Cash Crops Bihar: बिहार की कृषि क्षेत्र इन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. राज्य सरकार अब पारंपरिक अनाज और आम फसलों से आगे बढ़कर कैश क्रॉप्स (नकदी फसल) पर जोर दे रही है. इसका उद्देश्य न केवल किसानों की आय बढ़ाना है, बल्कि बिहार को अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करना भी है.
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने इस पहल को किसानों के लिए एक प्रभावी और लाभकारी मॉडल बताया. उन्होंने कहा कि टमाटर, मिर्च और लहसुन जैसी फसलें कम समय में अधिक लाभ देती हैं और उनकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है. इस मॉडल के जरिए छोटे और सीमांत किसान भी अपनी आय बढ़ा सकते हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं.
पंचायत स्तर पर क्लस्टर आधारित खेती का ढांचा
कृषि मंत्री के अनुसार, इस योजना के तहत प्रत्येक पंचायत में लगभग 15 एकड़ क्षेत्रफल का कृषि क्लस्टर विकसित किया जा रहा है. इन क्लस्टरों का मुख्य उद्देश्य किसानों को समूह में एक जैसी फसल उगाने के लिए प्रोत्साहित करना है.
क्लस्टर आधारित खेती के फायदे:
राम कृपाल यादव ने कहा कि यह मॉडल पारंपरिक फसलों के मुकाबले कई गुना अधिक नकद आय प्रदान करता है. जहां सामान्य धान, गेहूं और मक्का जैसी फसलें लंबे समय और सीमित मुनाफे के साथ आती हैं, वहीं टमाटर, मिर्च और लहसुन जल्दी पैदा होते हैं और तुरंत बाज़ार में बिकते हैं.
केंद्र और राज्य की संयुक्त पहल
यह योजना प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत वित्तीय वर्ष 2025–26 में लागू की गई है. यह रैयत और गैर-रैयत दोनों तरह के किसानों के लिए समान रूप से उपलब्ध है.
कृषि मंत्री ने बताया कि बिहार की उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु और मेहनती किसान इस योजना की सफलता की मजबूत नींव हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य का उद्देश्य केवल किसानों को उत्पादक बनाना नहीं, बल्कि उन्हें लाभकारी कृषि के भागीदार के रूप में स्थापित करना है.
तकनीक, बाजार और पारदर्शिता पर जोर
क्लस्टर आधारित खेती योजना में किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक तकनीकी मार्गदर्शन, सिंचाई और जैविक खाद जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं. इसके साथ ही उत्पादन के बाद उसे बाजार तक पहुंचाने के लिए किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से संगठित मार्केटिंग की सुविधा भी मुहैया कराई जा रही है. सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि योजना का लाभ सही और पात्र किसानों तक पहुंचे.
इसके लिए डीबीटी प्रणाली, जियो-टैगिंग और नियमित सत्यापन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि किसानों को सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रखकर प्रसंस्करण और भंडारण की सुविधा देना भी योजना का हिस्सा है, ताकि उत्पादन के मूल्य में स्थिरता बनी रहे और किसान का लाभ अधिक हो.
बिहार की कृषि की नई दिशा
राम कृपाल यादव के अनुसार, टमाटर, मिर्च और लहसुन की क्लस्टर आधारित खेती बिहार की कृषि को नई ऊंचाई तक ले जाएगी. यह केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य को आधुनिक, तकनीकी और लाभकारी कृषि के क्षेत्र में अग्रणी बना सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस योजना के माध्यम से बिहार उद्यानिकी आधारित कैश क्रॉप उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है. इससे राज्य की कृषि की तस्वीर बदलने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
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