महाराष्ट्र में कबूतरों को दाना डालना पड़ा भारी, कोर्ट ने लगाया 5000 रुपए का जुर्माना, जानें पूरा मामला

    मुंबई नगर निगम ने कबूतरों से होने वाले स्वास्थ्य संकट को देखते हुए दादर सहित शहर के अन्य हिस्सों में कबूतरखाने बंद करने का फैसला लिया. हालांकि, इस फैसले का विरोध भी हुआ, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त निर्णय लिया और किसी भी तरह की राहत नहीं दी.

    Maharashtra Dadar Pigeon Feeding Ban Mumbai Court Fines Man Sets Precedent on Public Health
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    मुंबई नगर निगम ने कबूतरों से होने वाले स्वास्थ्य संकट को देखते हुए दादर सहित शहर के अन्य हिस्सों में कबूतरखाने बंद करने का फैसला लिया. हालांकि, इस फैसले का विरोध भी हुआ, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त निर्णय लिया और किसी भी तरह की राहत नहीं दी. अब, एक कारोबारी को कबूतरों को दाना खिलाने के आरोप में अदालत द्वारा सजा और जुर्माना लगाया गया है. यह मामला न केवल मुंबई बल्कि पूरे देश में पहली बार सामने आया है, जहां किसी को इस तरह की सजा दी गई है.

    बॉम्बे हाई कोर्ट का सख्त आदेश

    मुंबई के दादर इलाके में कबूतरखाना बंद होने के बावजूद कुछ लोग कबूतरों को दाना खिलाने का सिलसिला नहीं रोक रहे थे. इनमें से एक कारोबारी, नितिन शेठ पर अदालत ने कार्रवाई की और उन्हें जुर्माना लगाया. बॉम्बे हाई कोर्ट ने साफ तौर पर सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना खिलाने पर प्रतिबंध की पुष्टि की. इस फैसले के बाद, नितिन शेठ पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की गई, जो इस मामले में ऐतिहासिक माना जा रहा है.

    नितिन शेठ पर आरोप और सजा

    नितिन शेठ, जो दादर में एक व्यापारी हैं, को सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना खिलाने के आरोप में दोषी पाया गया. पुलिस के मुताबिक, शेठ ने जानबूझकर प्रतिबंधित क्षेत्र में कबूतरों को दाना खिलाया, जिससे जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ. इस मामले में न्यायालय ने उन पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया और यह निर्णय भारतीय दंड संहिता की धारा 223 (ख) के तहत लिया गया. इसके अलावा, बीएनएस की धारा 271 के तहत उन पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बीमारी फैलाने का भी आरोप लगाया गया.

    क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

    यह सजा देश में पहली बार दी गई है, जो सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना खिलाने को लेकर की गई कार्रवाई का ऐतिहासिक उदाहरण बन गया है. बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने पहले ही कबूतरों को दाना खिलाने पर प्रतिबंध लागू किया है, और इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि अब इसे हल्के में नहीं लिया जाएगा. अदालत ने इसे एक उदाहरण बताया और भविष्य में इसे दोहराने से रोकने के लिए स्पष्ट संदेश दिया है.

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