Ind vs NZ: भारतीय क्रिकेट टीम इस समय एक बार फिर अपनी पुरानी समस्या से जूझती नजर आ रही है- शीर्ष क्रम पर अत्यधिक निर्भरता. टीम के दो सबसे अनुभवी और भरोसेमंद बल्लेबाज रोहित शर्मा और विराट कोहली अगर एक साथ असफल हो जाएं, तो भारत की जीत की संभावनाएं काफी हद तक कमजोर पड़ जाती हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में मिली हार ने इस सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है.
शुभमन गिल की कप्तानी और गौतम गंभीर की कोचिंग में तैयार इस टीम से संतुलित प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन हालिया नतीजों ने दिखा दिया है कि मध्यक्रम अब भी दबाव में टिक नहीं पा रहा है. ऑस्ट्रेलिया सीरीज से लेकर अब तक के मुकाबलों को देखें तो भारत की जीत और हार का सीधा संबंध रोहित और विराट के प्रदर्शन से जुड़ा दिखाई देता है.
ऑस्ट्रेलिया दौरे से शुरू हुई कहानी
पिछले साल भारतीय टीम ने शुभमन गिल की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था, जहां तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली गई. उस सीरीज में भारत को केवल एक मैच में जीत मिली थी. उस जीत में भी कहानी वही रही- रोहित शर्मा और विराट कोहली का बल्ला जमकर बोला.
उस मुकाबले में रोहित शर्मा ने शानदार 121 रन की पारी खेली थी, जबकि विराट कोहली ने 74 रन बनाकर उनका भरपूर साथ दिया था. टीम की जीत में बाकी बल्लेबाजों का योगदान सीमित रहा, लेकिन दो दिग्गजों की साझेदारी भारत के लिए निर्णायक साबित हुई.
साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड में दोहराई तस्वीर
इसके बाद साउथ अफ्रीका दौरे पर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला. पहले वनडे में विराट कोहली ने 135 रन की जबरदस्त पारी खेली, वहीं रोहित शर्मा ने 57 रन बनाए. उस मैच में भारत को जीत मिली, लेकिन दूसरे वनडे में कोहली के शतक के बावजूद टीम हार गई. तीसरे मुकाबले में दोनों बल्लेबाजों ने अर्धशतक जमाए, जिससे भारत ने मुकाबले में चुनौती पेश की.
न्यूजीलैंड के खिलाफ भी यही पैटर्न दोहराया गया. पहले वनडे में भारत को जीत दिलाने में विराट कोहली की 93 रन की पारी निर्णायक रही. लेकिन दूसरे वनडे में जब रोहित और विराट दोनों सस्ते में पवेलियन लौट गए, तो पूरी टीम दबाव में आ गई और न्यूजीलैंड ने आसानी से मैच अपने नाम कर लिया.
एक का चलना भी जरूरी
भारतीय टीम अब उस स्थिति में पहुंच गई है जहां रोहित शर्मा या विराट कोहली में से किसी एक का भी चलना लगभग अनिवार्य हो गया है. जब दोनों में से कोई एक लंबी पारी खेलता है, तो टीम का स्कोर मजबूत हो जाता है और बाकी बल्लेबाजों को खेलने की आजादी मिलती है. लेकिन जब दोनों एक साथ फेल होते हैं, तो मध्यक्रम की कमजोरी खुलकर सामने आ जाती है.
यह स्थिति टीम मैनेजमेंट के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि आधुनिक क्रिकेट में किसी एक या दो खिलाड़ियों पर निर्भर रहना खतरनाक साबित हो सकता है.
तीसरा वनडे बना निर्णायक मुकाबला
न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरा वनडे हारने के बाद सीरीज अब 1-1 की बराबरी पर आ गई है. तीसरा और आखिरी मुकाबला सीरीज का फैसला करेगा. ऐसे में टीम इंडिया की नजरें एक बार फिर अपने सबसे अनुभवी बल्लेबाजों रोहित शर्मा और विराट कोहली पर टिकी होंगी.
इस सीरीज के बाद भारत को अगले छह महीनों तक कोई वनडे मैच नहीं खेलना है. ऐसे में यह मुकाबला न केवल सीरीज जीत के लिहाज से अहम है, बल्कि टीम का आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए भी बेहद जरूरी है.
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