शिमला: हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में अध्यक्ष पद और संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर चल रही अटकलों के बीच विधानसभा के उपाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है. इस इस्तीफे को विधानसभा सचिवालय ने स्वीकार कर लिया है, और कांग्रेस में अब बड़े संगठनात्मक बदलावों की चर्चा तेज हो गई है. सिंह, जो सिरमौर जिले के श्रीरेणुका जी से विधायक हैं, अब विधायक के तौर पर बने रहेंगे, लेकिन विधानसभा उपाध्यक्ष के पद से उनकी विदाई ने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं.
क्या विनय कुमार सिंह को मिलेगी प्रदेश अध्यक्ष जिम्मेदारी?
विनय कुमार सिंह का इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाओं का कारण बन गया है. हाल ही में उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने पार्टी के लिए कोई भी जिम्मेदारी निभाने की इच्छा जताई थी. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान इस समय विनय कुमार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त करने के लिए गंभीरता से विचार कर रहा है. उनके इस्तीफे के बाद यह संभावना और भी प्रबल हो गई है कि उन्हें पार्टी की अगुवाई सौपी जा सकती है.
राहुल गांधी और खरगे ने किया था विनय कुमार का इंटरव्यू
कांग्रेस नेताओं की दिल्ली में हाल ही में हुई मुलाकात के दौरान, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने छह कांग्रेस नेताओं को इंटरव्यू के लिए बुलाया था. इनमें विनय कुमार सिंह का नाम भी शामिल था, जो इस प्रक्रिया का हिस्सा बने. इसके साथ ही शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, ठियोग विधायक कुलदीप सिंह राठौर और अन्य पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस बैठक का हिस्सा थे. यह मुलाकात यह संकेत देती है कि विनय कुमार सिंह को लेकर कांग्रेस आलाकमान के मन में कोई विशेष योजना बन रही है.
संभावित कैबिनेट मंत्री बनने का भी कयास
हालांकि, कुछ राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि विनय कुमार सिंह को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बल्कि कैबिनेट में शामिल कर मंत्री बनाया जा सकता है. उनके इस्तीफे के बाद, इस संभावना को लेकर अटकलें और भी बढ़ गई हैं. विशेष रूप से, वे कांग्रेस के लिए एक दलित चेहरा भी हैं, जो पार्टी के जातिगत समीकरणों को सही तरीके से संतुलित कर सकता है. इसके अलावा, उनका संगठनात्मक अनुभव भी पार्टी के लिए लाभकारी हो सकता है, जिससे सरकार की स्थिति और मजबूत हो सके.
विनय कुमार सिंह का राजनीतिक सफर
विनय कुमार सिंह ने अपनी राजनीतिक यात्रा में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है. वे तीन बार विधायक रहे हैं और वीरभद्र सरकार में सीपीएस (CPS) का पद भी संभाल चुके हैं. साथ ही, वे राज्य कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उनका राजनीतिक अनुभव और राज्य में उनके पिता, पूर्व विधायक प्रेम सिंह की विरासत, उन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत चेहरा बनाती है. खासकर SC वर्ग के लिए कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने SC के लिए आरक्षित 17 सीटों में से 10 सीटें जीती थीं.
कांग्रेस आलाकमान के लिए सही विकल्प
कांग्रेस आलाकमान के लिए अब यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा, क्योंकि पार्टी राज्य में कई महीनों से चल रही गुटबाजी को स्थिर करने की कोशिश कर रही है. विनय कुमार सिंह एक ऐसा नेता हो सकते हैं, जो इन गुटबाजी की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं. उनकी बेदाग छवि, जातिगत समीकरणों में संतुलन और विरोधी खेमों में स्वीकार्यता उन्हें पार्टी के लिए एक आदर्श विकल्प बनाती है.
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