हरियाणा के किसानों को अब सौर ऊर्जा से लाभ उठाने का बेहतरीन मौका मिल रहा है. राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 75 प्रतिशत तक सब्सिडी पर सोलर एनर्जी पंप लगाने की सुविधा शुरू की है. नारनौल के अतिरिक्त उपायुक्त के अनुसार, इच्छुक किसान 25 दिसंबर से 29 दिसंबर 2025 तक हरियाणा सरकार के सरल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इस योजना का उद्देश्य किसानों को सस्ती और पर्यावरण-friendly ऊर्जा उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी कृषि उत्पादन लागत कम हो सके और उन्हें निरंतर ऊर्जा का स्रोत मिले.
सोलर पंप की विभिन्न कैटेगोरीज़
इस योजना के तहत किसानों को सोलर पंप की 12 अलग-अलग कैटेगोरीज़ में चयन का अवसर मिलेगा. इन पंपों की क्षमता 3 HP, 5 HP, 7.5 HP और 10 HP तक होगी. चयन प्रक्रिया में किसान की सालाना आय और भूमि के आकार को प्राथमिकता दी जाएगी. प्रशासन विशेष रूप से उन किसानों को प्राथमिकता देगा जिनके पास बिजली आधारित ट्यूबवेल कनेक्शन हैं, बशर्ते वे इसे सरेंडर कर दें. यह योजना केवल उन्हें लाभान्वित करेगी जो पर्यावरण की दृष्टि से सशक्त विकल्प अपनाने के लिए तैयार हैं.
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज़
इस योजना में आवेदन करने के लिए किसानों को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों की जरूरत होगी, जिनमें परिवार आईडी, भूमि के रिकॉर्ड (जमाबंदी) और एक प्रमाण पत्र शामिल है जिसमें यह लिखा हो कि आवेदक के पास कोई बिजली आधारित पंप नहीं है. आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, और किसानों को एक वर्चुअल अकाउंट नंबर मिलेगा, जिसके माध्यम से वे अपनी राशि का भुगतान करेंगे. इस योजना में 5 साल की वारंटी और प्राकृतिक आपदाओं व चोरी से सुरक्षा के लिए बीमा भी मिलेगा.
वेटिंग लिस्ट में शामिल किसानों के लिए नए अवसर
जिन किसानों का नाम वेटिंग लिस्ट में पहले से था, उन्हें भी इस योजना का फायदा उठाने का मौका मिलेगा. यदि वे अपनी सोलर पंप की क्षमता या प्रकार में बदलाव चाहते हैं, तो वे अपनी पुरानी फैमिली ID का उपयोग करके पुनः आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें नया चालान जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि उनका भुगतान पहले ही विभाग में जमा किया जा चुका है. यदि कोई किसान तय समय सीमा में नया आवेदन नहीं करता है, तो उसका पहले जमा किया गया हिस्सा वापस कर दिया जाएगा.
जलवायु सुधार और माइक्रो-इरिगेशन की अनिवार्यता
प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को जलवायु सुधार की दिशा में भी कदम उठाने का अवसर मिल रहा है. प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि जिन गांवों में भूजल स्तर 100 फीट से नीचे गिर चुका है, वहां माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम लगाना आवश्यक होगा. इसके अतिरिक्त, भूमिगत पाइपलाइन या माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम की आवश्यकता अन्य क्षेत्रों में भी होगी. हालांकि, धान की खेती करने वाले किसान जो अत्यधिक जलवायु प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं, और जिनका भूजल स्तर 40 मीटर से नीचे गिर चुका है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे.
5 साल की वारंटी और बीमा
हरियाणा सरकार के इस कदम से किसानों को सोलर पंप लगाने के साथ-साथ एक सुरक्षा कवच भी मिलेगा. इन सोलर पंपों पर 5 साल की वारंटी दी जाएगी और साथ ही प्राकृतिक आपदाओं और चोरी से सुरक्षा के लिए बीमा कवर भी उपलब्ध होगा. यह योजना किसानों के लिए न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है.
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