बिहार सरकार एक बार फिर महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. इस बार फोकस ग्रामीण नहीं, बल्कि शहरी इलाकों की महिलाओं पर है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत हजारों महिलाओं के बैंक खाते में 10-10 हजार रुपये भेजने की तैयारी चल रही है. खास बात यह है कि इस योजना के लिए सबसे ज्यादा आवेदन शहरी क्षेत्रों से आए हैं, जिससे सरकार का ध्यान अब शहरों में रहने वाली महिलाओं पर केंद्रित हो गया है.
इस योजना के लिए राज्यभर से करीब 19 लाख महिलाओं ने आवेदन किया है. इनमें लगभग 15 लाख महिलाएं शहरी क्षेत्रों से हैं, जबकि करीब 4 लाख आवेदन ग्रामीण इलाकों से आए हैं. पहले चरण में ग्रामीण महिलाओं को योजना का अधिक लाभ मिला था, क्योंकि वहां जीविका समूह पहले से सक्रिय थे. वहीं शहरी क्षेत्रों में यह ढांचा कमजोर होने के कारण कई महिलाएं पिछली बार लाभ से वंचित रह गई थीं.
10 हजार रुपये से पहले होगी सख्त जांच
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहली किस्त जारी करने से पहले शहरी क्षेत्रों से आए करीब 15 लाख आवेदनों की जांच की जाएगी. इस जांच में यह देखा जाएगा कि महिला के परिवार में कोई आयकरदाता तो नहीं है. इसके अलावा परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में, आंगनबाड़ी सेविका या सहायिका, आशा कार्यकर्ता या किसी भी तरह का संविदा कर्मी नहीं होना चाहिए. साथ ही एक परिवार से सिर्फ एक ही महिला को योजना का लाभ दिया जाएगा. जो महिलाएं इन शर्तों पर खरी नहीं उतरेंगी, उनके आवेदन स्वतः निरस्त कर दिए जाएंगे. पात्र महिलाओं के लिए यह भी जरूरी होगा कि वे किसी न किसी जीविका या आजीविका समूह से जुड़ें. इसके बाद ही स्वरोजगार शुरू करने के लिए उन्हें 10 हजार रुपये की पहली किस्त दी जाएगी.
पूर्णियां से हजारों महिलाओं ने किया आवेदन
पूर्णियां नगर आयुक्त कुमार मंगलम के अनुसार, सिर्फ पूर्णियां शहरी क्षेत्र से ही लगभग 31 हजार महिलाओं ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत आवेदन किया है. सभी आवेदनों की जांच नियमों के अनुसार की जा रही है. पात्र महिलाओं को 12 से 15 सदस्यों वाले नए या पहले से संचालित आजीविका समूह से जोड़ा जाएगा. समूह से जुड़ते ही पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये उनके खाते में भेजे जाएंगे.
आगे कैसे मिलेगा बड़ा फंड?
अधिकारियों के मुताबिक, लाभ की राशि सीधे आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाएगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे. नगर निगम और बैंक मिलकर स्वयं सहायता समूहों की ग्रेडिंग करेंगे. इसी के आधार पर आगे दूसरी किस्त में 2 लाख रुपये का ऋण मिलेगा. इसके बाद ऋण चुकाने की स्थिति में तीसरी किस्त के तौर पर 2.50 लाख से लेकर 6 लाख रुपये तक की सहायता दी जा सकती है. हालांकि यह साफ कर दिया गया है कि यह ऋण समय पर चुकाना अनिवार्य होगा, वरना महिलाओं का सिविल स्कोर प्रभावित हो सकता है.
चुनावी वादे से आगे की रणनीति
चुनाव के समय जब महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे गए थे, तब विपक्ष ने इसे चुनावी हथकंडा बताया था. विपक्ष का कहना था कि चुनाव खत्म होते ही यह योजना बंद हो जाएगी. लेकिन अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शहरी महिलाओं को भी इस योजना में शामिल करने का फैसला लेकर उन तमाम आशंकाओं पर विराम लगा दिया है. राजनीतिक जानकार इसे नीतीश कुमार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं, जिससे शहरी इलाकों की लाखों महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो सकेंगी.
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