक बेसिक डिफरेंस जो है तो ही इज़ स्पीकिंग इंडियन वॉइस राम माधव भारत सरकार की जो है कि वो इन ए वे कि भाई आप इंटीग्रेट करिए उसको अछूत नहीं है कोई व्यक्ति हालात बदलते रहते हैं लेकिन कुछ चांस ऐसा हुआ है कि देयर हैज़ बीन अ मेजर कम्युनिकेशन गैप बिटवीन पुतिन एंड ऑल दीज़ कंट्रीज नाउ मे बी यूक्रेन मे बी द लेटेस्ट रीज़न तो उनका कहना ठीक है उनकी जगह और उनके विचारों का कहना है कि उसको ठीक से समझा नहीं गया उसकी भावनाओं को जो राष्ट्रवाद की भावना है पुतिन की उसको ठीक से किसी ने आइडेंटिफाई नहीं किया या उसको डिकोड नहीं किया इट्स फाइन उनका अपना विचार है यह औरकि भारत की सहानुभूति है इस समय पुतिन के साथ और पुतिन हमारा मित्र है तो राम माधव के लेख के साथ भी एक अच्छा एक एक सिंपैथिक एटीट्यूड है कि ठीक है. 

    सवालः एक जिज्ञासा है ये समझना चाहते हैं कि पुतिन के जो हमशक्ल है वो क्या है पूरा मामला और इसमें कितनी सच्चाई है? 

    जवाब: देखो ऐसा सच्चाई तो है लेकिन ये मैं कह सकता हूं इस बार जो पुतिन आए थे वो असली थे वो इस बार कोई हमशक्ल नहीं था उनका. कोई डुप्लीकेट नहीं था. असली पुतिन आए थे यहां. और स्वाभाविक तौर पे क्या है? पुतिन बेसिकली है ना एक जासूस हैं. और बचपन से वो सीक्रेट एजेंट बनना चाहते थे. बाद में सेना में गए. मन कम लगा केजीबी में चले गए और केजीबी में राइज़ एंड राइज़ ऑफ़ पुतिन आप देखिए कहां से कहां तक पहुंचे. प्रधानमंत्री बने, राष्ट्रपति बन गए. तो वह जो उनकी जो पर्सनालिटी में वह जो एक सीक्रेसी का एलिमेंट है बहुत हावी रहता है. तो अब क्या है कि और सिक्योरिटी में आप देखिए कि ही मस्ट हैव थ्रेट्स फ्रॉम इंटरनेशनल कम्युनिटी अमेरिका इनकी चलती है. आप देखते हैं और होते भी हैं पॉलिटिकल मर्डर्स ऐसा तो है नहीं कि हुए नहीं है दैट वे. तो आदमी अपनी सुरक्षा का अंजाम रखता है. तो उसमें कई दफा आपने देखा होगा कि जो बहुत ही सेंसिटिव लोग होते हैं अमेरिकन प्रेसिडेंट हो गया, रशियन प्रेसिडेंट है, चाइनीस प्रेसिडेंट है. तो इनके डुप्लीकेट्स जो हैं एक तरह से इनके साथ चलते हैं कई दफे और ये भी होता है कई दें कि डुप्लीकेट एक साथ तीन कारें चल रही हैं. उसमें तीनों में आपको ऐसा लगेगा पुतिन बैठा हुआ है. तीनों में ऐसा लगेगा आपको ट्रंप बैठा हुआ है. होता है एक में किसी असली के अंदर है. तो ये आम प्रैक्टिस उनमें करने की तो हम शक्ल की जो बात है ये सही है बात. आमतौर पे होता है ऐसा. अब जो इंडियन विजिट थी इसमें शायद कोई हमल नहीं था क्योंकि दो तीन कारों में पुतिन जैसा कोई व्यक्ति दिखाई नहीं दिया किसी को एक ही पुतिन था असली पुतिन तो इसमें नहीं था बाकी आम प्रैक्टिस है जिनको थ्रेट है जो टॉप पॉलिटिशियंस हैं टॉप लीडर्स हैं वर्ल्ड के वो सब ये डुप्लीकेट वाला जो है ये रखते हैं. 

    सवालः कुछ लोग ऐसा भी कहते हैं कि पुतिन की जो पर्सनल लाइफ है वो बहुत ही रोमांचक और रहस्यपूर्ण रही है. आप कुछ इसके बारे में कहना चाहेंगे? 

    जवाब: हां बिल्कुल रहस्य तो है ही मैंने कहा ना बेसिकली ही इज़ अ सीक्रेट मैन ही इज़ अ इंटेलिजेंस मैन ही इज़ अ स्पाई मैन फिजिकली कितने फिट रहते हैं आप देखते हैं अभी भी जो है 72 पे किस तरह से जंप करते हैं कैसे प्लेन की सीढ़ियां उतर रहे थे आप देखिए मैं भी हैरान था इस बात को देखिए कि आप देखिए जो है और रही बात इसकी पर्सनल की रोमांचकारी लाइफ की तो हर बड़े आदमी के जीवन में कुछ ना कुछ कहानियां ऐसी होती हैं पुतिन की कहानी ये है कि बहुत गरीब परिवार से थे और बेसिकली वहां पे लेनन ग्रड जो रशिया में इट्सबर्ग जो है वहां पर रहते थे. गांव में एक छोटा सा मकान था. पिता नेवी में थे. मां जो है फैक्ट्री में काम करती थी. बहुत गरीबी के हालात थे. उसमें जर्मन सेनाओं ने रशिया को घेर रखा था करीबन 3 साल तक. तो शहर बर्बाद था. खानेपीने का कोई इंतजाम नहीं था. भुखमरी से सुनते हैं पुतिन के बड़े भाई की मृत्यु हो गई. 

    उस गरीबी के हालात से पुतिन निकल कर के बाहर आए और आकर के जो है उन्होंने 12 साल की उम्र में जो है मैंने सुना कि उन्होंने रेड आर्मी रशियन आर्मी को ज्वाइन किया. 2000 में प्रधानमंत्री बने फिर राष्ट्रपति बने और अब तक वो राष्ट्रपति चल रहे हैं और जो पर्सनल रोमांचकारी लाइफ है तो उनका इस तरह का है कि क्योंकि उनकी लाइफ जो है सीक्रेटिव है सारी तो उनके बच्चे जिस स्कूल में जाते हैं वो नेचुरली दूसरे बच्चों के नाम से उनकी दर्ज होती है वहां पे. उनकी दो लड़कियां थी. जर्मनी में पढ़ती थी. बाद में शादी हो गई. पत्नी थी उनकी. उनसे उनका प्रेम विवाह हुआ था. अभी कुछ साल पहले वो बंधन टूट गया और 60 साल की उम्र जब थी पुतिन की मतलब 12 साल पहले तो उनका तलाक हुआ. उनकी पत्नी एयर होस्टेस थी. वहां उनकी मुलाकात एक मित्र ने करवाई थी. दोस्ती हुई तो उस महिला ने कहा कि मुझे व्यक्ति पसंद है. मुझे आकर्षित करता है. शादी हो गई. 

    शादी के छ महीने बाद भी उस महिला ने यह कहा कि मैं बहुत प्रभावित हूं और मैं सोचती थी जैसा पति मिले मुझे वैसा ही पति मिला. तो बहुत अच्छे संबंध उनके रहे. धीरे-धीरे पुतन राजनीति में आ गए. परिवार के लिए समय निकलना खत्म हो गया. तो उनकी पत्नी ने एक आत्मकथा अपनी मित्र को बताई और यह लिखा कि अब जो है मुझे ऐसा लगता है कि हमारे जीवन में प्रेम खत्म हो गया है और उसके बाद फिर उनका तलाक हो गया दोनों का और पुतिन ने पूरी शालीनता के साथ उसमें लिखा कि हम एक दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पाते थे जो है इसलिए अलग हो रहे हैं और आपसी समझौते से अलग हो रहे हैं. तो एक प्रेम कहानी का दुखद तो नहीं कहना चाहिए. एक म्यूचुअल अंत जैसे होता है एक डिग्निफाइड एंड डिसेंट अंत हुआ दैट वे जो है और पुतिन का जीवन जो है पारिवारिक जीवन जो भी जैसा है वो अच्छा है और एक्चुअली क्या है इन पदों पे रहने के बाद में प्रॉब्लम यही रहती है कि समय नहीं मिलता आपको निकालने के लिए बच्चे भी शायद उस लेखिका ने लिखा है कि उनको समय नहीं मिल पाता और उन्होंने स्वीकार कर लिया कि मैं ऐसे पद पे हूं एक तरह से कि समय निकालना बहुत कठिन है तो लाइफ उनकी रोमांचकारी थी अच्छी थी अभी भी है और पॉलिटिकली कितना स्ट्रांग जा रहे हैं आप सभी देख रहे हैं. तो एट द एंड ऑफ़ द डे ही इज़ अ डिसेंट एंड डिग्निफाइड पर्सन ऑन द ग्लोबल प्लेटफार्म. 

    सवालः वैसे तो कहने को बहुत कुछ है. लेकिन अगर तीन चार वाक्यों में पुतिन की इस यात्रा को मैं आपसे समराइज करने को कहूं समेटने को तो फिर आप क्या कहेंगे? 

    जवाब: देखो सबसे पहली बात तो ये कि ये जो पुतिनस इंडिया विजिट है इट्स ओनली अबाउट कंटिन्यूटी नो न्यू एजेंडा नो न्यू स्टेप्स एक्सेप्ट डिफेंस डील्स. कंटिन्यूटी को स्ट्रेंथन करने के लिए. सबसे पहली बात. दूसरा क्या है? जिसे कहते हैं इंडिया रिफ्यूज टू बो डाउन बिफोर ट्रंप नाउ सपोर्टेड बाय पुतिन. और तीसरा सेंटेंस ये कि इमरजेंस ऑफ अ न्यू वर्ल्ड ऑर्डर अगेंस्ट अमेरिका प्रैक्टिकली. ऑल दी थ्री बेसिक इशज़ यू कैन से एंड द फोर्थ यू कैन से इंडिया इज़ अ मेजर गेनर बाय डिफेंस डील्स विद रशिया ड्यूरिंग दिस विजिट.