भारतीय सेना को मिलेगा सोलर एनर्जी से उड़ने वाला पहला जासूसी ड्रोन, सीक्रेट ऑपरेशन में मिलेगी बड़ी मदद

    Solar Powered Spy Drone: भारत की सेना अब निगरानी और टोही में नई ऊंचाईयों को छूने जा रही है. देश के पहले सोलर एनर्जी ड्रोन को बेड़े में शामिल करने के साथ ही सीमाओं पर लंबी और लगातार नजर रखना संभव हो गया है.

    Indian Army get the first spy drone MAPSS to fly on solar energy great help in secret operations
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    Solar Powered Spy Drone: भारत की सेना अब निगरानी और टोही में नई ऊंचाईयों को छूने जा रही है. देश के पहले सोलर एनर्जी ड्रोन को बेड़े में शामिल करने के साथ ही सीमाओं पर लंबी और लगातार नजर रखना संभव हो गया है. इस आधुनिक तकनीक के लिए रक्षा मंत्रालय ने 168 करोड़ रुपये का करार किया है, और इसे बेंगलुरु की कंपनी न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज ने विकसित किया है. यह परियोजना रक्षा मंत्रालय के iDEX इनोवेशन प्रोग्राम के तहत तैयार की गई है.

    इस ड्रोन का नाम है MAPSS (मीडियम एल्टीट्यूड पर्सिस्टेंट सर्विलांस सिस्टम). खास बात यह है कि यह सोलर पावर से उड़ान भरता है और घंटों तक बिना रुके हवा में बना रह सकता है. पारंपरिक ड्रोन की तरह इसे बार-बार बैटरी या ईंधन बदलने की जरूरत नहीं है. इसका मतलब साफ है, सीमा पर लगातार नजर रखने की क्षमता अब भारत के हाथ में है.

    सीमाओं पर लंबी नजर और गुप्त ऑपरेशन

    सेना इस ड्रोन का इस्तेमाल खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और टोही अभियानों में करेगी. चाहे उत्तर के ऊंचे पर्वतीय इलाके हों या पश्चिम का रेगिस्तान, MAPSS लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में स्थिर रह सकता है. इसके इलेक्ट्रिक पावर पर काम करने की वजह से इसकी आवाज कम है और यह गर्मी भी कम पैदा करता है, जिससे दुश्मन के लिए इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है.

    सफल परीक्षण और ऑपरेशनल तैयारियां

    MAPSS की तकनीक पहले से किए गए हाई-एल्टीट्यूड सोलर ड्रोन प्रोजेक्ट्स पर आधारित है. 26,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर 24 घंटे से ज्यादा उड़ान भरने वाले ड्रोन का परीक्षण चित्रदुर्ग स्थित एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में किया गया. सेना के लिए तैयार MAPSS को वास्तविक ऑपरेशनल इलाकों में भी सफलतापूर्वक परखा जा चुका है.

    ड्रोन से बढ़ेगी सैन्य ताकत

    यह कदम सेना की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत ड्रोन क्षमताओं को तेजी से बढ़ाया जा रहा है. ऑपरेशन सिंदूर और अन्य मिशनों के बाद मानवरहित निगरानी और लुटेरिंग ड्रोन में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी हुई है. MAPSS अब मौजूदा ड्रोन सिस्टम की कमियों को पूरा करेगा और विशेषकर उन इलाकों में निगरानी करेगा जहां लगातार नजर रखना जरूरी है.

    स्वदेशी तकनीक और स्टार्टअप्स की बढ़ती भूमिका

    MAPSS पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है. iDEX प्रोग्राम जैसी पहल के जरिए भारत की नई कंपनियों को सेना की जरूरतों के मुताबिक नवाचार करने का मौका मिलता है. न्यू स्पेस के लिए यह परियोजना एक बड़ी उपलब्धि है, वहीं सेना को मिला एक आधुनिक और टिकाऊ उपकरण.

    भविष्य की जंग के लिए तैयार भारत

    आधुनिक युद्ध में ड्रोन और मानवरहित सिस्टम की अहमियत लगातार बढ़ रही है. सोलर-पावर्ड निगरानी ड्रोन अपनाकर भारत ने यह संकेत दे दिया है कि लंबी उड़ान क्षमता, कम लागत और स्वदेशी नवाचार के साथ देश सीमा सुरक्षा और खुफिया निगरानी में नई शक्ति हासिल कर रहा है. MAPSS न सिर्फ सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की रक्षा तकनीक को भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा.

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