Operation Kalanemi in Uttarakhand: उत्तराखंड में राज्य सरकार ने पाखंड और धोखाधड़ी के खिलाफ एक अहम कदम उठाया है. ऑपरेशन कालनेमि के तहत अब तक 511 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 19 लोग बांग्लादेशी नागरिक हैं. इस ऑपरेशन का उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना है जो धार्मिक आस्था और विश्वास की आड़ में धोखाधड़ी या पाखंड कर रहे हैं. यह ऑपरेशन जुलाई 2025 में शुरू किया गया था और इसके तहत अब तक 4,800 से ज्यादा लोगों का वेरिफिकेशन किया गया है.
ऑपरेशन कालनेमि का उद्देश्य
उत्तराखंड सरकार का ऑपरेशन कालनेमि राज्य में पाखंडी बाबाओं और फर्जी साधु-संतों पर शिकंजा कसने के लिए चलाया जा रहा है. रामायण में कालनेमि नामक राक्षस के उदाहरण से प्रेरित होकर इस अभियान को शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य धोखाधड़ी और छल करने वालों को बेनकाब करना है. धार्मिक स्थानों पर छुपकर लोगों को ठगने वाले इन ठगों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन कालनेमि को एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है.
गिरफ्तारियों का आंकड़ा और जांच प्रक्रिया
हरिद्वार, देहरादून और उधम सिंह नगर जिलों में इस अभियान के तहत अब तक 4,800 से अधिक लोगों का वेरिफिकेशन किया गया है. इनमें से 511 लोग गिरफ्तारी के दायरे में आए हैं, क्योंकि उनके पास सही पहचान पत्र या निवास संबंधित जानकारी नहीं मिली. इन गिरफ्तारियों में 19 बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनके पास अवैध तरीके से उत्तराखंड में रहने की जानकारी थी.
साधु-संतों का वेरिफिकेशन
उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में बागेश्वर पुलिस ने भी ऑपरेशन कालनेमि के तहत धार्मिक स्थलों और मंदिर परिसरों में रह रहे साधु-संतों, सन्यासियों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों का वेरिफिकेशन किया है. पुलिस ने इन व्यक्तियों के पहचान पत्रों और उनके निवास संबंधी जानकारी की जांच की है. राज्य की पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध धार्मिक गतिविधि या व्यक्तियों के बारे में तुरंत जानकारी पुलिस को दें.
समाज को पाखंड से मुक्त करना
ऑपरेशन कालनेमि का प्रमुख उद्देश्य उत्तराखंड की धार्मिक आस्था और पवित्रता को बनाए रखते हुए समाज को ढोंग और पाखंड से मुक्त करना है. इस अभियान के तहत जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, वे अक्सर धार्मिक प्रतीकों और आस्थाओं का गलत फायदा उठाते थे, ताकि समाज में भ्रम और डर फैलाया जा सके.
उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन कालनेमि का यह अभियान निरंतर जारी रहेगा, ताकि राज्य की पवित्र भूमि पर किसी प्रकार के धोखे और पाखंड को रोका जा सके. इस अभियान से न केवल धार्मिक जगहों पर विश्वास की सुरक्षा होगी, बल्कि समाज में फैले हुए गलत विश्वासों को भी समाप्त किया जाएगा.
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